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Online Scam: क्यूआर भेजकर दो हजार से कम का ही पेमेंट क्यों मांगते हैं स्कैमर्स, यहां समझें इसके पीछे की गणित

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Sun, 31 May 2026 08:28 PM IST
सार

Why Fraudsters Ask for Small UPI Payments: इन दिनों कई ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड देखने को मिल रहे हैं, जिहां दो हजार से कम का ट्राजेक्शन होता है। ऐसे में आइए इस लेख में समझते हैं कि आखिर ठग दो हजार से कम का ट्राजेक्शन क्यों करने को कहते हैं। 

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QR Code Scam Math: Why Online Fraudsters Ask for Small Payments Under Rs 2000; The Hidden Strategy Explained
क्यूआर की मदद से स्कैम - फोटो : AI

QR Code Online Scam Mechanism: आजकल डिजिटल पेमेंट के जमाने में यूपीआई स्कैम काफी बढ़ गया है, मगर क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि ऑनलाइन ठग अक्सर लोगों को ₹2,000 से कम का ही क्यूआर कोड भेजकर चूना लगाते हैं? आम इंसान को लगता है कि इतनी छोटी रकम के लिए कोई जालसाजी नहीं करेगा, और इसी मानसिकता का फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं। 



दरअसल, इसके पीछे ठगों की एक सोची-समझी गणित और चालाकी होती है। असल में, जब फोन पर भेजे गए क्यूआर से पेमेंट करना होता है, तो उस पर अधिकतम ₹2,000 का ही ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। यही वजह है कि ठग जब क्यूआर भेजकर पैसे मांगते हैं, तो वे दो हजार से कम का अमाउंट ही रखते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग इसे कम रकम समझकर बिना सोचे-समझे पेमेंट कर देते हैं। इसलिए आइए इस लेख में समझते हैं कि स्कैमर्स केवल छोटी रकम को ही अपना निशाना क्यों बनाते हैं।

QR Code Scam Math: Why Online Fraudsters Ask for Small Payments Under Rs 2000; The Hidden Strategy Explained
अधिकतम सीमा और ऑटो-डेबिट के नियमों का फायदा - फोटो : FREEPIK

अधिकतम सीमा और ऑटो-डेबिट के नियमों का फायदा

  • सुरक्षा नियमों के तहत कई मर्चेंट या कस्टमाइज्ड क्यूआर कोड लिंक्स पर एक बार में अधिकतम ₹2,000 तक की ही भुगतान सीमा तय होती है, जिससे ठगों को पेमेंट निकालने में आसानी होती है।
  • इस तय सीमा के अंदर होने वाले पेमेंट्स पर उतनी कड़ी सुरक्षा नहीं होती है जितने बड़े अमाउंट पर होती है, इसलिए ट्रांजैक्शन तुरंत और आसानी से सफल हो जाता है।
  • कम रकम होने के कारण पेमेंट गेटवे पर यह ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट या सस्पेक्ट फ्लैग के सेकेंडों में पूरा हो जाता है।
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QR Code Scam Math: Why Online Fraudsters Ask for Small Payments Under Rs 2000; The Hidden Strategy Explained
बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियों से बचना - फोटो : FREEPIK

बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियों से बचना

  • बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के ऑटोमैटिक फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम बड़ी रकम के ट्रांसफर पर तुरंत एक्टिव हो जाते हैं, जबकि छोटे अमाउंट पर वे अलर्ट नहीं भेजते।
  • ₹2,000 से कम के ट्रांजैक्शन पर पेमेंट ऐप्स आमतौर पर उपभोक्ता को कोई संदिग्ध या फ्रॉड पॉप-अप नोटिफिकेशन नहीं दिखाते हैं।
  • इस लूपहोल का फायदा उठाकर स्कैमर्स सुरक्षा जांच के दायरे में आए बिना आसानी से अपना काम कर जाते हैं।
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बल्क स्कैमिंग के जरिए बड़ी कमाई की गणित - फोटो : FREEPIK

बल्क स्कैमिंग के जरिए बड़ी कमाई की गणित

  • ठग एक साथ हजारों लोगों को फर्जी कैशबैक, बिजली बिल या लॉटरी के नाम पर दो हजार से कम के क्यूआर कोड भेजते हैं।
  • अगर एक दिन में सिर्फ 200 लोग भी ₹1,500 के झांसे में आ गए, तो ठगों की एक दिन की अवैध कमाई लाखों में पहुंच जाती है।
  • हमेशा याद रखें कि किसी से भी पैसे प्राप्त करने के लिए कभी क्यूआर कोड स्कैन करने या यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती।
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कानूनी कार्रवाई का डर न होना - फोटो : FREEPIK
आम इंसान का मनोविज्ञान
  • जब किसी के खाते से ₹500, ₹1,200 या ₹1,800 जैसी छोटी रकम कटती है, तो आम इंसान इसे छोटा नुकसान मानकर भूल जाने की कोशिश करता है।
  • इतनी कम रकम के लिए कोई भी पीड़ित पुलिस स्टेशन या साइबर सेल के चक्कर काटकर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता।
  • जब लोग पुलिस में शिकायत ही दर्ज नहीं कराते, तो स्कैमर्स का हौसला बढ़ जाता है और वे बिना किसी कानूनी डर के खुलेआम घूमते हैं।
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