Landlord Tenant Laws India: जब भी कोई व्यक्ति नया घर या दुकान किराये पर लेता है, तो मकान मालिक और किरायेदार के बीच एक लिखित समझौता होता है, जिसे रेंट एग्रीमेंट कहते हैं। अगर आपने कभी ध्यान दिया हो, तो यह रेंट एग्रीमेंट अमूमन हमेशा 11 महीने का ही बनाया जाता है। कभी सोचा है कि यह पूरे 1 साल का क्यों नहीं होता?
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Rent Agreement: 11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट? जानें मकान मालिक और किरायेदार से जुड़े नियम
Sun, 19 Jul 2026 03:04 PM IST
Shikhar Baranawal
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Sun, 19 Jul 2026 03:04 PM IST
सार
Rent Agreement 11 Months Reason: बड़े शहरों में बहुत से लोग अपने घर से दूर किराए पर रह रहे होते हैं। ऐसे में अक्सर ये देखने को मिलता है कि अधिकतर मकान मालिक 11 महीने का ही रेंट एग्रिमेंट करवाते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है।
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रेंट एग्रीमेंट 11 महीने नियम
- फोटो : AI
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रजिस्ट्रेशन एक्ट और स्टांप ड्यूटी से बचने का तरीका
- फोटो : Amar Ujala
रजिस्ट्रेशन एक्ट और स्टांप ड्यूटी से बचने का तरीका
- भारतीय पंजीकरण अधिनियम के तहत, अगर कोई रेंट एग्रीमेंट 12 महीने या उससे अधिक समय के लिए बनाया जाता है, तो उसका सरकारी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो जाता है।
- रजिस्ट्रेशन कराने पर दोनों पक्षों को भारी-भरकम रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती है।
- इस सरकारी खर्च और लंबी अदालती कागजी कार्रवाई से बचने के लिए लोग 11 महीने का ही शॉर्ट-टर्म एग्रीमेंट बनवाते हैं।
मकान मालिक को मिलता है किराया बढ़ाने का कानूनी हक
- फोटो : Amar Ujala
मकान मालिक को मिलता है किराया बढ़ाने का कानूनी हक
- 11 महीने का एग्रीमेंट खत्म होते ही मकान मालिक के पास किराये में बढ़ोतरी करने का सीधा अधिकार आ जाता है।
- नया एग्रीमेंट रिन्यू करते समय मकान मालिक बाजार के हिसाब से 5 से 10 फीसदी तक किराया आसानी से बढ़ा सकते हैं।
- अगर एग्रीमेंट सालों-साल का होगा, तो मकान मालिक अपनी मर्जी से बीच में किराया नहीं बढ़ा पाएंगे, इसलिए वे कम समय का समझौता पसंद करते हैं।
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विवाद होने पर किरायेदार से घर खाली कराना होता है आसान
- फोटो : Amar Ujala
विवाद होने पर किरायेदार से घर खाली कराना होता है आसान
- भारत के सख्त रेंट कंट्रोल एक्ट के नियम आमतौर पर लंबी अवधि के किरायेदारों के पक्ष में होते हैं।
- अगर एग्रीमेंट 11 महीने का है, तो कानूनी तौर पर किरायेदार को उस संपत्ति पर लंबे मालिकाना हक का दावा करने का मौका नहीं मिलता।
- एग्रीमेंट की अवधि समाप्त होते ही अगर मकान मालिक चाहे, तो वह बिना किसी बड़े कानूनी पचड़े के किरायेदार से अपना मकान खाली करवा सकता है।
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नोटरी और सुरक्षा के लिए आम इंसान रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : Adobe Stock
नोटरी और सुरक्षा के लिए आम इंसान रखें इन बातों का ध्यान
- भले ही 11 महीने के एग्रीमेंट का सरकारी रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है, लेकिन इसे ₹100 या ₹500 के स्टांप पेपर पर लिखकर किसी प्रमाणित वकील से अटेस्ट करवाना बेहद जरूरी है।
- इस दस्तावेज में दोनों पक्षों के हस्ताक्षर, सिक्योरिटी डिपॉजिट (अग्रिम राशि), नोटिस पीरियड और बिजली-पानी के बिल की शर्तें साफ-साफ लिखी होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी विवाद से पूरी तरह बचा जा सके।