भारत के विभिन्न क्षेत्रों से बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के पनावी नाले में बादल फटने की घटना सामने निकलकर आई है। बदल फटने के कारण इस इलाके में बाढ़ आ गई है। वहीं जम्मू कश्मीर के डोडा में भी बादल फटने की वजह से सैलाब आ गया। इसमें कई घर पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो डोडा में चेनाब नदी का स्तर काफी बढ़ चुका है। वहीं बीते दिनों में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भी बादल फटने की कई खबरें सामने निकलकर आई हैं। वहीं कुछ दिनों पहले उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भी बादल फटने के कारण खीर गंगा नदी में बाढ़ आ गई थी, जिसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई। बाढ़ आने के कारण कई मकान और होटल पूरी तरह तबाह हो गए। ऐसे में सवाल है कि आखिर बादल फटने का क्या मतलब है? इसके पीछे का कारण क्या है?
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Cloud Brust In India: क्या होता है बादल फटने का मतलब? भारत में क्यों बढ़ रही ये घटनाएं
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प सिंह
Updated Tue, 26 Aug 2025 02:05 PM IST
सार
What Is Cloud Brust: कुछ दिनों पहले उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भी बादल फटने के कारण खीर गंगा नदी में बाढ़ आ गई थी, जिसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई। बाढ़ आने के कारण कई मकान और होटल पूरी तरह तबाह हो गए। ऐसे में सवाल है कि आखिर बादल फटने का क्या मतलब है? इसके पीछे का कारण क्या है?
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क्या होता है बादल फटने का मतलब?
- मौसम विज्ञान के अनुसार, लगभग 10 किमी * 10 किमी क्षेत्र में एक घंटे में 10 सेमी या उससे ज्यादा बारिश हो जाए तो उसे बादल फटने की घटना कहा जाता है।
- इसे इस तरह समझिए जब किसी छोटे क्षेत्र में कुछ ही समय के भीतर काफी ज्यादा बारिश हो जाए तो उसे बादल फटने की घटना में वर्गीकृत किया जाता है।
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- इसमें किसी स्थान पर एक घंटे में ही वार्षिक वर्षा का लगभग 10 प्रतिशत वर्षा हो जाती है।
- इसमें पानी गिरने की दर काफी तेज होती है, जिसकी वजह से नदियां, नाले उफान पर आ जाते हैं।
- आपको इस बारे में पता होना चाहिए कि बादल का फटना कोई असामान्य घटना नहीं है।
- मानसून के सीजन में इस तरह की घटना हिमालयी क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलती हैं।
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बादल फटने की घटनाओं में क्यों वृद्धि देखने को मिल रही है
- गौर करने वाली बात है कि ऐसा कोई रुझान नहीं देखने को मिलता है, जो आईएमडी के जरिए परिभाषित बादल फटने से जुड़ी घटनाओं में बढोतरी दिखाता हो।
- एक्सट्रीम वेदर और अधिक मात्रा में होने वाली बारिश दुनियाभर में देखने को मिल रही हैं।
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- वहीं भारत की बात करें तो भारत में वर्षा की मात्रा में कोई इजाफा देखने को नहीं मिला है।
- हालांकि, कम समय में वर्षा के अनुपात में वृद्धि जरूर देखने को मिली है।
- दुनियाभर में हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण ये सब जो पैटर्न देखने को मिल रहे हैं वे कहीं न कहीं यह दर्शा रहे हैं कि बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं।