आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में अब राजनीतिक अस्थिरता आ चुकी है। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे समेत उनकी कैबिनेट के कई मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। रानिल के घर को भी प्रदर्शनकारियों ने फूंक दिया। राष्ट्रपति आवास पर भी श्रीलंकाई लोगों का कब्जा हो चुका है। सड़क से लेकर लोगों के घर तक हालात खराब होते जा रहे हैं। इस बीच, कयास लगने लगे हैं कि जल्द ही भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का हाल भी ऐसा ही होने वाला है।
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आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में क्या हो रहा है? क्या वाकई में पाकिस्तान का हाल भी श्रीलंका जैसे होने वाला है? अगर हां तो क्यों और भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
पाकिस्तान में इस वक्त ऐसे हैं हालात
पाकिस्तान में आज की तारीख में 263 रुपये लीटर पेट्रोल और 276 रुपये लीटर डीजल मिल रहा है। पाकिस्तान के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल के संकट के चलते पंप भी बंद होने लगे हैं। ईंधन महंगा होने के चलते खाद्य पदार्थ, फल-सब्जियों, दवा और अन्य जरूरी उत्पादों के दामों में भी इजाफा देखने को मिला है। नंबों की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वक्त पाकिस्तान में एक लीटर दूध की कीमत 129 रुपये है। ब्रेड का एक पैकेट 90 रुपये तक का मिल रहा है। एक किलो चावल का दाम 167 रुपये है। टमाटर 98, आलू 56, प्याज 56, सेब 194 रुपये किलो मिल रहा है। वहीं, एक दर्जन केले के लिए लोगों को 111 रुपये देने पड़ रहे हैं।
क्यों श्रीलंका जैसी हो सकती है पाकिस्तान की हालत?
पाकिस्तान चीन, अरब देशों और विदेशी बैंकों के कर्ज में पहले से डूबा हुआ है। इस बीच आतंकवाद और कोरोना संकट के चलते पाकिस्तान की आय के कई रास्ते बंद हो चुके हैं। पाकिस्तान का ड्राई फ्रूट्स काफी सप्लाई होता है, लेकिन कोरोना के चलते इसमें भी गिरावट आई है। वहीं, पर्यटन को भी काफी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में अब विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कमी आ रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 30 जून को पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज 980 करोड़ डॉलर का बचा है। 24 जून को यह 1000 करोड़ डॉलर से ज्यादा था। महज छह दिन में इसमें 49 करोड़ डॉलर की कमी आ गई। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, ज्यादातर कमी विदेशी कर्ज और अन्य भुगतान के कारण हुई है।
क्यों हो रही ऐसी हालत?
इकनॉमिक्स के प्रोफेसर प्रो. शलभ माथुर ने बताया, 'पांच महीने से रूस और यूक्रेन का युद्ध जारी है। इसके चलते दुनियाभर में क्रूड ऑयल का संकट होने लगा है। इसके दाम बढ़ने लगे हैं। पाकिस्तान समेत कई देशों को क्रूड ऑयल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है। वहीं, उनकी आय का जरिया सीमित हो गया है। इसके चलते पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों में अर्थव्यवस्था डगमगा चुकी है।'
प्रो. शलभ आगे कहते हैं, 'अगर रूस और यूक्रेन का युद्ध कुछ दिन और चला तो पाकिस्तान के हालात भी श्रीलंका जैसे हो सकते हैं। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार घट रहा है। ऐसे में आने वाले समय में उसे क्रूड ऑयल व अन्य ईंधन खरीदने में दिक्कतें आएंगी। जैसा कि श्रीलंका में हुआ था।'
अरब देशों की मदद से चल रहा काम
पाकिस्तान ही नहीं, इस वक्त दुनिया का कोई भी देश दूसरे देश को ज्यादा आर्थिक मदद देने से पीछे हट रहा है। इसके पीछे कारण दुनियाभर में तेजी से बदल रहे आर्थिक और सामाजिक हालात हैं। पाकिस्तान में हाल के दिनों में सत्ता परिवर्तन हुआ है। शहबाज शरीफ नए प्रधानमंत्री बने। इसके तुरंत बाद उन्होंने चीन, अरब देशों से कर्ज मांगना शुरू कर दिया। हालांकि, अभी ज्यादातर देश पाकिस्तान को कर्ज देने से मना ही कर रहे हैं। अरब देशों से पाकिस्तान को क्रूड ऑयल जरूर मिल रहा है, लेकिन अधिक दाम होने से पाकिस्तान परेशान है।
पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF से काफी उम्मीदें हैं। IMF से कर्ज लेने के चक्कर में पाकिस्तान ने अपने यहां कई चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। पेट्रोल-डीजल समेत कई उत्पादों में 43 से 235 फीसदी तक बढ़ोतरी का एलान किया गया है। इसके जरिए पाकिस्तान सरकार 660 अरब पाकिस्तानी रुपये वसूलना चाहती है।