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एनालिसिस: मुफ्त बिजली-पानी और पैसा... जिन वादों से AAP ने जीता पंजाब, दूसरे राज्यों में क्यों नहीं चले?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 10 Mar 2022 04:03 PM IST
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सार

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अब पंजाब की सत्ता में भी दाखिल होने वाली है। विधानसभा चुनाव के लिए हो रही मतगणना में आप सबसे आगे चल रही है। इस रिपोर्ट में पढ़िए कि किन कारणों ने आप के लिए इस विशाल जीत की राह तैयार की है और क्यों उन कारणों ने अन्य राज्यों में असर नहीं दिखाया...

Aam Aadmi Party heading towards victory with majority in Punjab theses are the reasons Assembly Election Result 2022
भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल - फोटो : facebook/AAPkaArvind
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विस्तार

पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर आगे बढ़ रही है। अब तक की मतगणना में 34 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी आप ने राज्य में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को दिया है। गिने-चुने राज्यों में सरकार चलाने वाली कांग्रेस के हाथ से अब पंजाब भी निकलता नजर आ रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के फ्री मॉडल ने पंजाब में पार्टी के उभार में अहम भूमिका निभाई लेकिन अन्य राज्यों में ये वादे नहीं चल पाए। 
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आप ने पंजाब में जनता से 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया है। इसके अलावा मुफ्त शिक्षा, हर महिला को हर महीने एक हजार रुपये, मुफ्त जांच और दवाइयां और हर व्यक्ति के लिए हेल्थ कार्ड का वादा भी किया है। पार्टी ने राज्य में 16 हजार मोहल्ला क्लिनिक भी खोलने का वादा किया है। इसके तहत केजरीवाल ने हर गांव में एक क्लिनिक खोलने, सरकारी अस्पतालों की हालत दुरुस्त करने और प्रदेश में बड़े स्तर पर नए अस्पतालों की शुरुआत करने की बात भी कही है।
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चुनावी रुझान जैसा इशारा कर रहे हैं उसके अनुसार आम आदमी पार्टी पंजाब में सरकार बनाने वाली है। माना जा रहा है कि केजरीवाल के वादे यहां पार्टी की विशाल जीत के प्रमुख कारण हैं। पंजाब के अलावा चार और राज्यों (उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा) में भी विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से मणिपुर के अलावा आप ने सभी चार राज्यों में अपने उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन, पंजाब के अलावा किसी और राज्य में पार्टी के वादों का कोई असर देखने को नहीं मिला है।

वादों के साथ अन्य पार्टियों की कमजोरियों ने भी दिया आप को फायदा
पंजाब की तरह ही अन्य राज्यों में भी आम आदमी पार्टी ने अपना फ्री मॉडल जनता के सामने रखा था। लेकिन, पंजाब के अलावा किसी और राज्य में उसका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। लेकिन, इससे यह भी पता चलता है कि पंजाब में आप की विशाल जीत केवल वादों पर ही आधारित नहीं है। दरअसल, चुनाव से ठीक पहले पंजाब में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी थी और चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बना दिया था।

खुद अंदरूनी कलह में उलझी रही कांग्रेस खुद को जनता से जोड़ नहीं पाई। दूसरी ओर, किसान आंदोलन के चलते पंजाब का किसान समुदाय पहले ही (भारतीय जनता पार्टी) से खफा था। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा, दोनों को होने वाले नुकसान का फायदा आम आदमी पार्टी को मिला है। इस चुनाव में पंजाब की जनता ने कांग्रेस और भाजपा के सहयोगी दलों के कई बड़े नेताओं को सिरे से नकार दिया है। कैप्टन, अमरिंदर, प्रकाश सिंह बादल जैसे कई नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा है।

अन्य राज्यों में नहीं नजर आया आप के मुफ्त वादों का कुछ खास असर
बाकी राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में भी आप ने अपना फ्री मॉडल पेश किया था और कई वादे किए थे, लेकिन यहां इनका कुछ खास असर देखने को नहीं मिला। उत्तराखंड और गोवा में भी कुछ ऐसा ही हाल है। ऐसे में कहा जा सकता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत का प्रमुख कारण उसके वादे ही नहीं हैं। इसके लिए प्रदेश की राजनीतिक स्थिति ने भी अहम भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की छवि ने भी पंजाब में इसे फायदा दिया है।
 
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