{"_id":"69b8ea20d5c55a4a62068b35","slug":"ambala-man-goes-to-moscow-received-electric-shocks-instead-of-salary-sant-balbir-singh-seechewal-2026-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Punjab: लाखों देकर सुनहरा भविष्य बनाने मास्को गया था अंबाला का युवक, पगार की जगह मिले करंट के झटके; ऐसे बचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Punjab: लाखों देकर सुनहरा भविष्य बनाने मास्को गया था अंबाला का युवक, पगार की जगह मिले करंट के झटके; ऐसे बचा
संवाद न्यूज एजेंसी, फगवाड़ा (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:15 AM IST
विज्ञापन
सार
बीमारी और गरीबी से जूझ रहे दीपक से जब किराया नहीं दिया गया तो मकान मालिक ने उसका पासपोर्ट छीन लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मास्को के एक थाने में उसे तीन दिन तक केवल पानी दिया गया, खाने को कुछ भी नहीं।
संत सीचेवाल के साथ युवक
- फोटो : संवाद
विज्ञापन
विस्तार
अंबाला के 25 वर्षीय युवक दीपक को अप्रैल 2025 में एक ट्रैवल एजेंट ने 4 लाख रुपये लेकर रूस भेजा था। उसे महीने के 90 हजार रुपये की नौकरी का सपना दिखाया गया। लेकिन जैसे ही वह मास्को पहुंचा, उसकी जिंदगी का सबसे भयावह अध्याय शुरू हो गया।
दीपक बताता है कि दिल्ली से मास्को का सफर आमतौर पर सिर्फ 6 घंटे में पूरा हो जाता है, लेकिन ट्रैवल एजेंट ने उसे अलग-अलग देशों के रास्ते घुमाते हुए 6 दिन में वहां पहुंचाया। मास्को पहुंचने के बाद उसे एक कंपनी में काम पर लगा दिया गया। एक महीना पूरा होने पर जब उसने अपनी तनख्वाह मांगी तो उसे पैसे देने के बजाय नौकरी से निकाल दिया गया।
इसके बाद उसे 500 किलोमीटर दूर एक दूसरी कंपनी में काम पर भेज दिया गया। वहां भी एक महीने की मेहनत के बाद 90 हजार रुपये की जगह उसे केवल 5 हजार रुपये ही दिए गए। हालात इतने खराब हो गए कि उसके लिए खाना और कमरे का किराया देना भी मुश्किल हो गया।
बीमारी और गरीबी से जूझ रहे दीपक से जब किराया नहीं दिया गया तो मकान मालिक ने उसका पासपोर्ट छीन लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मास्को के एक थाने में उसे तीन दिन तक केवल पानी दिया गया, खाने को कुछ भी नहीं। जब उसने शौचालय जाने की विनती की तो उसे करंट के झटके दिए।
तीन दिन बाद उसे इमिग्रेशन जेल भेज दिया गया, जहां अलग-अलग देशों के कैदी बंद थे। दीपक का दावा है कि वहां करीब 150 भारतीय युवक भी बंद थे, जिनमें ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले थे। जेल के अंदर मानसिक यातनाओं, भूख और डर का ऐसा माहौल था कि कई युवक पूरी तरह टूट चुके थे। एक क्यूबा के युवक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की घटना ने सभी कैदियों को झकझोर कर रख दिया।
दीपक का कहना है कि अगर वह एक महीना और वहां रहता तो शायद जिंदा वापस नहीं आ पाता। हालात इतने खराब हो चुके थे कि वह सेना में भर्ती होने के बारे में सोचने लगा था। जेल में दिया जाने वाला खाना भी भारतीय युवकों के लिए बड़ी समस्या था। दोपहर और रात के खाने में गाय का मांस दिया जाता था। कई युवक केवल तीन ब्रेड खाकर ही दिन गुजारते थे, जिससे उनकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी थी।
ऐसे नरक जैसे हालात से दीपक की रिहाई उस समय संभव हुई, जब उसके परिवार ने 2 फरवरी को राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। संत सीचेवाल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू किए। इन कोशिशों के परिणामस्वरूप दीपक 17 फरवरी को सुरक्षित अपने परिवार के पास वापस लौट आया।
निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे दीपक ने कहा कि उसकी जान बचाने के लिए वह संत सीचेवाल का जीवन भर आभारी रहेगा।
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि विदेश जाने के चक्कर में युवा ठग एजेंटों के जाल में फंस रहे हैं। कई देशों में हालात बेहद खतरनाक हैं और हमारे नौजवान वहां जाकर यातनाएं सहने के लिए मजबूर हो रहे हैं। लोगों को चाहिए कि किसी भी गैरकानूनी या संदिग्ध तरीके से विदेश जाने से बचें। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक युवक की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों पंजाबी युवाओं के लिए सबक है जो ठग एजेंटों के झूठे सपनों में आकर अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं।
Trending Videos
दीपक बताता है कि दिल्ली से मास्को का सफर आमतौर पर सिर्फ 6 घंटे में पूरा हो जाता है, लेकिन ट्रैवल एजेंट ने उसे अलग-अलग देशों के रास्ते घुमाते हुए 6 दिन में वहां पहुंचाया। मास्को पहुंचने के बाद उसे एक कंपनी में काम पर लगा दिया गया। एक महीना पूरा होने पर जब उसने अपनी तनख्वाह मांगी तो उसे पैसे देने के बजाय नौकरी से निकाल दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके बाद उसे 500 किलोमीटर दूर एक दूसरी कंपनी में काम पर भेज दिया गया। वहां भी एक महीने की मेहनत के बाद 90 हजार रुपये की जगह उसे केवल 5 हजार रुपये ही दिए गए। हालात इतने खराब हो गए कि उसके लिए खाना और कमरे का किराया देना भी मुश्किल हो गया।
बीमारी और गरीबी से जूझ रहे दीपक से जब किराया नहीं दिया गया तो मकान मालिक ने उसका पासपोर्ट छीन लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मास्को के एक थाने में उसे तीन दिन तक केवल पानी दिया गया, खाने को कुछ भी नहीं। जब उसने शौचालय जाने की विनती की तो उसे करंट के झटके दिए।
तीन दिन बाद उसे इमिग्रेशन जेल भेज दिया गया, जहां अलग-अलग देशों के कैदी बंद थे। दीपक का दावा है कि वहां करीब 150 भारतीय युवक भी बंद थे, जिनमें ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले थे। जेल के अंदर मानसिक यातनाओं, भूख और डर का ऐसा माहौल था कि कई युवक पूरी तरह टूट चुके थे। एक क्यूबा के युवक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की घटना ने सभी कैदियों को झकझोर कर रख दिया।
दीपक का कहना है कि अगर वह एक महीना और वहां रहता तो शायद जिंदा वापस नहीं आ पाता। हालात इतने खराब हो चुके थे कि वह सेना में भर्ती होने के बारे में सोचने लगा था। जेल में दिया जाने वाला खाना भी भारतीय युवकों के लिए बड़ी समस्या था। दोपहर और रात के खाने में गाय का मांस दिया जाता था। कई युवक केवल तीन ब्रेड खाकर ही दिन गुजारते थे, जिससे उनकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी थी।
ऐसे नरक जैसे हालात से दीपक की रिहाई उस समय संभव हुई, जब उसके परिवार ने 2 फरवरी को राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। संत सीचेवाल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू किए। इन कोशिशों के परिणामस्वरूप दीपक 17 फरवरी को सुरक्षित अपने परिवार के पास वापस लौट आया।
निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे दीपक ने कहा कि उसकी जान बचाने के लिए वह संत सीचेवाल का जीवन भर आभारी रहेगा।
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि विदेश जाने के चक्कर में युवा ठग एजेंटों के जाल में फंस रहे हैं। कई देशों में हालात बेहद खतरनाक हैं और हमारे नौजवान वहां जाकर यातनाएं सहने के लिए मजबूर हो रहे हैं। लोगों को चाहिए कि किसी भी गैरकानूनी या संदिग्ध तरीके से विदेश जाने से बचें। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक युवक की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों पंजाबी युवाओं के लिए सबक है जो ठग एजेंटों के झूठे सपनों में आकर अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं।