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राजोआणा के लंबित मामले में जल्द फैसला ले केंद्र : गड़गज्ज
Tue, 29 Sep 2026 05:47 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Tue, 29 Sep 2026 05:47 PM IST
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जेल में राजोआणा से मिले जत्थेदार गड़गज्ज और धामी
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मंगलवार को पटियाला जेल में बलवंत सिंह राजोआणा से मुलाकात की। उन्होंने केंद्र से राजोआणा के लंबित मामले में जल्द फैसला लेने की मांग की।
जत्थेदार ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की घोषणा की थी। छह साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह घोषणा लागू नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 41 सुनवाई हो चुकी हैं पर अंतिम फैसला नहीं आया। राजोआणा 32 साल से जेल में हैं। सरकार को अब इस मामले में निर्णय लेना चाहिए। राजोआणा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी तरह की रहम या माफी नहीं चाहिए। धामी ने कहा कि राजोआणा 19 साल से अधिक समय से फांसी की सजा का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने एसजीपीसी की ओर से दायर याचिका के जल्द निपटारे की मांग की। धामी ने बताया कि राजोआणा ने कौम के लिए अपनी सेवा को सही बताया। उन्होंने किसी तरह की माफी मांगने से इन्कार किया। एसजीपीसी राजोआणा और जगतार सिंह हवारा समेत सभी बंदी सिखों की रिहाई के लिए मजबूती से खड़ी है। पांच सिंह साहिबान की बैठक में आगे की रणनीति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मंगलवार को पटियाला जेल में बलवंत सिंह राजोआणा से मुलाकात की। उन्होंने केंद्र से राजोआणा के लंबित मामले में जल्द फैसला लेने की मांग की।
जत्थेदार ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की घोषणा की थी। छह साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह घोषणा लागू नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 41 सुनवाई हो चुकी हैं पर अंतिम फैसला नहीं आया। राजोआणा 32 साल से जेल में हैं। सरकार को अब इस मामले में निर्णय लेना चाहिए। राजोआणा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी तरह की रहम या माफी नहीं चाहिए। धामी ने कहा कि राजोआणा 19 साल से अधिक समय से फांसी की सजा का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने एसजीपीसी की ओर से दायर याचिका के जल्द निपटारे की मांग की। धामी ने बताया कि राजोआणा ने कौम के लिए अपनी सेवा को सही बताया। उन्होंने किसी तरह की माफी मांगने से इन्कार किया। एसजीपीसी राजोआणा और जगतार सिंह हवारा समेत सभी बंदी सिखों की रिहाई के लिए मजबूती से खड़ी है। पांच सिंह साहिबान की बैठक में आगे की रणनीति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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