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श्री अकाल तख्त साहिब में सामूहिक अरदास: विभाजन में मारे गए लोगों को किया याद, बंदी सिंहों को छोड़ने की मांग
Sun, 16 Aug 2026 02:30 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 16 Aug 2026 02:30 PM IST
सार
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि विभाजन के दौरान हजारों परिवार उजड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने ज्ञानी सोहन सिंह शीतल की पुस्तक ‘पंजाब का उजाड़ा’ का जिक्र भी किया।
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कुलदीप सिंह गड़गज्ज, अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
श्री अकाल तख्त साहिब में 15 अगस्त 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान मारे गए निर्दोष बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की याद में सामूहिक अरदास आयोजित की गई। इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने संगत को संबोधित करते हुए विभाजन के दर्दनाक दौर को याद किया।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि विभाजन के दौरान हजारों परिवार उजड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने ज्ञानी सोहन सिंह शीतल की पुस्तक ‘पंजाब का उजाड़ा’ का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए महिलाओं ने भी बड़ी कुर्बानियां दीं।
उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण सिख समुदाय अपने कई ऐतिहासिक गुरुधामों से भी बिछड़ गया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान सरकार से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब का कॉरिडोर खोलने और पाकिस्तान स्थित श्री ननकाना साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले जत्थों में संगत की संख्या बढ़ाने की अपील की।
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जत्थेदार ने बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने भाई बलवंत सिंह राजोआणा, भाई जगतार सिंह हवारा, भाई जगतार सिंह तारा समेत अन्य बंदी सिंहों की रिहाई की मांग करते हुए इसे मानवता के आधार पर हल करने की अपील की। उन्होंने सिख समुदाय को आपसी मतभेदों से बचते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की रहनुमाई में एकजुट रहने और गुरुद्वारों की मर्यादा बनाए रखने का संदेश दिया।
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जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि विभाजन के दौरान हजारों परिवार उजड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने ज्ञानी सोहन सिंह शीतल की पुस्तक ‘पंजाब का उजाड़ा’ का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए महिलाओं ने भी बड़ी कुर्बानियां दीं।
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उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण सिख समुदाय अपने कई ऐतिहासिक गुरुधामों से भी बिछड़ गया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान सरकार से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब का कॉरिडोर खोलने और पाकिस्तान स्थित श्री ननकाना साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले जत्थों में संगत की संख्या बढ़ाने की अपील की।
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जत्थेदार ने बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने भाई बलवंत सिंह राजोआणा, भाई जगतार सिंह हवारा, भाई जगतार सिंह तारा समेत अन्य बंदी सिंहों की रिहाई की मांग करते हुए इसे मानवता के आधार पर हल करने की अपील की। उन्होंने सिख समुदाय को आपसी मतभेदों से बचते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की रहनुमाई में एकजुट रहने और गुरुद्वारों की मर्यादा बनाए रखने का संदेश दिया।