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नशा मुक्ति केंद्र या नशे का अड्डा: तंबाकू से लेकर इंजेक्शन हुए बरामद, 52 युवाओं को करवाया मुक्त; मालिक फरार

Sat, 11 Jul 2026 04:07 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, तरनतारन
संवाद न्यूज एजेंसी, तरनतारन Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 11 Jul 2026 04:07 PM IST
सार

अवैध नशा मुक्ति केंद्र से 52 युवाओं को रिहा करवा दिया है। एक हॉल में 52 युवाओं को रखा गया था। वहीं, भारी मात्रा में नशे की खेप भी बरामद हुई है। 

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52 youths rescued from an illegal de-addiction center
अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ - फोटो : वी़डियो ग्रैब

विस्तार

तरनतारन शहर की होली सिटी कॉलोनी में चल रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र में छापेमारी करके 52 युवाओं को मुक्त करवाया गया। बाद में सभी को सरकारी नशा छुड़ाओ सेंटर में भर्ती करवा दिया गया है। करीब एक वर्ष से चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्र के प्रबंधक कंवलजीत सिंह मौके से फरार है।

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नशीले पदार्थ बरामद 
छापामारी टीम ने नशे में उपयोग होने वाली दवाइयां, इंजेक्शन, तंबाकू युक्त पदार्थ बरामद करके केंद्र को सील कर दिया है। नशा मुक्ति केंद्र में बंद कुछ युवाओं को मारपीट का शिकार बनाया जाता था। इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग को की गई लेकिन कार्रवाई न होने पर युवाओं ने फोन के माध्यम से सारी जानकारी डीसी कार्यालय तक पहुंचाई। 

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52 युवाओं को करवाया मुक्त 
डीसी राहुल कुमार ने तहसीलदार अर्चना शर्मा पर आधारित टीम गठित की। इस टीम में डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. रुपम चौधरी, थाना सिटी प्रभारी गगनदीप सिंह शामिल थे। टीम ने छापेमारी के दौरान एक ही कमरे में बंधक बनाए कुल 52 युवाओं को मुक्त करवाया। एक हॉल में इन युवाओं को रखा जाता था। सुबह के समय खिचड़ी, दलिया, दोपहर के समय चाय के साथ चावल व रात को पतली दाल या आलू की सब्जी के साथ रोटी दी जाती थी। 

संचालक के खिलाफ केस दर्ज 
घटिया खाने की शिकायत करने पर युवाओं से मारपीट की जाती थी। टीम ने मौके पर 52 युवाओं को रिहा करवाते हुए केंद्र को सील कर दिया है। नशा मुक्ति केंद्र चलाने वाले कंवलजीत सिंह का गांव माणोचाहल कलां हैं। उसके खिलाफ केस दर्ज करके छापामारी की जा रही है। डीएसपी सुखबीर सिंह ने बताया कि छापामारी के दौरान नशे में उपयोग होने वाली गोलियां, कैप्सूल, इंजेक्शन व तंबाकू युक्त पदार्थ के अलावा कुछ दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं। प्रथम जांच में सामने आया कि केंद्र करीब एक साल से चलाया जा रहा था। प्रत्येक युवक से प्रति माह 15 हजार रुपये रुपये लिए जाते थे। 
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