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'हमें देशभक्ति का सबूत देने की जरूरत नहीं': सीएम मान का जवाब, स्वतंत्रता दिवस से जुड़ा है मामला
Wed, 19 Aug 2026 08:42 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Wed, 19 Aug 2026 08:42 PM IST
सार
आयोग ने पंजाब सरकार से यह पता लगाने को कहा है कि स्वतंत्रता दिवस-2026 से जुड़े निर्देश सभी सरकारी स्कूलों तक पहुंचाए गए थे या नहीं। साथ ही, उनके पालन की निगरानी के लिए क्या व्यवस्था की गई थी।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मान सरकार से मांगा जवाब
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह निर्धारित सरकारी निर्देशों के अनुरूप नहीं मनाया गया। आरोप है कि इन स्कूलों में छात्रों की ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और
स्वतंत्रता संग्राम, सांविधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से जुड़ी गतिविधियों में सार्थक भागीदारी नहीं रही। इस संदर्भ में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (एलआरओ) की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार से चार सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।
आयोग यह जानना चाहता है कि क्या पंजाब के ग्रामीण, दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को 15 अगस्त के कार्यक्रमों में शहरी और बेहतर संसाधनों वाले स्कूलों के विद्यार्थियों के समान अवसर मिले थे या नहीं। आयोग ने इस संबंध में पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है। एलआरओ की ओर से 17 अगस्त को आयोग के समक्ष एक शिकायत दी गई थी। जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तान से सटे पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों समेत कई सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह निर्धारित सरकारी निर्देशों के अनुरूप नहीं मनाया गया।
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इस आधार पर होगी जांच
आयोग ने पंजाब सरकार से यह पता लगाने को कहा है कि स्वतंत्रता दिवस-2026 से जुड़े निर्देश सभी सरकारी स्कूलों तक पहुंचाए गए थे या नहीं। साथ ही, उनके पालन की निगरानी के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई थी और जिन स्कूलों में निर्देशों का पालन नहीं हुआ, वहां क्या कार्रवाई की गई, इसका भी ब्योरा मांगा गया है। पंजाब के मुख्य सचिव को स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से राज्य, जिला और स्कूल स्तर पर सत्यापन कराने को कहा गया है। रिपोर्ट में पंजाब के कुल सरकारी स्कूलों की संख्या, 15 अगस्त को कार्यक्रम आयोजित करने वाले स्कूलों की संख्या, जहां ध्वजारोहण और राष्ट्रगान हुआ उन स्कूलों की संख्या व कार्यक्रमों में शामिल हुए विद्यार्थियों की संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, सरकार को उन जिलों और स्कूलों की पहचान करनी होगी जहां स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए या उनमें काफी कटौती की गई। ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती स्कूलों को अलग से चिह्नित करने के साथ गैर-अनुपालन के कारण भी बताने होंगे।
शहरी-ग्रामीण अंतर पर भी मांगा जवाब
आयोग ने सरकार से विशेष रूप से यह जांच कराने को कहा है कि शहरी और ग्रामीण, सुगम और दूरस्थ, सामान्य और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी शैक्षणिक, सांस्कृतिक और नागरिक गतिविधियों में भागीदारी के अवसरों में कोई महत्वपूर्ण अंतर तो नहीं रहा। आयोग ने आरोपों की सत्यता और संभावित असमानता की जांच के लिए सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर, पंजाब शिक्षा विभाग के एक अधिकारी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका दावा है कि राज्य के सभी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था और विभाग के पास इसके सबूत (तस्वीरें) मौजूद हैं।
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स्वतंत्रता संग्राम, सांविधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से जुड़ी गतिविधियों में सार्थक भागीदारी नहीं रही। इस संदर्भ में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (एलआरओ) की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार से चार सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।
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आयोग यह जानना चाहता है कि क्या पंजाब के ग्रामीण, दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को 15 अगस्त के कार्यक्रमों में शहरी और बेहतर संसाधनों वाले स्कूलों के विद्यार्थियों के समान अवसर मिले थे या नहीं। आयोग ने इस संबंध में पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है। एलआरओ की ओर से 17 अगस्त को आयोग के समक्ष एक शिकायत दी गई थी। जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तान से सटे पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों समेत कई सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह निर्धारित सरकारी निर्देशों के अनुरूप नहीं मनाया गया।
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इस आधार पर होगी जांच
आयोग ने पंजाब सरकार से यह पता लगाने को कहा है कि स्वतंत्रता दिवस-2026 से जुड़े निर्देश सभी सरकारी स्कूलों तक पहुंचाए गए थे या नहीं। साथ ही, उनके पालन की निगरानी के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई थी और जिन स्कूलों में निर्देशों का पालन नहीं हुआ, वहां क्या कार्रवाई की गई, इसका भी ब्योरा मांगा गया है। पंजाब के मुख्य सचिव को स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से राज्य, जिला और स्कूल स्तर पर सत्यापन कराने को कहा गया है। रिपोर्ट में पंजाब के कुल सरकारी स्कूलों की संख्या, 15 अगस्त को कार्यक्रम आयोजित करने वाले स्कूलों की संख्या, जहां ध्वजारोहण और राष्ट्रगान हुआ उन स्कूलों की संख्या व कार्यक्रमों में शामिल हुए विद्यार्थियों की संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, सरकार को उन जिलों और स्कूलों की पहचान करनी होगी जहां स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए या उनमें काफी कटौती की गई। ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती स्कूलों को अलग से चिह्नित करने के साथ गैर-अनुपालन के कारण भी बताने होंगे।
शहरी-ग्रामीण अंतर पर भी मांगा जवाब
आयोग ने सरकार से विशेष रूप से यह जांच कराने को कहा है कि शहरी और ग्रामीण, सुगम और दूरस्थ, सामान्य और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी शैक्षणिक, सांस्कृतिक और नागरिक गतिविधियों में भागीदारी के अवसरों में कोई महत्वपूर्ण अंतर तो नहीं रहा। आयोग ने आरोपों की सत्यता और संभावित असमानता की जांच के लिए सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर, पंजाब शिक्षा विभाग के एक अधिकारी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका दावा है कि राज्य के सभी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था और विभाग के पास इसके सबूत (तस्वीरें) मौजूद हैं।
देश को तिरंगा पंजाबियों ने ही दिलवाया : मान
पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा, हमें देशभक्ति का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं है। यह आरोप न लगाएं कि हम तिरंगे को प्यार नहीं करते। गुलामियों की बेड़ियों से मुक्त करवाकर पंजाबियों ने ही देश को तिरंगा लेकर दिया है। स्वतंत्रता आंदोलन में करीब 90 प्रतिशत कुर्बानियां पंजाबियों की हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग वालों को पूछना चाहिए कि क्या उनके परिवार से कोई फौज में हैं, ये लोग गुजरात से ताल्लुक रखने वाले लगते हैं। 15 अगस्त और 26 जनवरी का पर्व पंजाब के बिना कैसे मनाया जा सकता है। सभी आरोप झूठे व बेबुनियाद हैं।
स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह न होना चिंतनीय : रंधावा
पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ गांवों के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित नहीं किए जाने की रिपोर्ट पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गंभीर चिंता जताई
है। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से समारोह नहीं हुए तो पंजाब सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इस मामले में पंजाब सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
रंधावा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस विद्यार्थियों और देशवासियों के लिए गौरव और राष्ट्रीय भावना का पर्व है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में समारोह नहीं होना बेहद गंभीर और संवेदनशील विषय है। यदि किसी सुरक्षा खतरे के कारण कार्यक्रम रद्द किए गए थे तो सरकार को यह बताना चाहिए कि खतरा क्या था और विद्यार्थियों व स्टाफ की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सुरक्षा इनपुट मिला था तो उसकी गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। रंधावा ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह मामले में पारदर्शिता बरते और जनता को वास्तविक स्थिति से अवगत कराए।
पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा, हमें देशभक्ति का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं है। यह आरोप न लगाएं कि हम तिरंगे को प्यार नहीं करते। गुलामियों की बेड़ियों से मुक्त करवाकर पंजाबियों ने ही देश को तिरंगा लेकर दिया है। स्वतंत्रता आंदोलन में करीब 90 प्रतिशत कुर्बानियां पंजाबियों की हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग वालों को पूछना चाहिए कि क्या उनके परिवार से कोई फौज में हैं, ये लोग गुजरात से ताल्लुक रखने वाले लगते हैं। 15 अगस्त और 26 जनवरी का पर्व पंजाब के बिना कैसे मनाया जा सकता है। सभी आरोप झूठे व बेबुनियाद हैं।
स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह न होना चिंतनीय : रंधावा
पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ गांवों के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित नहीं किए जाने की रिपोर्ट पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गंभीर चिंता जताई
है। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से समारोह नहीं हुए तो पंजाब सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इस मामले में पंजाब सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
रंधावा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस विद्यार्थियों और देशवासियों के लिए गौरव और राष्ट्रीय भावना का पर्व है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में समारोह नहीं होना बेहद गंभीर और संवेदनशील विषय है। यदि किसी सुरक्षा खतरे के कारण कार्यक्रम रद्द किए गए थे तो सरकार को यह बताना चाहिए कि खतरा क्या था और विद्यार्थियों व स्टाफ की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सुरक्षा इनपुट मिला था तो उसकी गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। रंधावा ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह मामले में पारदर्शिता बरते और जनता को वास्तविक स्थिति से अवगत कराए।