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कैग रिपोर्ट: पंजाब की जेलों में क्षमता से 4 हजार अधिक कैदी, रहने लायक नहीं सुविधाएं; पीएसी ने भी जताई चिंता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 17 Mar 2026 10:18 AM IST
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सार

रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब की 26 जेलों की कुल क्षमता मार्च 2023 तक 25,824 कैदियों की थी, लेकिन इन जेलों में 30 हजार से अधिक कैदी भरे हुए थे। यानी तय संख्या से 4,145 कैदी अतिरिक्त थे।

CAG Report Punjab Jails House four thousand Prisoners Beyond Capacity
फिरोजपुर जेल - फोटो : संवाद
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विस्तार

कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2020 से मार्च 2023 तक पंजाब की अधिकतर जेलों में क्षमता से कहीं अधिक कैदी रखे गए। 

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हालात यह थे कि कई जेलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था और कैदियों के रहने लायक भी जगह नहीं बची थी। कैग की यह रिपोर्ट पंजाब विधानसभा में पेश की गई है। हालांकि सदन में इस रिपोर्ट पर कोई चर्चा नहीं हुई।
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रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब की 26 जेलों की कुल क्षमता मार्च 2023 तक 25,824 कैदियों की थी, लेकिन इन जेलों में 30 हजार से अधिक कैदी भरे हुए थे। यानी तय संख्या से 4,145 कैदी अतिरिक्त थे। महिला जेलों का हाल भी इससे अलग नहीं रहा, जहां तीन साल तक लगातार क्षमता से अधिक कैदी रखी गईं।

पुरुष कैदियों को खुली जेल में शिफ्ट करने की सलाह

कैग ने अपनी रिपोर्ट में जेलों में अत्यधिक भीड़, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, खराब मेडिकल सुविधाओं और साफ-सफाई के अभाव को गंभीर चिंता का विषय बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ पुरुष कैदियों को खुली जेलों में शिफ्ट करके भीड़ कम की जा सकती थी, लेकिन केवल 30 प्रतिशत कैदियों को ही वहां भेजा गया।


विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) ने भी जेलों में बढ़ती भीड़ पर चिंता जताई थी और जेल प्रशासन को कैदियों की संख्या नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी रही।

विचाराधीन कैदी और पुलिस एस्कॉर्ट की कमी बड़ी वजह

रिपोर्ट में जेलों में भीड़भाड़ की सबसे बड़ी वजह विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक हिरासत में रखना और नई जेलों के निर्माण में देरी को बताया गया है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 से 2023 के बीच कोर्ट में होने वाली 5,57,412 सुनवाई (पेशियों) में से 1,48,274 सुनवाई (करीब 27 प्रतिशत) इसलिए नहीं हो पाईं, क्योंकि कैदियों को लाने-ले जाने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट (सुरक्षाकर्मी) ही उपलब्ध नहीं थे। इसका सीधा असर यह हुआ कि विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक जेल में ही रहना पड़ा, जिससे भीड़ और बढ़ गई।

नई जेलों के निर्माण में देरी से बढ़ी मुश्किलें

भीड़भाड़ कम करने के लिए शुरू की गईं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं भी समय पर पूरी नहीं हो सकीं। जिला जेल नाभा को साल 2016 में ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, लेकिन इसे मैक्सिमम सिक्योरिटी जेल का दर्जा 2021 में मिला। लंबी प्रक्रियाओं के बाद जून 2023 में इसका निर्माण शुरू हो सका और मई 2024 तक सिर्फ 36 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया था। सबसे बुरा हाल मानसा जेल का रहा, जहां निर्माण और मरम्मत कार्य में देरी के चलते बैरकें खचाखच भरी रहीं। 332 कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में 629 कैदियों को ठूंसना पड़ा। गौरतलब है कि कैग की इस रिपोर्ट को सदन में पेश तो कर दिया गया, लेकिन उस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी।

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