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खर्च में चंडीगढ़िए अव्वल: यहां परिवार का एक साल का बजट 19 लाख, गुरुनगरी भी मुंबई-चेन्नई से आगे निकली

Tue, 14 Jul 2026 09:33 AM IST
Nivedita राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 14 Jul 2026 09:33 AM IST
सार

अब देश में उपभोग का केंद्र केवल छह बड़े महानगर नहीं रह गए हैं। अमृतसर जैसे उभरते शहर भी तेजी से आर्थिक गतिविधियों और उपभोग के नए केंद्र बन रहे हैं। छोटे और मध्यम शहरों में आय, व्यापार और सेवा क्षेत्र के विस्तार का सीधा असर लोगों की खर्च करने की क्षमता पर दिखाई दे रहा है।

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खर्च में चंडीगढ़-अमृतसर आगे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समृद्ध विरासत और कारोबार के लिए पहचान रखने वाला अमृतसर अब उपभोक्ता खर्च के मामले में भी देश के अग्रणी शहरों में शामिल हो गया है। 
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प्रति परिवार वार्षिक उपभोग व्यय के आधार पर अमृतसर देश के शीर्ष-10 शहरों में जगह बनाने के साथ मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद, रायपुर और चेन्नई जैसे बड़े शहरों से आगे निकल गया है। 

वहीं, प्रति परिवार उपभोग व्यय के मामले में चंडीगढ़ देश में पहले स्थान पर है। औसत पारिवारिक आय के मामले में भी चंडीगढ़ दूसरे और अमृतसर प्रमुख शहरों में शामिल है। यह खुलासा पीपल रिसर्च ऑन इंडिया कंज्यूमर इकोनॉमी और टाटा संस की संयुक्त रिपोर्ट में हुआ है।
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चेन्नई-कोलकाता से आगे अमृतसर

रिपोर्ट के अनुसार अमृतसर में एक परिवार का औसत वार्षिक उपभोग व्यय 15 लाख रुपये है। वहीं, 2025-26 में शहर की औसत पारिवारिक आय 19 लाख रुपये दर्ज की गई है। आय के मामले में अमृतसर चेन्नई, जयपुर, लखनऊ और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से भी आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक सीमावर्ती शहर होने के बावजूद अमृतसर में मजबूत खरीद क्षमता और बढ़ते उपभोक्ता वर्ग ने इसे देश के उभरते आर्थिक केंद्रों में शामिल कर दिया है। 

बंगलुरु के बाद आय में दूसरे स्थान पर चंडीगढ़
औसत पारिवारिक आय के मामले में बंगलुरु 29 लाख रुपये के साथ पहले और चंडीगढ़ 28 लाख रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है। वडोदरा और दिल्ली में यह औसत 26 लाख रुपये है। इसके बाद मुंबई और पुणे का स्थान आता है। चेन्नई, अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहर भी इस मामले में चंडीगढ़ से पीछे हैं।

प्रति परिवार उपभोग व्यय के मामले में चंडीगढ़ देश में पहले स्थान पर है। यहां एक परिवार का औसत वार्षिक खर्च 19 लाख रुपये है। तिरुवनंतपुरम और वडोदरा 17-17 लाख रुपये के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि तिरुप्पुर और सूरत भी शीर्ष पांच शहरों में शामिल हैं। हाउसहोल्ड सर्वे पर आधारित यह रिपोर्ट देश के शीर्ष 100 शहरों के परिवारों की आय, खर्च, बचत, उधारी और संपत्ति निर्माण का विश्लेषण करती है।

शहरी भारत में 70% खर्च गैर-खाद्य मदों पर
रिपोर्ट के अनुसार शहरी भारत में कुल उपभोग व्यय का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा खाने-पीने के बजाय अन्य जरूरतों पर खर्च होता है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा आवास पर होता है, जबकि परिवहन ऐसा क्षेत्र है, जिसमें पिछले दशक के दौरान सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

लुधियाना, जालंधर और अमृतसर बने औद्योगिक कॉरिडोर का हिस्सा
रिपोर्ट में लुधियाना, जालंधर और अमृतसर को देश के छोटे एवं मध्यम उद्योगों के प्रमुख कॉरिडोर में शामिल किया गया है। इस सूची में मुरादाबाद और मेरठ भी हैं। इन शहरों में अपेक्षाकृत बड़े आकार के परिवार निवास करते हैं। लुधियाना और अमृतसर को उभरते औद्योगिक शहरों की श्रेणी में भी रखा गया है, जहां कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है।
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