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बेअदबी कानून पर विवाद: अब NRI सिखों की आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी; इस बात की सता रही है चिंता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 19 May 2026 12:36 PM IST
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सार
आईसीएफ ने स्पष्ट किया कि वह श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता है और किसी भी प्रकार की बेअदबी की कड़ी निंदा करता है लेकिन कानून के कुछ प्रावधान कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई जटिल सवाल खड़े करते हैं।
बेअदबी कानून
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब सरकार द्वारा पारित श्री जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल-2026 को लेकर एनआरआई सिखों ने गंभीर आपत्ति जताई है। इंडस कनाडा फाउंडेशन (आईसीएफ) ने कहा है कि इस कानून के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा के लिए जल्द अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल बैठक बुलाई जाएगी। बैठक के बाद इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जाएगी।
फाउंडेशन ने राष्ट्रपति से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। आईसीएफ ने स्पष्ट किया कि वह श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता है और किसी भी प्रकार की बेअदबी की कड़ी निंदा करता है लेकिन कानून के कुछ प्रावधान कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई जटिल सवाल खड़े करते हैं।
इस कानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। आईसीएफ के अध्यक्ष विक्रम बाजवा ने बताया कि कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के गुरुद्वारों और सिख संगठनों की ग्लोबल जूम मीटिंग बुलाई जा रही है। इसमें कानून के संभावित प्रभावों और कानूनी पहलुओं पर चर्चा होगी।
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बाजवा ने कहा कि विदेशों में रहने वाली नई पीढ़ी के सिख कठोर सजा के प्रावधानों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बड़ी संख्या में होटलों और मोटलों के कमरों में बाइबल रखी जाती है। धार्मिक ग्रंथ लोगों को अध्यात्म और नैतिक मार्गदर्शन देने के लिए होते हैं न कि भय और दंड का कारण बनने के लिए।
फाउंडेशन ने आशंका जताई कि यदि कानून की व्यापक व्याख्या की गई तो विदेशों में रहने वाले सिख अपने घरों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब रखने को लेकर कानूनी असमंजस में पड़ सकते हैं। फाउंडेशन का कहना है कि दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक देशों में धार्मिक ग्रंथों से जुड़े मामलों में इतनी कठोर दंडात्मक व्यवस्था वाला कानून लागू नहीं है और यह कानून धार्मिक सहमति से अधिक राजनीतिक सोच से प्रेरित प्रतीत होता है।
फाउंडेशन ने राष्ट्रपति से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। आईसीएफ ने स्पष्ट किया कि वह श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखता है और किसी भी प्रकार की बेअदबी की कड़ी निंदा करता है लेकिन कानून के कुछ प्रावधान कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई जटिल सवाल खड़े करते हैं।
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इस कानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। आईसीएफ के अध्यक्ष विक्रम बाजवा ने बताया कि कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के गुरुद्वारों और सिख संगठनों की ग्लोबल जूम मीटिंग बुलाई जा रही है। इसमें कानून के संभावित प्रभावों और कानूनी पहलुओं पर चर्चा होगी।
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बाजवा ने कहा कि विदेशों में रहने वाली नई पीढ़ी के सिख कठोर सजा के प्रावधानों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बड़ी संख्या में होटलों और मोटलों के कमरों में बाइबल रखी जाती है। धार्मिक ग्रंथ लोगों को अध्यात्म और नैतिक मार्गदर्शन देने के लिए होते हैं न कि भय और दंड का कारण बनने के लिए।
फाउंडेशन ने आशंका जताई कि यदि कानून की व्यापक व्याख्या की गई तो विदेशों में रहने वाले सिख अपने घरों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब रखने को लेकर कानूनी असमंजस में पड़ सकते हैं। फाउंडेशन का कहना है कि दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक देशों में धार्मिक ग्रंथों से जुड़े मामलों में इतनी कठोर दंडात्मक व्यवस्था वाला कानून लागू नहीं है और यह कानून धार्मिक सहमति से अधिक राजनीतिक सोच से प्रेरित प्रतीत होता है।