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High Court: अदालतें इंसाफ के लिए, बार-बार किस्मत आजमाने के लिए नहीं, हाईकोर्ट ने याची पर लगाया 20000 जुर्माना

मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: Ankesh Kumar Updated Fri, 13 Mar 2026 08:23 AM IST
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सार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फर्जी ट्रैवल एजेंट की तरफ से दायर दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

Fake travel agent anticipatory bail plea rejected Punjab Haryana HC imposes Rs 20,000 fine on petitioner
high court - फोटो : संवाद
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विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फर्जी ट्रैवल एजेंट की दूसरी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालतें इंसाफ के लिए हैं न कि बार-बार किस्मत आजमाने के लिए। कोर्ट ने याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि परिस्थितियों में किसी ठोस बदलाव के बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना न्यायिक समय का दुरुपयोग है और यह फोरम शॉपिंग की श्रेणी में आता है।

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फिल्लौर थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर में आरोप है कि याचिकाकर्ता ने खुद को ट्रैवल एजेंट बताकर शिकायतकर्ता प्रभजोत सिंह को स्पेन का वर्क परमिट और वीजा दिलाने का झांसा दिया और इसके बदले पांच लाख रुपये मांगे। शिकायतकर्ता और उसके परिवार ने आरोपी के बताए बैंक खातों में 3.65 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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आरोपी ने धोखे को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल पर फर्जी वीजा की कॉपी भी भेजी। बाद में जब पासपोर्ट बिना किसी वैध वीजा के लौटाया गया तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को धमकी दी।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की पहली अग्रिम जमानत याचिका जुलाई 2025 में वापस ले ली गई थी। इसके बाद वह सात महीने से अधिक समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा और फिर दूसरी याचिका दायर कर दी। बिना किसी ठोस बदलाव के एक ही राहत के लिए दोबारा याचिका दायर करना हिट एंड ट्राई पद्धति है। कोई भी पक्ष अदालत में आकर बार-बार किस्मत आजमाने की कोशिश नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता चार सप्ताह के भीतर 20 हजार रुपये जालंधर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष जमा कराए, जिसे पंजाब स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को भेजा जाएगा।

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