प्रकृति का अनोखा तोहफा: बांस की फर्मेंटेड कोपलें बन सकती हैं किडनी की रखवाली, पीयू के शोध ने जगाई उम्मीद
बांस की कोपलों के सेवन से ब्लड शुगर स्तर कम हुआ, इंसुलिन का स्तर बेहतर हुआ और किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले बायोमार्कर में उल्लेखनीय कमी आई। फर्मेंटेड शूट्स लेने वाले समूह में किडनी की सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और ऊतकों को होने वाली क्षति भी कम देखी गई।
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डायबिटीज के मरीजों को अक्सर सिर्फ शुगर नहीं, किडनी खराब होने का डर भी सताता है। ऐसे में पंजाब यूनिवर्सिटी के शोध ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। शोध में सामने आया है कि बांस की फर्मेंटेड कोपलें किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रभावों को कम करने में मददगार हो सकती हैं। यानी प्रकृति की साधारण दिखने वाली यह कोपल भविष्य में डायबिटीज मरीजों के लिए बड़ी राहत का रास्ता खोल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल केमिस्ट्री एंड बायोडाइवर्सिटी में प्रकाशित शोध में पाया गया कि बांस (बम्बुसा न्यूटन ) की फर्मेंटेड कोपलें डायबिटीज के कारण किडनी को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती हैं। शोध में यह भी सामने आया कि फर्मेंटेशन की प्रक्रिया बांस में मौजूद लाभकारी तत्वों को और अधिक प्रभावी बना देती है। शोध में पंजाब यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग की प्रो. निर्मला चोंगथम भी शामिल रहीं।
प्रो. निर्मला ने बताया कि वो पिछले 24 वर्षों से बांस पर अलग-अलग शोध कर रही हैं। किडनी को लेकर किया गया शोध 4 वर्षों में पूरा हुआ है। इसका प्रकाशन 2026 मई में हुआ है। इस शोध के लिए पीयू के मणिपुर के साथ ही पीयू के बोटैनिकल गार्डन में उगाई गई बांस का उपयोग किया गया।
उन्होंने बताया कि डायबिटीज की सबसे गंभीर जटिलताओं में से एक है डायबिटिक नेफ्रोपैथी, जिसमें धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। वर्तमान में उपलब्ध दवाओं के बावजूद मरीजों में किडनी फेल होने का जोखिम बना रहता है। इसी चुनौती को देखते हुए मणिपुर यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बम्बुसा न्यूटन यानी खाने योग्य बांस की कोपलों पर अध्ययन किया।
बांस की कोपलों में है कमाल
शोधकर्ताओं ने डायबिटीज से ग्रस्त चूहों पर विभिन्न प्रकार से प्रोसेस की गई बांस की कोपलों का परीक्षण किया। परिणामों में पाया गया कि फर्मेंटेड बांस के शूट्स में सबसे अधिक बायोएक्टिव कंपाउंड मौजूद थे। इनमें क्वेरसेटिन, क्लोरोजेनिक एसिड, कैफिक एसिड, गैलिक एसिड और सैलिसिलिक एसिड जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट तत्व बड़ी मात्रा में मिले।
शोध के दौरान पाया गया कि बांस की कोपलों के सेवन से ब्लड शुगर स्तर कम हुआ, इंसुलिन का स्तर बेहतर हुआ और किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले बायोमार्कर में उल्लेखनीय कमी आई। फर्मेंटेड शूट्स लेने वाले समूह में किडनी की सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और ऊतकों को होने वाली क्षति भी कम देखी गई। हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में सामने आया कि जिन चूहों को बांस के फर्मेंटेड शूट्स दिए गए, उनकी किडनी की संरचना लगभग सामान्य स्थिति के करीब पहुंच गई। ग्लोमेरुलस, बोमैन कैप्सूल और किडनी की अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं में सुधार दर्ज किया गया।
प्रो. निर्मला का मानना है कि बांस की कोपलें भविष्य में फंक्शनल फूड और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों के रूप में विकसित की जा सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इंसानों पर बड़े पैमाने के क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही इसे उपचार या रोकथाम के विकल्प के रूप में अपनाया जा सकेगा।
डायबिटीज में किडनी इसलिए होती है प्रभावित
- लंबे समय तक बढ़ी शुगर किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
- शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते।
- पेशाब में प्रोटीन आने लगता है।
- शरीर में सूजन और कमजोरी बढ़ सकती है।
- समय पर नियंत्रण न हो तो डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।
बांस की कोपलों में ये मिला खास
क्वेरसेटिन – 28.39%
क्लोरोजेनिक एसिड – 37.50%
कैफिक एसिड – 28.36%
सैलिसिलिक एसिड – 59.24%
गैलिक एसिड – 66.67%
कूमेरिक एसिड – 61.90%
विशेषज्ञों के अनुसार ये तत्व शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मदद करते हैं, जो किडनी को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।