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भूजल दोहन की हद पार: पंजाब के 111 ब्लॉक अत्याधिक दोहन क्षेत्र घोषित, अब नए ट्यूबवेल पर नहीं मिलेगी एनओसी

राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 27 Feb 2026 09:57 AM IST
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सार

जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वार्षिक जल पुनर्भरण 18.60 अरब घन मीटर है, जबकि भूजल निष्कर्षण 26.27 अरब घन मीटर तक पहुंच गया है। यानी पुनर्भरण से 7.67 अरब घन मीटर अधिक दोहन हो रहा है।

Groundwater exploitation exceeds limits 111 blocks in Punjab declared overexploited areas
भूजल स्तर में आई भारी गिरावट - फोटो : iStock
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विस्तार

पंजाब में भूजल दोहन खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। जल स्रोत विभाग ने 23 जिलों के 111 ब्लॉकों को अत्यधिक दोहन (ओवरएक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में अधिसूचित कर दिया है, जबकि 10 ब्लॉकों को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। 
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विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद इन क्षेत्रों में नए ट्यूबवेल के लिए एनओसी नहीं दी जाएगी। भूजल का अत्यधिक उपयोग करने वाली फैक्टरियों पर भी सख्ती की जाएगी।
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अधिसूचना के अनुसार 15 ब्लॉक अर्द्ध-गंभीर और केवल 17 ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में हैं। यह सूची कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के सहयोग से तैयार भूजल आकलन रिपोर्ट के आधार पर बनाई गई है। अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मालेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, मोहाली, एसबीएस नगर, संगरूर, तरनतारन और रूपनगर में हालात अधिक चिंताजनक हैं।

रिचार्ज से 7.67 अरब घन मीटर अधिक दोहन

जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वार्षिक जल पुनर्भरण 18.60 अरब घन मीटर है, जबकि भूजल निष्कर्षण 26.27 अरब घन मीटर तक पहुंच गया है। यानी पुनर्भरण से 7.67 अरब घन मीटर अधिक दोहन हो रहा है। सरकार का कहना है कि अब भूजल संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

नहरी पानी और फसल विविधीकरण पर फोकस

भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए नहरी पानी की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। सरहिंद फीडर नहर की रिलाइनिंग परियोजना पूरी की जा चुकी है। देवीगढ़ डिवीजन में नौ नई नहरों का निर्माण हुआ है, जबकि मालवा नहर परियोजना पर काम जारी है। राज्य में 545 किलोमीटर लंबी 79 नहरों को दोबारा शुरू किया गया है और नहरों व खालों के बुनियादी ढांचे पर 4557 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही धान के रकबे को घटाने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार का कदम सराहनीय है, लेकिन भूजल संकट से निपटने के लिए सख्त प्रतिबंध जरूरी हैं। जिन क्षेत्रों में नहरी पानी उपलब्ध है, वहां किसानों को इसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। - हर्ष नैयर, प्रोफेसर, पंजाब विश्वविद्यालय

पंजाब को रेगिस्तान बनने से बचाना है इसलिए 111 ब्लॉकों में नए ट्यूबवेल की एनओसी नहीं दी जाएगी। चरणबद्ध तरीके से सख्ती लागू होगी और जहां नहरी पानी उपलब्ध है, वहां पहले प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। - बरिंदर गोयल, जल संसाधन मंत्री, पंजाब सरकार
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