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Highcourt: गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के वीसी-रजिस्ट्रार को एक माह की कैद, हाईकोर्ट ने ठहराया अवमानना का दोषी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 28 May 2026 08:57 AM IST
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सार
मामला विश्वविद्यालय के क्लास-4 और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने से जुड़ा है। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। विश्वविद्यालय को नियमितीकरण प्रक्रिया लागू करने का आदेश दिया गया था। इसी आदेश का पालन नहीं किया गया था।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है।
अदालत ने दोनों अधिकारियों को एक-एक महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, उन्हें तत्काल जेल भेजने के बजाय 7 जुलाई तक राहत प्रदान की गई है। इस अवधि में वे इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर कर सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय तक अपील दाखिल नहीं हुई या अपील पर सजा पर रोक नहीं मिली, तो अधिकारियों को सजा भुगतनी होगी। यह मामला विश्वविद्यालय के क्लास-4 और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने से जुड़ा है। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। विश्वविद्यालय को नियमितीकरण प्रक्रिया लागू करने का आदेश दिया गया था।
अदालत ने माना था कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के मामले में विश्वविद्यालय को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस फैसले के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की। इसके बावजूद अदालत के आदेशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर आदेश के पालन में देरी की। कई कर्मचारियों को अब भी नियमित नहीं किया गया है।
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अदालत ने दोनों अधिकारियों को एक-एक महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, उन्हें तत्काल जेल भेजने के बजाय 7 जुलाई तक राहत प्रदान की गई है। इस अवधि में वे इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर कर सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय तक अपील दाखिल नहीं हुई या अपील पर सजा पर रोक नहीं मिली, तो अधिकारियों को सजा भुगतनी होगी। यह मामला विश्वविद्यालय के क्लास-4 और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने से जुड़ा है। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। विश्वविद्यालय को नियमितीकरण प्रक्रिया लागू करने का आदेश दिया गया था।
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अदालत ने माना था कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के मामले में विश्वविद्यालय को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस फैसले के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की। इसके बावजूद अदालत के आदेशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर आदेश के पालन में देरी की। कई कर्मचारियों को अब भी नियमित नहीं किया गया है।
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