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Highcourt: 2500 सहायक लाइनमैन पदों पर प्रशिक्षुओं का समायोजन लटका, भर्ती विज्ञापन नहीं किए थे जारी
Fri, 14 Aug 2026 11:00 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 14 Aug 2026 11:00 AM IST
सार
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके अरोड़ा ने बताया कि याची लाइनमैन ट्रेड में अप्रेंटिसशिप पूरी कर चुके योग्य अभ्यर्थी हैं और उनके पास राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रमाणपत्र भी हैं। उन्होंने पीएसपीसीएल के 13 अप्रैल 2026 के फैसले 19 जून के ज्ञापन और 24 जून के सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी है।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) में 2500 सहायक लाइनमैन के नियमित पदों पर प्रशिक्षु अभ्यर्थियों के प्रस्तावित समायोजन का मामला फिलहाल लटक गया है।
याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई है कि बिना सार्वजनिक विज्ञापन के समायोजन किया जा रहा है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पीएसपीसीएल ने भरोसा दिया कि अगली सुनवाई तक प्रशिक्षु अभ्यर्थियों को सहायक लाइनमैन के पदों पर समायोजित कर नियुक्त नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके अरोड़ा ने बताया कि याची लाइनमैन ट्रेड में अप्रेंटिसशिप पूरी कर चुके योग्य अभ्यर्थी हैं और उनके पास राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रमाणपत्र भी हैं। उन्होंने पीएसपीसीएल के 13 अप्रैल 2026 के फैसले 19 जून के ज्ञापन और 24 जून के सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी है। इनके तहत पीएसपीसीएल और पीएसटीसीएल में प्रशिक्षण ले रहे अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं को नियमित पदों पर समायोजित करने की प्रक्रिया प्रस्तावित की गई थी।
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याचियों का तर्क है कि प्रशिक्षुओं का चयन केवल प्रशिक्षण के लिए हुआ था। उन्हें नियमित नौकरी की कोई गारंटी नहीं दी गई थी। अधिसूचना में भी प्रशिक्षण को नियुक्ति की गारंटी नहीं बताया गया था। उनका कहना है कि बिना सार्वजनिक विज्ञापन और खुली भर्ती के नियमित पदों पर नियुक्ति से अन्य योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित होंगे। इससे समान अवसर के अधिकार और भर्ती नियमों का उल्लंघन होगा।
याचिका में सभी रिक्त पदों को सार्वजनिक विज्ञापन के जरिये भरने की मांग की गई है। साथ ही प्रशिक्षुओं को समायोजन का लाभ मिलने पर समान आधार पर विचार का अवसर देने की मांग की गई है।
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याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई है कि बिना सार्वजनिक विज्ञापन के समायोजन किया जा रहा है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पीएसपीसीएल ने भरोसा दिया कि अगली सुनवाई तक प्रशिक्षु अभ्यर्थियों को सहायक लाइनमैन के पदों पर समायोजित कर नियुक्त नहीं किया जाएगा।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके अरोड़ा ने बताया कि याची लाइनमैन ट्रेड में अप्रेंटिसशिप पूरी कर चुके योग्य अभ्यर्थी हैं और उनके पास राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रमाणपत्र भी हैं। उन्होंने पीएसपीसीएल के 13 अप्रैल 2026 के फैसले 19 जून के ज्ञापन और 24 जून के सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी है। इनके तहत पीएसपीसीएल और पीएसटीसीएल में प्रशिक्षण ले रहे अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं को नियमित पदों पर समायोजित करने की प्रक्रिया प्रस्तावित की गई थी।
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याचियों का तर्क है कि प्रशिक्षुओं का चयन केवल प्रशिक्षण के लिए हुआ था। उन्हें नियमित नौकरी की कोई गारंटी नहीं दी गई थी। अधिसूचना में भी प्रशिक्षण को नियुक्ति की गारंटी नहीं बताया गया था। उनका कहना है कि बिना सार्वजनिक विज्ञापन और खुली भर्ती के नियमित पदों पर नियुक्ति से अन्य योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित होंगे। इससे समान अवसर के अधिकार और भर्ती नियमों का उल्लंघन होगा।
याचिका में सभी रिक्त पदों को सार्वजनिक विज्ञापन के जरिये भरने की मांग की गई है। साथ ही प्रशिक्षुओं को समायोजन का लाभ मिलने पर समान आधार पर विचार का अवसर देने की मांग की गई है।