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हरियाणा JBT भर्ती विवाद: खत्म हुई लंबी कानूनी लड़ाई, 25 साल बाद HC ने सुनाया फैसला; अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
Mon, 03 Aug 2026 10:22 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:22 PM IST
सार
केवल शैक्षणिक मेरिट के आधार पर चयन क्षेत्र में आने वाले करीब 160 अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नई नियुक्ति दी जाएगी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने सभी लंबित अपीलों का निपटारा कर दिया।
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हरियाणा जेबीटी भर्ती विवाद पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
- फोटो : सांकेतिक तस्वरी
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विस्तार
हरियाणा में वर्ष 1999 की 3,206 जेबीटी (पीआरटी) शिक्षकों की भर्ती को लेकर करीब ढाई दशक से चल रहे कानूनी विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने समाधान का प्रस्ताव रखते हुए स्पष्ट किया कि पिछले दो दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं छेड़ी जाएंगी।
वहीं, केवल शैक्षणिक मेरिट के आधार पर चयन क्षेत्र में आने वाले करीब 160 अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नई नियुक्ति दी जाएगी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने सभी लंबित अपीलों का निपटारा कर दिया। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत समाधान पर सभी पक्ष सहमत हैं। ऐसे में लंबे समय से लंबित विवाद का इसी आधार पर निस्तारण किया जाना उचित है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 8 जनवरी 2014 के एकल पीठ के फैसले के अनुसार नई समेकित मेरिट सूची तैयार करना अब व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कई जिलों की मूल साक्षात्कार सूची उपलब्ध नहीं है, कुछ रिकॉर्ड अधूरे हैं, जबकि कई मामलों में साक्षात्कार के अंक ही नहीं मिले।
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वहीं, केवल शैक्षणिक मेरिट के आधार पर चयन क्षेत्र में आने वाले करीब 160 अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नई नियुक्ति दी जाएगी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने सभी लंबित अपीलों का निपटारा कर दिया। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत समाधान पर सभी पक्ष सहमत हैं। ऐसे में लंबे समय से लंबित विवाद का इसी आधार पर निस्तारण किया जाना उचित है।
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राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 8 जनवरी 2014 के एकल पीठ के फैसले के अनुसार नई समेकित मेरिट सूची तैयार करना अब व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कई जिलों की मूल साक्षात्कार सूची उपलब्ध नहीं है, कुछ रिकॉर्ड अधूरे हैं, जबकि कई मामलों में साक्षात्कार के अंक ही नहीं मिले।
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करीब 25 वर्ष बीत जाने के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया को दोबारा तैयार करना संभव नहीं रह गया है। सरकार ने यह भी कहा कि वर्ष 1999 में नियुक्त अधिकांश शिक्षक दो दशक से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई कर्मचारी रिटायर भी हो चुके हैं। इसी कारण सरकार ने इन शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है।
सरकार ने अदालत को बताया कि वर्ष 2014 के फैसले से लाभान्वित 221 याचिकाकर्ताओं के मामलों की केवल शैक्षणिक मेरिट के आधार पर समीक्षा की गई। इसमें करीब 160 अभ्यर्थी चयन क्षेत्र में पाए गए। इन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाएगी, लेकिन यह नियुक्ति केवल भावी प्रभाव से होगी। हाईकोर्ट के समक्ष सरकार ने स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों को पिछली तिथि से नियुक्ति, वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, बकाया वेतन, एरियर या अन्य किसी प्रकार का मौद्रिक लाभ नहीं मिलेगा। खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह फैसला राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए रुख के आधार पर पारित किया गया है। इसे मामले में उठाए गए कानूनी प्रश्नों पर अदालत की अंतिम राय नहीं मानी जाएगी।
सरकार ने अदालत को बताया कि वर्ष 2014 के फैसले से लाभान्वित 221 याचिकाकर्ताओं के मामलों की केवल शैक्षणिक मेरिट के आधार पर समीक्षा की गई। इसमें करीब 160 अभ्यर्थी चयन क्षेत्र में पाए गए। इन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाएगी, लेकिन यह नियुक्ति केवल भावी प्रभाव से होगी। हाईकोर्ट के समक्ष सरकार ने स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों को पिछली तिथि से नियुक्ति, वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, बकाया वेतन, एरियर या अन्य किसी प्रकार का मौद्रिक लाभ नहीं मिलेगा। खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह फैसला राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए रुख के आधार पर पारित किया गया है। इसे मामले में उठाए गए कानूनी प्रश्नों पर अदालत की अंतिम राय नहीं मानी जाएगी।