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वकीलों की हड़ताल पर HC सख्त: अदालत के काम को बेशर्मी से रोकना स्वीकार नहीं, दबाव से व्यवस्था को नहीं झुका सकते
Tue, 28 Jul 2026 07:31 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 28 Jul 2026 07:31 AM IST
सार
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि पिछले 27 दिनों से पंजाब के जिला न्यायालयों में न्यायिक कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित है और आम लोगों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। इस स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में विधिक सहायता बचाव वकील योजना (एलएडीसी) के विरोध में 27 दिनों से चल रही वकीलों की हड़ताल पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि अदालतों को बेशर्मी से रोकना स्वीकार नहीं है। यदि किसी योजना के क्रियान्वयन को लेकर वास्तविक शिकायत है तो उसका समाधान किया जा सकता है लेकिन दबाव बनाकर न्यायिक व्यवस्था को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्य ठप कर मांगें मनवाने का तरीका किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मामले की सुनवाई जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि पिछले 27 दिनों से पंजाब के जिला न्यायालयों में न्यायिक कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित है और आम लोगों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। अदालत ने कहा कि इस स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह सोचकर दबाव बनाया जा रहा है कि अंत में पूरी व्यवस्था झुक जाएगी लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि जो भी उचित कार्रवाई होगी वह की जाएगी। साथ ही सवाल उठाया कि अदालतों का काम रोककर वकील समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरविंद सेठ ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की एलएडीसी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर आरोपियों को संस्थागत कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत पूर्णकालिक विधिक सहायता बचाव वकीलों की व्यवस्था की गई है। पंजाब के कई बार संघों का कहना है कि इस व्यवस्था से पहले की पैनल वकील प्रणाली में काम करने वाले अधिवक्ताओं के अवसर प्रभावित हुए हैं। इसी के विरोध में कई बार संघों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। मामले की सुनवाई दोपहर बाद भी जारी रहने की बात अदालत ने कही।
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अदालत ने स्पष्ट कहा कि अदालतों को बेशर्मी से रोकना स्वीकार नहीं है। यदि किसी योजना के क्रियान्वयन को लेकर वास्तविक शिकायत है तो उसका समाधान किया जा सकता है लेकिन दबाव बनाकर न्यायिक व्यवस्था को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्य ठप कर मांगें मनवाने का तरीका किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
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मामले की सुनवाई जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि पिछले 27 दिनों से पंजाब के जिला न्यायालयों में न्यायिक कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित है और आम लोगों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। अदालत ने कहा कि इस स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह सोचकर दबाव बनाया जा रहा है कि अंत में पूरी व्यवस्था झुक जाएगी लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि जो भी उचित कार्रवाई होगी वह की जाएगी। साथ ही सवाल उठाया कि अदालतों का काम रोककर वकील समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरविंद सेठ ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की एलएडीसी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर आरोपियों को संस्थागत कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत पूर्णकालिक विधिक सहायता बचाव वकीलों की व्यवस्था की गई है। पंजाब के कई बार संघों का कहना है कि इस व्यवस्था से पहले की पैनल वकील प्रणाली में काम करने वाले अधिवक्ताओं के अवसर प्रभावित हुए हैं। इसी के विरोध में कई बार संघों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। मामले की सुनवाई दोपहर बाद भी जारी रहने की बात अदालत ने कही।