{"_id":"6a2b79c58c92b3854a0d7854","slug":"hollywood-cinematographer-left-near-death-in-paragliding-accident-pgi-saves-his-life-in-90-minutes-2026-06-12","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शाबाश: पैराग्लाइडिंग हादसे में मरणासन्न हो गए थे हॉलीवुड सिनेमैटोग्राफर, PGI ने डेढ़ घंटे में दिया जीवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शाबाश: पैराग्लाइडिंग हादसे में मरणासन्न हो गए थे हॉलीवुड सिनेमैटोग्राफर, PGI ने डेढ़ घंटे में दिया जीवन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 12 Jun 2026 08:45 AM IST
विज्ञापन
सार
जॉर्ज रिचमंड 9 जून को कुल्लू में पैराग्लाइडिंग के दौरान 25 फीट की ऊंचाई से गिर गए थे। उनकी गर्दन की पांचवीं और छठी सर्वाइकल वर्टिब्रा (सी-5 और सी-6) अपनी जगह से खिसक चुकी थीं।
डॉ विशाल और उनकी टीम सर्जरी करने के बाद
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
हॉलीवुड की चर्चित फिल्मों डेडपूल एंड वूल्वरिन, फ्री गाय और रॉकेटमैन के सिनेमैटोग्राफर जॉर्ज रिचमंड (54) को हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग हादसे के बाद पीजीआई के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है।
हादसे में उनकी गर्दन की हड्डियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थीं और चारों अंगों में लगभग लकवे जैसी स्थिति बन गई थी। पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हाई-प्रिसीजन स्पाइनल सर्जरी कर न केवल उनकी जान बचाई, बल्कि उन्हें दोबारा चलने-फिरने लायक बनाने की दिशा में भी उम्मीद जगाई है।
हादसे में उनकी गर्दन की हड्डियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थीं और चारों अंगों में लगभग लकवे जैसी स्थिति बन गई थी। पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हाई-प्रिसीजन स्पाइनल सर्जरी कर न केवल उनकी जान बचाई, बल्कि उन्हें दोबारा चलने-फिरने लायक बनाने की दिशा में भी उम्मीद जगाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुल्लू में हुआ था हादसा
जॉर्ज रिचमंड पिछले चार दिनों से पीजीआई में भर्ती हैं। 9 जून को कुल्लू जिले के दुर्गम देव टिब्बा क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग के दौरान वह करीब 25 फीट की ऊंचाई से गिर गए थे। वह बिर-बिलिंग से शुरू हुई मल्टी-डे बिवौक फ्लाइंग एक्सपेडिशन का हिस्सा थे। हादसे के बाद भारतीय वायुसेना और ब्रिटिश दूतावास के समन्वय से विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। उन्हें पहले कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचाया गया और बाद में रेड अलर्ट के तहत एयरलिफ्ट कर सीधे पीजीआई के एडवांस्ड ट्रॉमा सेंटर लाया गया।जान पर बन गया था खतरा
पीजीआई पहुंचने तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। जांच में पता चला कि गर्दन की पांचवीं और छठी सर्वाइकल वर्टिब्रा (सी-5 और सी-6) पूरी तरह अपनी जगह से खिसक चुकी थीं। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था और हाथ-पैरों की ताकत लगभग खत्म हो गई थी। केवल पैरों में हल्की हरकतें ही बची थीं। डॉक्टरों के अनुसार चोट इतनी गंभीर थी कि सांस नियंत्रित करने वाली नसों पर भी असर पड़ सकता था जिससे जान का खतरा पैदा हो गया था। इसके अलावा खोपड़ी के आधार के पास ऊपरी कशेरुका में भी फ्रैक्चर मिला।डेढ़ घंटे में हुई जटिल सर्जरी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी और कार्डियक एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की संयुक्त टीम तत्काल सक्रिय हुई। ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज और वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डॉ. विशाल कुमार के नेतृत्व में आपातकालीन सर्जरी की गई। महज डेढ़ घंटे में पूरी हुई इस जटिल सर्जरी के दौरान गर्दन की खिसकी हुई हड्डियों को दोबारा सही स्थिति में लाया गया और टाइटेनियम प्लेट व चार विशेष स्क्रू की मदद से स्थायी रूप से स्थिर किया गया। उल्लेखनीय है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत भी नहीं पड़ी।फिलहाल जॉर्ज रिचमंड आईसीयू में विशेषज्ञों की निगरानी में हैं। उनके लिए विशेष न्यूरो-रिहैबिलिटेशन और फिजियोथेरेपी योजना तैयार की गई है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि लगातार उपचार और पुनर्वास के जरिये उनकी शारीरिक क्षमता में और सुधार होगा। डॉ. विशाल कुमार ने कहा कि गर्दन के प्रभावित हिस्से को दोबारा सही स्थिति में लाकर टाइटेनियम प्लेट और विशेष स्क्रू से फिक्स किया गया है। मरीज की स्थिति में सुधार है और विशेषज्ञ देखभाल के साथ उसे जल्द खड़ा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।