एमपी पुलिस पर बड़ा एक्शन: दो टीआई समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR, कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मामला
राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश पुलिस के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एमपी की आगर पुलिस ने झालावाड़ के डग में मादक पदार्थों की जब्ती को लेकर पूरी कार्रवाई 30 मिनट में की थी। कोर्ट ने इतने कम समय में की गई पूरी कार्रवाई को संदिग्ध माना है।
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मध्य प्रदेश के आगर मालवा पुलिस की राजस्थान के डग क्षेत्र में मादक पदार्थ को लेकर की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में है। इस पूरे मामले में अब एमपी की पुलिस कटघरे में खड़ी है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने 30 मिनट में की गई पूरी कार्रवाई को संदिग्ध मानकर दो थाना प्रभारियों और 100 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में संभवतः इस प्रकार का यह पहला मामला है जो दोनों राज्यों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजस्थान की झालावाड़ पुलिस के अनुसार इसमें दो थाना प्रभारियों तत्कालीन आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय और बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस पर भी केस दर्ज किया गया है। दरअसल मध्य प्रदेश की आगर कोतवाली पुलिस ने 28 जनवरी 2026 को झालावाड़ के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की कार्रवाई की थी। मध्यप्रदेश पुलिस ने पांच करोड़ रुपये का मादक पदार्थ (एमडी) जब्त करने की बात झालावाड़ पुलिस को बताई थी। मध्यप्रदेश पुलिस ने झालावाड़ पुलिस को फोन पर कार्रवाई के दौरान महिलाओं के द्वारा भद्रता करने संबंधी बात बताई थी, लेकिन ये नहीं बताया कि कार्रवाई कहां की जा रही है ? साथ ही किसी तरह की मदद की जरूरत है या नहीं इसकी जानकारी भी मध्यप्रदेश पुलिस ने नहीं दी थी।
बाद में इस पूरे मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चौमहला कोर्ट में एक परिवाद दायर किया। परिवाद के जरिए हमीद खान ने मध्यप्रदेश पुलिस पर आरोप लगाया गया कि स्थानीय डग पुलिस को सूचना दिए बिना गांव में आकर एमपी पुलिस ने घरों में तोड़फोड़ की। साथ ही झूठे मामले में उनके परिवार के लोगों को फंसाया गया। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को संदिग्ध माना और पुलिस वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किए।
30 मिनिट में हुई पूरी कार्रवाई संदिग्ध
कोर्ट के आदेश पर पुलिस विभाग के जांच अधिकारी ने एमपी पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। जांच में सामने आया कि पुलिस द्वारा किए गए जब्ती के दावे से संबंधित कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।साथ ही वीडियोग्राफी का दावा भी झूठा था। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में केवल 30 मिनट ही रुके थे, जबकि इतने कम समय में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है।
जांच के बाद केस दर्ज
इसी जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने एमपी पुलिस की तत्कालीन आगर थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, थाना प्रभारी रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट और पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा व शुभम सहित पूरी टीम पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
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दस लाख रुपये मांगने का भी पुलिस पर आरोप
इस्तगासे में पीड़ित हमीद खान ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने कहा कि किसान लोग इतने रुपये कहां से लाएंगे और रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उन्हें आगर थाने ले जाया गया। वहां गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों के खिलाफ दो किलो एमडी, 1 किलो स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम, 2 राइफलें आदि यानी 5 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त होना बताकर केस दर्ज कर दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि इनके परिवार के घरों की तलाशी लेने पर एक ग्राम सामग्री यानी कुछ भी नहीं मिला। केवल एक लाइसेंसशुदा एकनाली बंदूक, एक एयर गन और सात मोबाइल जब्त किए गए। शाहिर खान और मनोवर खान को पकड़कर ले जाया गया था। वहां ले जाकर उनके ऊपर मादक पदार्थ की सामग्री का केस बना दिया गया।

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