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कोर्ट का बड़ा एक्शन: MP के दो थाना प्रभारी सहित 100 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश, विभाग में हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 05:36 PM IST
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सार
झालावाड़ की चौमहला कोर्ट ने एमडी ड्रग्स बरामदगी मामले में आगर मालवा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तत्कालीन थाना प्रभारियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
झालावाड़ जिले की चोहमला कोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की आगर मालवा पुलिस की एक कार्रवाई अब कानूनी जांच के घेरे में आ गई है। झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने आगर कोतवाली के तत्कालीन थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
मामला 28 जनवरी 2026 का है, जब मध्य प्रदेश की आगर कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र स्थित घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की थी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य का एमडी मादक पदार्थ जब्त करने का दावा किया था। इस मामले का खुलासा बाद में मध्य प्रदेश में किया गया था।
पीड़ित पक्ष ने उठाए थे कार्रवाई पर सवाल
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि छापेमारी के दौरान घर की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। साथ ही स्थानीय डग थाना पुलिस को केवल मोबाइल फोन पर सूचना दी गई थी, जबकि कार्रवाई के स्थान, उद्देश्य और आवश्यक सहयोग के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
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गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश पुलिस बिना पर्याप्त सूचना और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी के गांव पहुंची तथा घर में तोड़फोड़ की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके बेटों को झूठे मामले में फंसाया गया।
जांच में सामने आए कई अहम तथ्य
कोर्ट के निर्देश पर जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच में पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए। जांच रिपोर्ट के अनुसार जब्ती से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। वहीं, पुलिस द्वारा की गई वीडियोग्राफी के दावे की भी पुष्टि नहीं हो सकी। जांच के दौरान प्राप्त सीसीटीवी फुटेज में यह सामने आया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में करीब 30 मिनट तक ही मौजूद रहे। रिपोर्ट में कहा गया कि इतनी कम अवधि में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी जैसी पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना संभव प्रतीत नहीं होता।
ये भी पढ़ें- राजस्थान: तनोट माता के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की कार ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई, एक की मौत; चार घायल
कोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश
जांच रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्यों और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर चौमहला कोर्ट ने पूरी कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
एसपी बोले- अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ
मामले को लेकर झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। कोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और नियमानुसार जो भी उचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
मामला 28 जनवरी 2026 का है, जब मध्य प्रदेश की आगर कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र स्थित घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की थी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य का एमडी मादक पदार्थ जब्त करने का दावा किया था। इस मामले का खुलासा बाद में मध्य प्रदेश में किया गया था।
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पीड़ित पक्ष ने उठाए थे कार्रवाई पर सवाल
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि छापेमारी के दौरान घर की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। साथ ही स्थानीय डग थाना पुलिस को केवल मोबाइल फोन पर सूचना दी गई थी, जबकि कार्रवाई के स्थान, उद्देश्य और आवश्यक सहयोग के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश पुलिस बिना पर्याप्त सूचना और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी के गांव पहुंची तथा घर में तोड़फोड़ की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके बेटों को झूठे मामले में फंसाया गया।
जांच में सामने आए कई अहम तथ्य
कोर्ट के निर्देश पर जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच में पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए। जांच रिपोर्ट के अनुसार जब्ती से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। वहीं, पुलिस द्वारा की गई वीडियोग्राफी के दावे की भी पुष्टि नहीं हो सकी। जांच के दौरान प्राप्त सीसीटीवी फुटेज में यह सामने आया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में करीब 30 मिनट तक ही मौजूद रहे। रिपोर्ट में कहा गया कि इतनी कम अवधि में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी जैसी पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना संभव प्रतीत नहीं होता।
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कोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश
जांच रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्यों और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर चौमहला कोर्ट ने पूरी कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
एसपी बोले- अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ
मामले को लेकर झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। कोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और नियमानुसार जो भी उचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।

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