पंजाब में फिर से महंगाई का वार: गांवों में 4.25 प्रतिशत तक पहुंची महंगाई दर, जरूरी सामान की बढ़ रही कीमतें
पंजाब के शहरों के मुकाबले गांवों में महंगाई अधिक है। शहरों में जहां महंगाई दर 3.34% रही है वहीं गांवों में यह 4.25 फीसदी दर्ज की गई है। पड़ोसी राज्यों में भी पहले के मुकाबले महंगाई में वृद्धि देखने को मिली है।
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पंजाब में लोगों पर महंगाई की मार फिर से पड़नी शुरू हो गई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र महंगाई से अधिक प्रभावित है। हालांकि अभी भी सूबे में महंगाई राष्ट्रीय दर से कम है।
प्रदेश उन पांच राज्यों की सूची से भी बाहर है जहां महंगाई दर सबसे अधिक दर्ज की गई है। जरूरी सामान की कीमतें बढ़ने का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ना शुरू हो गया है जिस कारण सूबे की महंगाई दर में भी वृद्धि हुई है।
केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ महीनों से प्रदेश में महंगाई दर कम हो रही थी जो लोगों के लिए कुछ राहत लेकर आई थी लेकिन अब दोबारा महंगाई में वृद्धि होनी शुरू हो गई है। जून में सूबे की महंगाई दर 3.83 प्रतिशत दर्ज की गई है जबकि मई में यह 3.34% थी। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई दर 4.38
फीसदी दर्ज की गई है जो पंजाब के मुकाबले अधिक है।
प्रदेश के शहरों के मुकाबले गांवों में महंगाई अधिक है। शहरों में जहां महंगाई दर 3.34% रही है वहीं गांवों में यह 4.25 फीसदी दर्ज की गई है। पड़ोसी राज्यों में भी पहले के मुकाबले महंगाई में वृद्धि देखने को मिली है। हरियाणा में 3.81%, हिमाचल प्रदेश 3.33% और जम्मू एंड कश्मीर में महंगाई दर बढ़कर 3.47% तक पहुंच गई है।
अमेरिका और ईरान संकट के कारण पेट्रोल के दाम बढ़ने का भी असर
अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिमल अंजुम ने बताया कि हाल ही में अमेरिका और ईरान संकट के कारण पेट्रोल के दाम बढ़े हैं। इस कारण सभी घरेलू चीजों के दामों में वृद्धि हुई है। हाल ही में डेयरी उत्पादों में भी वृद्धि देखने को मिली थी। इस सबका असर सूबे की महंगाई दर बढ़ने पर पड़ा है। हालांकि दूसरे कई राज्यों के मुकाबले प्रदेश की स्थिति अभी भी ठीक है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हुई बढ़ोतरी
इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पंजाब में जून के दौरान सीपीआई बढ़कर 107.41 हो गया है, जो मई में 106.20 था। सबसे अधिक सीपीआई 109.53 तेलंगाना में दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी सीपीआई में बढ़ोतरी हुई है। मई में यह 105.91 था, जो जून में बढ़कर 107 हो गया है।
सीपीआई एक तरह का पैमाना है जिससे यह पता लगाया जाता है कि समय के साथ आम लोगों की तरफ से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली व पानी जैसी सेवाएं शामिल होती हैं।
सूबे में लगातार कर्ज का भी बढ़ रहा बोझ
वर्ष 2024-25 में पंजाब पर 3.79 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो 2026-27 तक 4.47 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज अदायगी में खर्च हो रहा है। हालांकि सरकार को जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।