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पंजाब में मानसून की देरी से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की फसल पर संकट के बादल
पंजाब में इस वर्ष मानसून की देरी और सामान्य से कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि प्रधान राज्य पंजाब में इस समय धान की रोपाई का सीजन चल रहा है, जिसमें सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे बिजली, डीजल, खाद और कीटनाशक दवाइयों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। कई क्षेत्रों में नहरी पानी की पर्याप्त सुविधा नहीं है, जबकि दूसरी ओर किसानों को नियमित बिजली आपूर्ति भी नहीं मिल रही। नहरों में पानी की कमी और बिजली कटौती के कारण कई खेत सूखे पड़े हैं, जिससे धान की फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
मोगा के गांव सिंघावाला के किसान इकबाल सिंह, जो करीब 100 एकड़ में खेती करते हैं, ने बताया कि इस बार मानसून समय पर नहीं पहुंचा और बारिश भी बहुत कम हुई है। इसका सीधा असर धान की फसल पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि प्राकृतिक बारिश से धान की फसल को नाइट्रोजन जैसे आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण किसानों को अधिक मात्रा में खाद और स्प्रे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई खेतों में रोपाई के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं है और कई जमीनें अब भी सूखी पड़ी हैं। इसके अलावा किसानों को बिजली की नियमित आपूर्ति भी नहीं मिल रही, जिससे ट्यूबवेल चलाने में परेशानी हो रही है। इन सभी कारणों से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
दूसरे किसान जसविंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने 14 एकड़ में धान की खेती की है। उन्होंने कहा कि इस बार समय पर मानसून न आने के कारण खेतों में पानी का गंभीर संकट बना हुआ है। कई खेतों में धान की बुवाई के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। एक तरफ बिजली की कमी है, तो दूसरी ओर नहरों का पानी भी खेतों तक नहीं पहुंच रहा। इसके चलते फसलों को पर्याप्त सिंचाई नहीं मिल पा रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई और सिंचाई की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
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