पश्चिमी मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में मानसून की बेरुखी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। लगातार पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर असर पड़ने लगा है। कई स्थानों पर शुरुआती वर्षा के बाद बोए गए बीज नमी के अभाव में खराब होने लगे हैं, जबकि पर्याप्त वर्षा के बिना दोबारा बुवाई भी संभव नहीं हो पा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अच्छी वर्षा की कामना के लिए धार्मिक और पारंपरिक आयोजन किए जा रहे हैं।
अंजड़ में सर्व समाज ने किया काकड़ पूजन
अंजड़ क्षेत्र में सर्व समाज के लोगों ने काकड़ पूजन का आयोजन किया। गढ़ी मोहल्ला स्थित श्रीराम मंदिर से सभी समाजों के पंच और प्रमुख सामूहिक रूप से ग्राम चकेरी के समीप नगर की काकड़ (सरहद) तक पहुंचे। यहां पंडित लल्ला महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर इंद्रदेव से अच्छी वर्षा, अच्छी फसल, सुख-शांति और समृद्धि की कामना कराई। नगर परिषद अध्यक्ष मांगीलाल मुकाती ने बताया कि क्षेत्र में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण यह आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजपूत समाज अध्यक्ष शंकरलाल मंडलोई, दुदालाल पटेल सहित विभिन्न समाजों के अध्यक्ष, पंच और प्रमुख उपस्थित रहे।
पानसेमल और खेतिया में धार्मिक आयोजन
जिले में अब तक औसतन 196.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पानसेमल तहसील में केवल 30 मिलीमीटर बारिश हुई है। पानसेमल और खेतिया में लोगों ने अच्छी वर्षा की कामना के लिए विशेष धार्मिक आयोजन किए। कई व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर मंत्र जाप किया, जबकि मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गई। ग्रामीणों ने रानी काजल टेकड़ी और मार पानी देवी के मंदिर में लगातार तीन दिन तक विशेष पूजा-अर्चना कर वर्षा की प्रार्थना की।
ये भी पढ़ें- Jabalpur Robbery: जबलपुर गोल्ड लूट केस में गया कनेक्शन! MP-बिहार पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी; मचा हड़कंप
मतराला में निकली पारंपरिक जल प्रार्थना यात्रा
ग्राम मतराला में आदिवासी भाई-बहनों और ग्रामीणों ने हनुमान मंदिर से पारंपरिक यात्रा निकाली। कलश यात्रा के साथ ग्रामीण पूरे गांव में पानी की कामना करते हुए निकले और पानी की बौछारों के बीच रात्रि में कुलदेवी रानी काजल माता के स्थान पहुंचे। वहां रातभर रानीकाज, हरा राणा, चौहा राणा, कुंबाई और कुंदराना सहित विभिन्न पारंपरिक पूजा-अर्चनाएं की गईं। ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार रानी काजल माता वर्षा प्रदान करने वाली कुलदेवी हैं, इसलिए सोमवार से बुधवार तक लगातार पूजा-अर्चना जारी रही।