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स्मार्ट सिटी फंड में वित्तीय गड़बड़ी की जांच: सामने आया निगम के आउटसोर्स कर्मी का घपला, सीबीआई तक पहुंची बात

Tue, 11 Aug 2026 12:23 PM IST
Nivedita सचिन चाैधरी, संवाद, चंडीगढ़
सचिन चाैधरी, संवाद, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 11 Aug 2026 12:23 PM IST
सार

अभिषेक दरक की फर्म करीब तीन वर्षों से नगर निगम में कॉन्ट्रेक्ट पर सीए का काम कर रही है। निगम ने अनुभव मिश्रा को उनकी फर्म के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। इसी वजह से दोनों के बीच नियमित संपर्क रहता था।

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Investigation into financial irregularities in Smart City funds chandigarh mc outsourced employee fraud
चंडीगढ़ निगम के आउटसोर्स कर्मी का फ्राड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्मार्ट सिटी फंड में वित्तीय गड़बड़ी की जांच में चंडीगढ़ नगर निगम के आउटसोर्स कर्मचारी अनुभव मिश्रा के 87.90 लाख रुपये के कर्ज और प्रॉपर्टी खरीद का मामला सामने आया है। 

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जांच में सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक करीब 42 हजार रुपये सैलरी लेने वाले अनुभव ने नगर निगम में कॉन्ट्रेक्ट पर सीए का काम करने वाले अभिषेक दरक से 87.90 लाख रुपये उधार लिए थे। 
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जनवरी 2026 में नयागांव के आदर्श नगर में उसकी मां के नाम दो मंजिला मकान खरीदा गया। रकम चार महीने में लौटाने का भरोसा दिया गया था लेकिन भुगतान के लिए दिए गए 10 चेक में छह बाउंस हो गए। चंडीगढ़ एसआईटी ने अनुभव की प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज सीबीआई को सौंपे हैं। अब जांच में कर्ज, प्रॉपर्टी खरीद और रकम के स्रोत की पड़ताल की जा रही है।

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पहले रकम मांगी, फिर हुआ लोन एग्रीमेंट
एसआईटी की जांच में शामिल दस्तावेजों के अनुसार अनुभव ने अक्तूबर 2025 में अभिषेक दरक से 87.90 लाख रुपये मांगे थे। नवंबर में लोन एग्रीमेंट तैयार किया गया और रकम दी गई। अनुभव ने चार महीने में पूरी रकम लौटाने का भरोसा दिया था। अभिषेक दरक के मुताबिक, इस रकम में करीब 25 लाख रुपये उनके अपने थे जबकि बाकी रकम उन्होंने अन्य लोगों से ब्याज पर लेकर अनुभव को दी थी। अनुभव ने उन्हें बताया था कि वह प्रॉपर्टी खरीद रहा है और उस पर लोन करवाकर रकम वापस कर देगा।

10 चेक दिए, चार पास हुए, छह बाउंस
चार महीने में रकम वापस नहीं आने पर अभिषेक ने अनुभव से संपर्क किया। उनके मुताबिक फोन नहीं उठाने पर उन्होंने परिचित के माध्यम से भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन अनुभव नहीं मिला। रकम लौटाने के लिए अनुभव की ओर से दिए गए 10 चेक बैंक में लगाए गए। इनमें चार पास हुए और छह बाउंस हो गए। अभिषेक के अनुसार करीब 65 लाख रुपये का मूलधन अब भी फंसा हुआ है, जबकि ब्याज की रकम अलग है। इसके बाद उन्होंने अनुभव को नोटिस भेजा। उनके मुताबिक नोटिस भी रिसीव नहीं हुए। बाद में उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत देकर पूरे लेनदेन की जानकारी दी।

नयागांव में मां के नाम खरीदा दो मंजिला मकान
जनवरी 2026 में नयागांव के आदर्श नगर में अनुभव की मां के नाम दो मंजिला मकान खरीदा गया। मकान के पूर्व मालिक के मुताबिक बिक्री के समय अनुभव खुद गवाह था। पूर्व मालिक के अनुसार अनुभव ने मकान खरीदने के लिए गांव और अन्य जगहों की जमीन बेचकर रकम जुटाने की बात कही थी। रजिस्ट्री दस्तावेजों में सेक्टर-16 के मकान नंबर 45 और नयागांव के आदर्श नगर स्थित मकान नंबर 1304 के पते दर्ज हैं। अब जांच एजेंसियां मकान की खरीद में इस्तेमाल रकम के वास्तविक स्रोत और भुगतान के तरीके की पड़ताल कर रही हैं।

सीए फर्म के लिए नोडल अधिकारी था अनुभव
अभिषेक दरक के मुताबिक उनकी फर्म करीब तीन वर्षों से नगर निगम में कॉन्ट्रेक्ट पर सीए का काम कर रही है। निगम ने अनुभव मिश्रा को उनकी फर्म के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। इसी वजह से दोनों के बीच नियमित संपर्क रहता था। अभिषेक के अनुसार इसी परिचय के आधार पर अनुभव ने अक्तूबर 2025 में उनसे बड़ी रकम उधार मांगी थी। अब यही निजी लेनदेन स्मार्ट सिटी फंड से जुड़ी जांच में सामने आए दस्तावेजों का हिस्सा है।

2021 में स्पिक के जरिये निगम में आया था
अनुभव मिश्रा वर्ष 2021 में स्पिक के माध्यम से छह महीने के कॉन्ट्रेक्ट पर नगर निगम में आया था। बाद में उसे आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम दिया गया। उसकी कुल सैलरी करीब 44 हजार रुपये बताई गई है जबकि करीब 42 हजार रुपये हाथ में आते थे। एसआईटी की जांच में उसकी आय, बड़े कर्ज और प्रॉपर्टी खरीद के बीच अंतर को भी देखा जा रहा है। खासतौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि चार महीने में 87.90 लाख रुपये लौटाने के लिए उसके पास कौन सा वित्तीय स्रोत था।

स्मार्ट सिटी फंड से कनेक्शन की पड़ताल
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे अहम बिंदु यह है कि अनुभव ने 87.90 लाख रुपये का कर्ज किस वित्तीय क्षमता के आधार पर लिया, मकान खरीद की रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और इस निजी लेनदेन का स्मार्ट सिटी फंड से जुड़ी कथित वित्तीय गतिविधियों से कोई संबंध था या नहीं। एसआईटी ने प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए हैं। आगे की जांच में कर्ज के दस्तावेज, बैंक लेनदेन, चेक, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री और रकम के स्रोत का मिलान किया जाएगा।
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