झोटा हत्याकांड: विपिन के घर पहुंची सीबीआई, दुकान गिराने के मुद्दे पर बोलीं झोटा की पत्नी-हमने मांग नहीं की थी
मानसा में 13 अक्तूबर को मेडिकल स्टोर मालिक ने गोली मारकर परविंदर झोटा की हत्या कर दी थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान में आग लगा दी थी। बाद में दुकान ढहा दी गई। अब मामले की जांच कर रही सीबीआई के सामने दिक्कत आ गई है।
विस्तार
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है, लेकिन वारदात से जुड़े अहम सबूत जुटाना उसके लिए चुनौती है।
गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम विपिन कुमार के घर पहुंची और जांच की। विपिन कुमार पर अश्वनी कुमार को पनाह देने का आरोप है। पुलिस ने इस संबंध में उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इसी संबंध में सीबीआई की टीम ने विपिन के घर पहुंचकर जांच की।
13 अक्तूबर को मानसा में मेडिकल स्टोर पर गोलीबारी में झोटा की हत्या के बाद प्रदर्शनकारियों ने आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान में आग लगा दी थी। बाद में दुकान ढहा दी गई। ऐसे में घटनास्थल का मूल स्वरूप सुरक्षित नहीं है और वारदात का दृश्य दोबारा तैयार कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना आसान नहीं होगा। मामले में लापरवाही के आरोपों के बीच एसएचओ के बाद डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है।
बुधवार को सीबीआई टीम ने झोटा के पिता भीम सिंह और पत्नी मनप्रीत कौर से पूछताछ की। आसपास के दुकानदारों से भी जानकारी जुटाई गई। जांच एजेंसी ने संबंधित थाने से मूल एफआईआर और अन्य दस्तावेज कब्जे में लेकर अलग एफआईआर दर्ज की है। डीआईजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ेगी। सूत्रों के मुताबिक, वारदात का लाइव वीडियो भी कब्जे में लिया गया है। झोटा के नशे के कारोबार को लेकर किए गए पुराने खुलासों और उनसे जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। पूछताछ के लिए बुलाए जाने वाले लोगों की सूची तैयार हो रही है।
कई मांगों पर आश्वासन, इस्तीफे पर गतिरोध
बुधवार शाम गृह सचिव अपनीत कौर रिआत की अगुवाई में गृह विभाग, जिला प्रशासन और इंसाफ कमेटी के बीच बैठक हुई। इसमें डीसी नवजोत कौर, कंवलजीत कौर बराड़ और डीआईजी हरजीत सिंह ने कई मांगों पर आश्वासन दिया। निलंबित अधिकारियों की संपत्ति की विजिलेंस जांच, घायलों का सरकारी खर्च पर इलाज और प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही गई।
झोटा का पोस्टमार्टम पीजीआई से कराने, ख्याला में ट्रॉमा सेंटर बनाने या नेहरू कॉलेज स्टेडियम का नाम झोटा के नाम पर रखने, सील मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द करने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने का आश्वासन दिया गया। झोटा और उसके पिता के पुराने पुलिस मामलों की सीबीआई जांच कराने की बात भी कही गई। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे और डीजीपी की बर्खास्तगी की मांग पर गतिरोध कायम है। झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर और पिता भीम सिंह ने कहा कि परिवार मांगों पर कायम है। परिवार, इंसाफ कमेटी और लोगों की राय एकमत होने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसी कारण नौवें दिन भी झोटा का अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
मुख्य आरोपी से जुड़े मेडिकल स्टोर संचालकों की भूमिका संदिग्ध
मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता झोटा की हत्या के मामले में सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद घटना से जुड़े संभावित संपर्कों और अन्य पहलुओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों ने बताया कि कुछ ऐसे लोगों के भूमिगत होने की जानकारी है, जिनके बारे में संदेह जताया जा रहा है कि वे इस मामले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद मामले में हलचल तेज हो गई है। एजेंसी कई तथ्यों की पड़ताल कर रही है। अब जांच एजेंसी के सामने घटना से जुड़े सभी पहलुओं और संभावित संपर्कों की कड़ियां जोड़ने की चुनौती है।
मामले में मुख्य आरोपी के रूप में नामजद अश्वनी के संपर्कों और आसपास के मेडिकल स्टोर संचालकों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि वर्ष 2023 की एक घटना को लेकर कुछ लोग कथित तौर पर अश्वनी को ताने देते थे, जिससे वह मानसिक तनाव में रहता था। सीबीआई जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे कोई अन्य वजह थी या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।
फॉरेंसिक टीम ने मेडिकल स्टोर से जुटाए नमूने
मानसा। एंटी ड्रग टास्क फोर्स के कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। टीम ने थाना सिटी-2 से मामले का रिकॉर्ड कब्जे में लेकर अलग एफआईआर दर्ज की। इसके बाद जांच अधिकारियों से पूछताछ की गई।
डीआईजी राहुल शर्मा के नेतृत्व में करीब 12 सदस्यों की टीम झोटा के घर पहुंची और उसके पिता भीम सिंह, परिवार के सदस्यों तथा घायलों के बयान दर्ज किए। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर आसपास के दुकानदारों और राहगीरों से भी पूछताछ की। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल और आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर से नमूने एकत्र किए।
सीबीआई ने मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार के हथियार लाइसेंस, मेडिकल स्टोर लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की जांच की। उसकी कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है, ताकि घटना से पहले किए गए फोन कॉल की जानकारी मिल सके। इसके अलावा, झोटा की ओर से नशा बेचने वाले केमिस्टों के खिलाफ जुटाए गए सबूत भी टीम ने अपने कब्जे में लिए हैं।
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने बताया कि परिवार ने सीबीआई के समक्ष बयान दर्ज करवा दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच शुरू होने से इंसाफ मिलने की उम्मीद जगी है। परिवार पिछले नौ दिनों से झोटा का शव रखकर न्याय की मांग कर रहा है। संवाद
झोटा का चंडीगढ़ में होगा पोस्टमार्टम
परविंदर सिंह झोटा का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से कराया जाएगा। मजिस्ट्रेट की निगरानी में मौत से जुड़ी शुरुआती जांच की कार्रवाई भी चंडीगढ़ में होगी। हालांकि परिवार ने पोस्टमार्टम और अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने का फैसला किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की झोटा के परिवार से मुलाकात के करीब आठ घंटे बाद वरिष्ठ डीआईजी के नेतृत्व में सीबीआई की टीम मानसा पहुंची। सीबीआई ने मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) (हत्या), 109 (हत्या का प्रयास), 118(1) (खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाना), 61(2) (आपराधिक साजिश) और 3(5) (साझा मंशा) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा, शस्त्र अधिनियम, 1959 की धाराएं 25 और 27 भी लगाई गई हैं। जांच में ड्रग कंट्रोल, फोरेंसिक और जीएसटी अधिकारियों की मदद ली जाएगी। सीबीआई हत्या की परिस्थितियों, आरोपियों की भूमिका और नशीली दवाओं की कथित बिक्री से जुड़े आरोपों की भी जांच करेगी।
पत्नी बोली-हमने दुकान गिराने की मांग नहीं की थी
मानसा में गोली मारकर हत्या किए गए परविंदर सिंह झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने कहा कि परिवार ने आरोपी अश्वनी की दुकान गिराने की कोई मांग नहीं की थी। जिला प्रशासन और सरकार ने दुकान गिराकर एक तरह से सबूत नष्ट करने का प्रयास किया है।
झोटा की पत्नी ने इंसाफ कमेटी के धरने को संबोधित करते हुए कहा कि सीबीआई अधिकारियों के साथ परिवार की बैठक हुई थी। इसमें झोटा के शव का पोस्टमार्टम करवाने को लेकर चर्चा हुई लेकिन परिवार ने अभी इसके लिए सहमति नहीं दी है।
झोटा का परिवार केवल उसके परिजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरने में शामिल आम लोग और इंसाफ कमेटी भी इसका हिस्सा हैं। इसलिए पोस्टमार्टम पर फैसला लेने से पहले वह धरने में शामिल लोगों और कमेटी की राय ले रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि धरने में शामिल लोग और इंसाफ कमेटी पोस्टमार्टम के लिए सहमति देते हैं, तभी परिवार भी इसके लिए सहमति देगा।