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पीएम मोदी को पत्र: 20 सितंबर को राष्ट्रीय मानवता सेवा दिवस घोषित करें, पंजाब विस स्पीकर ने की मांग
Fri, 14 Aug 2026 08:15 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, होशियारपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, होशियारपुर
Published by: Nivedita
Updated Fri, 14 Aug 2026 08:15 AM IST
सार
भाई घनैया जी मिशन के संस्थापक प्रो. बहादुर सिंह सुनेत ने बताया कि भाई घनैया जी की मानवतावादी सेवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं।
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कुलतार सिंह संधवा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महान मानवतावादी भाई घनैया जी की स्मृति में हर वर्ष 20 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर ‘भाई घनैया जी मानवतावादी सेवा दिवस’ के रूप में मनाने की मांग की है।
स्पीकर ने पत्र में कहा कि भाई घनैया जी ने मानवता, करुणा, निस्वार्थ सेवा और आपसी भाईचारे की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 1704 में आनंदपुर साहिब के युद्ध के दौरान भाई घनैया जी घायल सैनिकों को बिना किसी भेदभाव के पानी और प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाते थे। वह यह नहीं देखते थे कि घायल सैनिक सिख पक्ष का है या विरोधी पक्ष का।
भाई घनैया जी मिशन के संस्थापक प्रो. बहादुर सिंह सुनेत ने बताया कि भाई घनैया जी की मानवतावादी सेवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी तथा इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस के साथ इस संबंध में पत्राचार किया गया है।
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सुनेत के अनुसार, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी ने अपनी वेबसाइट पर भाई घनैया जी की सेवाओं को ‘भाई घनैया जी : द ड्यूनांट ऑफ इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित किया है। उन्होंने बताया कि रेडक्रॉस से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के पत्राचार में भी युद्ध के मैदान में मित्र और शत्रु का भेद किए बिना घायलों को पानी और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की भाई घनैया जी की सेवा को मानवीय सहायता के सिद्धांतों के अनुरूप बताया गया है।
सुनेत ने केंद्र सरकार से मांग की कि 20 सितंबर को ‘मानवता की सेवा एवं अंतरराष्ट्रीय भाईचारा दिवस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाए। उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में भाई घनैया जी के जीवन पर सेमिनार आयोजित किए जाएं। साथ ही रेडक्रॉस कार्यालयों में उनके चित्र लगाए जाएं और उनके नाम पर प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण, रक्तदान, नेत्रदान तथा अंगदान अभियान चलाए जाएं।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा, अंतरराष्ट्रीय भाईचारे और विश्व शांति के संदेश को और मजबूत किया जा सकेगा।
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स्पीकर ने पत्र में कहा कि भाई घनैया जी ने मानवता, करुणा, निस्वार्थ सेवा और आपसी भाईचारे की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 1704 में आनंदपुर साहिब के युद्ध के दौरान भाई घनैया जी घायल सैनिकों को बिना किसी भेदभाव के पानी और प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाते थे। वह यह नहीं देखते थे कि घायल सैनिक सिख पक्ष का है या विरोधी पक्ष का।
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भाई घनैया जी मिशन के संस्थापक प्रो. बहादुर सिंह सुनेत ने बताया कि भाई घनैया जी की मानवतावादी सेवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी तथा इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस के साथ इस संबंध में पत्राचार किया गया है।
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सुनेत के अनुसार, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी ने अपनी वेबसाइट पर भाई घनैया जी की सेवाओं को ‘भाई घनैया जी : द ड्यूनांट ऑफ इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित किया है। उन्होंने बताया कि रेडक्रॉस से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के पत्राचार में भी युद्ध के मैदान में मित्र और शत्रु का भेद किए बिना घायलों को पानी और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की भाई घनैया जी की सेवा को मानवीय सहायता के सिद्धांतों के अनुरूप बताया गया है।
सुनेत ने केंद्र सरकार से मांग की कि 20 सितंबर को ‘मानवता की सेवा एवं अंतरराष्ट्रीय भाईचारा दिवस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाए। उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में भाई घनैया जी के जीवन पर सेमिनार आयोजित किए जाएं। साथ ही रेडक्रॉस कार्यालयों में उनके चित्र लगाए जाएं और उनके नाम पर प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण, रक्तदान, नेत्रदान तथा अंगदान अभियान चलाए जाएं।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा, अंतरराष्ट्रीय भाईचारे और विश्व शांति के संदेश को और मजबूत किया जा सकेगा।