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एलपीयू हिंसा पर हाईकोर्ट सख्त: पंजाब सरकार से रिपोर्ट तलब, पूछा-अब तक क्या कार्रवाई की गई
Wed, 30 Sep 2026 01:29 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:29 PM IST
सार
फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में 27 सितंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रसारित एक अपुष्ट दावे से जुड़ी बताई गई। याचिका में विश्वविद्यालय में हुई हिंसा की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने अब पंजाब सरकार से जवाब मांगा है।
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एलपीयू हिंसा पर हाईकोर्ट में सुनवाई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पुलिस जांच की रिपोर्ट मांगी है।
विश्वविद्यालय परिसर में हुई घटनाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार से अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा। याचिका में हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और इसे अदालत की निगरानी में सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।
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विश्वविद्यालय परिसर में हुई घटनाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार से अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा। याचिका में हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और इसे अदालत की निगरानी में सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद प्रदर्शन और हिंसा का आरोप
याचिका के अनुसार, 26 सितंबर की रात सोशल मीडिया मंच रेडिट पर विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उसकी आत्महत्या से संबंधित एक पोस्ट प्रसारित हुई थी। पोस्ट में विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस पोस्ट और व्हाट्सऐप संदेशों के प्रसार के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बढ़ गया और बड़ी संख्या में विद्यार्थी छात्रावास जीएच-3 के बाहर एकत्र हो गए।
याचिका में कहा गया है कि रात करीब दो बजे प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने फगवाड़ा और जालंधर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को अवरुद्ध कर दिया। इसके बाद परिसर में तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट और सुरक्षा कर्मचारियों के साथ मारपीट किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि हिंसा में बाहरी लोग शामिल थे और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के तथ्यों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट से होनी है।
याचिका के अनुसार, 26 सितंबर की रात सोशल मीडिया मंच रेडिट पर विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उसकी आत्महत्या से संबंधित एक पोस्ट प्रसारित हुई थी। पोस्ट में विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस पोस्ट और व्हाट्सऐप संदेशों के प्रसार के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बढ़ गया और बड़ी संख्या में विद्यार्थी छात्रावास जीएच-3 के बाहर एकत्र हो गए।
याचिका में कहा गया है कि रात करीब दो बजे प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने फगवाड़ा और जालंधर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को अवरुद्ध कर दिया। इसके बाद परिसर में तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट और सुरक्षा कर्मचारियों के साथ मारपीट किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि हिंसा में बाहरी लोग शामिल थे और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के तथ्यों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट से होनी है।
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सीबीआई जांच की मांग पर सरकार से जवाब तलब
विद्यार्थी रवि राज की ओर से दायर जनहित याचिका में हिंसा की घटनाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि हिंसा के कारणों, इसमें शामिल लोगों और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और पुलिस जांच कर रही है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार से जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों का विवरण देने वाली रिपोर्ट पेश करने को कहा।
अदालत में स्थिति रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब पुलिस की जांच और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा के दौरान हुई घटनाओं, सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और तोड़फोड़ के आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंची है। फिलहाल सीबीआई जांच कराने की मांग पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर मामले पर विचार किया जाएगा।
विद्यार्थी रवि राज की ओर से दायर जनहित याचिका में हिंसा की घटनाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि हिंसा के कारणों, इसमें शामिल लोगों और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और पुलिस जांच कर रही है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार से जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों का विवरण देने वाली रिपोर्ट पेश करने को कहा।
अदालत में स्थिति रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब पुलिस की जांच और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा के दौरान हुई घटनाओं, सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और तोड़फोड़ के आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंची है। फिलहाल सीबीआई जांच कराने की मांग पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर मामले पर विचार किया जाएगा।