Raghav Chadha: विदेश से पढ़े, बने सबसे युवा राज्यसभा सांसद; अन्ना आंदोलन से लेकर AAP में शामिल होने तक का सफर
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया और उन्हें सदन में बोलने के लिए समय न देने का भी आग्रह किया। इसके बाद से राजनीतिक चर्चाएं गरम हैं।
विस्तार
आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया। साथ ही उन्हें सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न करने का भी आग्रह किया था।पार्टी के इस एक्शन के बाद से राघव चड्ढा चर्चा में आ गए हैं। आप राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ने आरोप लगाया है कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था तो चड्ढा ने उस पर सिग्नेचर भी नहीं किए थे। आइए जानते हैं, काैन हैं राघव चड्ढा जो कभी अरविंद केजरीवाल के खास लोगों में शामिल थे।
दिल्ली से शुरुआती शिक्षा
राघव चड्ढा 11 नवंबर 1988 को दिल्ली में जन्मे। उन्होंने अपनी स्कूलिंग दिल्ली पब्लिक स्कूल से की। राजनीति में आने से पहले राघव चड्ढा ने2009 में डीयू से काॅमर्स में ग्रेजुएशन की। 2011 में उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की और डेलॉइट और ग्रांट थॉर्नटन जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एक एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम भी पूरा किया।
2020 में बने विधायक
अन्ना आंदोलन के बाद राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। उनकी प्रभावी भाषण शैली ने उन्हें जल्दी ही मजबूत प्रवक्ता बना दिया। 2019 में वे साउथ दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े, जहां से उन्हें भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने मात दी। इसके बाद 2020 में उन्होंने राजिंदर नगर से विधायक का चुनाव जीता। 2022 में उन्हें पंजाब से राज्यसभा सांसद बनाया गया। वे सबसे युवा रास सांसद हैं।
अभिनेत्री परिणीति से की है शादी
राघव चड्ढा ने बाॅलीवुड अदाकारा परिणीति चोपड़ा से शादी की है। दोनों की पहली मुलाकात लंदन में हुई थी। मई 2023 में राघव और परिणीति ने दिल्ली में सगाई कर ली। 24 सितंबर 2023 में उदयपुर के लीला पैलेस में राघव और परिणीति की शादी हुई थी। 19 अक्तूबर 2025 को दंपती एक बच्चे के माता पिता बने।क्यों हुई केजरीवाल से दूरी
दरअसल केजरीवाल और राघव चड्ढा में दूरियां उसी दिन से नजर आने लगी थी जब केजरीवाल जेल में थे और राघव अपनी पत्नी परिनीति के साथ लंदन में घूमते व मस्ती की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे थे। राघव को लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा गया। औपचारिक तौर पर वे श्री आनंदपुर साहब सीट पर नजर आए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे।
विपक्ष जहां इसे आप के अंदरूनी मतभेद का संकेत बता रहा है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है, जिसका मकसद अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना है।
'मेरी चुप्पी को मेरी हार मत समझना': राघव चड्ढा
चड्ढा ने आगे कहा कि वह हमेशा संसद में जनता के मुद्दे उठाते रहे हैं, आप सांसद ने कहा कि उनके अधिकार छीने जा रहे हैं, लेकिन उन्हें उनकी चुप्पी को हार नहीं समझना चाहिए। "और जिन लोगों ने आज संसद में बोलने का मेरा अधिकार छीन लिया, मुझे चुप करा दिया। मैं उनसे भी कुछ कहना चाहता हूं। मेरी चुप्पी को मेरी हार मत समझना। मेरी चुप्पी को मेरी हार मत समझना। मैं वह नदी हूं जो समय आने पर बाढ़ बन जाती है।"
आप सांसद ने जोर देकर कहा कि संसद में उनके हस्तक्षेप रोजमर्रा की चिंताओं पर केंद्रित होते हैं, जैसे हवाई अड्डों पर खाने की ज्यादा कीमतें, डिलीवरी कर्मचारियों को पेश आने वाली चुनौतियां, खाने में मिलावट, टोल और बैंकिंग शुल्क, कंटेंट बनाने वालों पर पड़ने वाले टैक्स के मुद्दे, और टेलीकॉम कंपनियों की ऐसी हरकतें जैसे बार-बार रिचार्ज करवाना और डेटा रोलओवर की सुविधा न देना।
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