Punjab: 2018 से लंबित नगर निकायों का प्रस्ताव, अब 10 दिन में मिलेगी मंजूरी; पेंडेंसी पर मंत्री अरोड़ा सख्त
मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि अब तक 900 प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि 200 प्रस्ताव अभी लंबित हैं, जिन्हें जल्द मंजूरी दी जाएगी। अगर तय समय में काम नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी से मंजूरी का अधिकार लेकर किसी अन्य अधिकारी को सौंप दिया जाएगा।
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पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग के पास नगर निगमों और परिषदों के विकास कार्यों से जुड़े 1100 प्रस्ताव लंबित थे। इसमें वर्ष 2018 से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि अब 10 दिन अंदर इन प्रस्तावों को मंजूरी देनी होगी।
अरोड़ा ने कहा कि अब तक 900 प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि 200 प्रस्ताव अभी लंबित हैं, जिन्हें जल्द मंजूरी दी जाएगी। अगर तय समय में काम नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी से मंजूरी का अधिकार लेकर किसी अन्य अधिकारी को सौंप दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अब सभी प्रस्ताव ऑनलाइन माध्यम से ही आएंगे और इसके लिए सरकार ने नया सॉफ्टवेयर लॉन्च कर दिया है, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
इंजीनियरों की वित्तीय शक्तियां दोगुनी
मंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए इंजीनियरों की वित्तीय शक्तियां बढ़ाई गई हैं। चीफ इंजीनियर की सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ और सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ कर दी गई है।
अब राज्य में हर चीफ इंजीनियर को अलग-अलग क्षेत्र सौंपे गए हैं। पहले एक फाइल पांच-पांच चीफ इंजीनियरों के पास जाती थी, अब एक फाइल सिर्फ एक ही चीफ इंजीनियर देखेगा, जिससे देरी खत्म होगी।
सीवरेज, जलभराव और भूजल पर फोकस
सीवरेज लाइनों की सफाई के लिए सभी ठेके दे दिए गए हैं और जहां जरूरत होगी वहां सुपर सक्शन मशीनों से सफाई कराई जाएगी। बरसात के दौरान जलभराव की समस्या पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि पानी की निकासी समय पर हो सके।
भूजल स्तर गिरने पर चिंता जताते हुए मंत्री ने कहा कि नगर निगम क्षेत्रों में सरफेस वाटर के इस्तेमाल की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जहां जमीन की कमी है, वहां विधायकों को पत्र लिखकर जगह उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने बताया कि सड़कों के टेंडर लगाए जा रहे हैं। अब तक 2424 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं और करीब 2000 पर काम शुरू हो चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में सड़क परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अगर स्मार्ट सिटी के लिए फंड न आता तो स्थिति और खराब होती, लेकिन अब काम हो रहा है और जमीन पर दिखाई भी दे रहा है। नगर निगमों में नई प्रॉपर्टी टैक्स लिस्ट तैयार की जा रही है। कई संपत्तियां अब तक हाउस टैक्स के दायरे में नहीं थीं, उन्हें कवर किया जाएगा। पुराने बकायों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना पर भी काम होगा।
