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मान सरकार की पहल: स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा की शुरुआत, 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को मिलेगा लाभ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 04 Jun 2026 04:25 PM IST
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सार

भगवंत मान सरकार की इस पहल से 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ रही छठी से दसवीं कक्षा की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को सीधे तौर पर लाभ मिला। 

Punjab Government Initiative Launch of School Based Menstrual Health Education 3.4 Lakh Girl Students Benefit
सीएम भगवंत मान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रही किशोर लड़कियों के लिए भारत की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा पहलों में से एक की शुरुआत की है।



28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम के चरणबद्ध राज्य स्तरीय विस्तार की घोषणा की। पाठ्यक्रम का पहला सत्र इन सरकारी स्कूलों में 29 मई को आयोजित किया गया। इस पहल से 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में पढ़ रही छठी से दसवीं कक्षा की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को सीधे तौर पर लाभ मिला। 
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इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म कभी लड़कियों की शिक्षा, आत्मविश्वास, भागीदारी, कल्याण या स्कूल जीवन में बाधा न बने। यह कार्यक्रम भारत के सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के अनुरूप है, जिनमें यह स्वीकार किया गया है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता सीधे तौर पर किशोर लड़कियों की गरिमा, शिक्षा और समानता से जुड़ी हुई है।
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भगवंत मान सरकार ने यह कार्यक्रम वॉश यूनाइटेड के सहयोग से शुरू किया है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है। इस पहल के तहत मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट नामक एक संरचित पाठ्यक्रम के माध्यम से विशेष रूप से तैयार किए गए कक्षा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिन्हें पंजाबी भाषा में तैयार किया गया है ताकि छात्राएं विषयवस्तु को बेहतर ढंग से समझ सकें।

इस सत्र के अंतर्गत गाइड के मुख्य पात्र के रूप में 10 वर्षीय लड़की रूबी की कहानी प्रस्तुत की जाती है। राज्यभर में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा लगभग 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है ताकि वे इन सत्रों को कक्षाओं में सहज तरीके से संचालित कर सकें। यह कार्यक्रम एक संरचित तीन-सत्रीय हस्तक्षेप मॉडल के तहत कार्य करता है, जिसमें कहानी-आधारित शिक्षण और आयु-उपयुक्त मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा शामिल है।

भगवंत मान सरकार द्वारा राज्यभर में कार्यक्रम शुरू करने से पहले शिक्षकों को व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है। लगभग 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को पहले मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया। इस पहल की शुरुआत पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाए गए एक पूर्व पायलट कार्यक्रम के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए की गई है, जिसमें 45,000 से अधिक छात्र शामिल थे।

पंजाब सरकार द्वारा साझा किए गए परिणामों के अनुसार, इस पायलट कार्यक्रम में शामिल 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से पीरियड्स संबंधी शिक्षा प्रदान करने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 94 प्रतिशत ने सिफारिश की कि इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे पंजाब में किया जाना चाहिए। लगभग 88 प्रतिशत शिक्षकों ने पाठ्यक्रम को पहले के तरीकों की तुलना में अधिक सरल और प्रभावशाली बताया, जबकि 80 प्रतिशत ने कक्षा सत्रों के दौरान छात्राओं की सक्रिय भागीदारी देखी।

फरीदकोट की अध्यापिका जसप्रीत कौर ने कहा कि माहवारी के दौरान स्वच्छता संबंधी यह पाठ्यक्रम लड़कियों के लिए सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने हेतु एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है, जिससे माहवारी से जुड़े मिथकों को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है। 

अमृतसर की अध्यापिका मोनिका सूद ने कहा कि लड़कियों ने सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और खुलकर यह साझा किया कि घरों और समुदायों में माहवारी को किस प्रकार देखा और समझा जाता है। इस कार्यक्रम के कारण कक्षाओं में माहवारी पर खुलकर बातचीत करना संभव हो पाया है। मोगा की एक अध्यापिका सिल्वी ने कहा कि लड़कियां ही नहीं, बल्कि वे अध्यापिकाएं भी जो पहले माहवारी पर बात करने में झिझक महसूस करती थीं, अब सत्रों के दौरान खुलकर और आत्मविश्वास के साथ इस विषय पर चर्चा करने लगी हैं।

कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राओं ने भी सत्रों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संगरूर की नौवीं कक्षा की छात्रा कोमल प्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों ने उसका आत्मविश्वास बढ़ाया और उसे यह समझने में मदद की कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, कोई बीमारी नहीं। मोगा की एक अन्य छात्रा डिंपल रानी ने कहा कि उसे ये सत्र बहुत रोचक लगे और उसने घर जाकर अपनी मां के साथ अपने सीखने के अनुभव साझा किए। दसवीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि पाठ्यक्रम के कारण लड़कियां सत्रों के दौरान बिना शर्म महसूस किए खुलकर बात कर सकीं, क्योंकि इससे उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ।

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