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High Court: बेअंत सिंह की हत्या को बीते 32 साल, अब परिवार को क्या खतरा, सरकारी मकान खाली करें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Ankesh Kumar
Updated Fri, 13 Mar 2026 07:37 AM IST
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सार
पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के परिवार को सरकारी मकान खाली करना होगा। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या को 32 साल बीत चुके हैं, अब परिवार को क्या खतरा है, उन्हें कहें कि सरकारी आवास खाली करें।
high court
- फोटो : संवाद
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विस्तार
चंडीगढ़ में सरकारी आवासों पर लंबे समय से कब्जा जमाए बैठे लोगों के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब सख्त रवैया अपनाया है। सुनवाई के दौरान सेक्टर-35 की कोठी का मुद्दा उठाया गया और बताया गया कि यह अलॉटमेंट अवधि पूरी होने के बावजूद कब्जे में है। हाईकोर्ट को बताया गया कि इसमें पूर्व सीएम बेअंत सिंह का परिवार रहता है और जो प्रकाश सिंह वर्तमान में रह रहे हैं उनके बेटे केंद्रीय मंत्री हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या को 32 साल बीत चुके हैं, अब परिवार को क्या खतरा है, उन्हें कहें कि सरकारी आवास खाली करें। साथ ही अदालत ने प्रशासन से कहा कि सरकारी मकानों पर अन्य कब्जों को लेकर भी अब सोइए मत, कार्रवाई कीजिए और मकान खाली कराइए।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने बताया गया कि कुछ लोग कई वर्षों से सरकारी मकानों में रह रहे हैं जबकि उनके आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया भी चल रही है। अदालत ने विशेष रूप से सेक्टर-35 के मकान नंबर-33 में रह रहे प्रकाश सिंह के मामले पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि जब आवंटन रद्द करने की कार्यवाही चल रही है तो संबंधित व्यक्ति पिछले छह साल से सरकारी मकान में कैसे रह रहा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या उससे व्यावसायिक दरों पर किराया वसूला जा रहा है और अगर हां तो इसका प्रमाण रिकॉर्ड पर क्यों नहीं है। पीठ ने कहा कि यदि नियमों के विरुद्ध कब्जा है तो प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। केवल नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति को मामले में जरूरी पक्षकार बनाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे अदालत में तलब भी किया जाएगा।
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प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि संबंधित व्यक्ति का नाम पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के परिवार से जुड़ा है और उसे सुरक्षा खतरा हो सकता है। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि खतरे का आधार क्या है। हाईकोर्ट ने कहा कि क्या इस संबंध में कोई खुफिया रिपोर्ट है? हाईकोर्ट को बताया गया कि इंटेलिजेंस इनपुट मौजूद हैं जो खतरा बताती हैं, आज भी परिवार को खतरा है। हाईकोर्ट को बताया गया कि इस प्रकार की कोई अन्य कोठी मौजूद नहीं है जहां सभी ओर से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, सैकड़ों की संख्या में सुरक्षाबल की तैनाती मौजूद है। सुनवाई में यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ में हरियाणा, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े अधिकारियों के पास कुल 32 से अधिक सरकारी मकान हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि पूरे मामले का स्पष्ट रिकॉर्ड और रिपोर्ट अगली सुनवाई पर पेश की जाए और अवैध कब्जों को हटाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।