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SIR In Punjab: 18 जिलों में शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा, लुधियाना और पठानकोट में सबसे अधिक लंबित मामले
Sun, 02 Aug 2026 10:16 AM IST
शाहिल शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 02 Aug 2026 10:16 AM IST
सार
पठानकोट में 350 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन बाकी है। वहीं, बठिंडा में सात, मलेरकोटला में दो और जालंधर में केवल एक मतदाता का रिकॉर्ड डिजिटाइज होना शेष है।
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पंजाब में एसआईआर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची से जुड़े। एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन का कार्य करीब पूरा हो चुका है। शनिवार तक राज्य के कुल 2,14,61,043 मतदाताओं में से 2,14,57,800 मतदाताओं (99.98 प्रतिशत) के फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं। केवल 3,243 मतदाताओं का रिकॉर्ड डिजिटाइज होना बाकी है।
पंजाब के 23 जिलों में से 18 जिलों ने 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इनमें अमृतसर, बरनाला, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, कपूरथला, मानसा, मोगा, पटियाला, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली), संगरूर, शहीद भगत सिंह नगर, श्री मुक्तसर साहिब और तरनतारन शामिल हैं।
इन जिलों में एक भी मतदाता का रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन के लिए लंबित नहीं है। हालांकि पांच जिलों में कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड अभी भी डिजिटल किए जाने बाकी हैं। सबसे अधिक लंबित मामले लुधियाना जिले में हैं, जहां 26,83,999 मतदाताओं में से 26,81,116 का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है और 2,883 रिकॉर्ड शेष हैं।
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पठानकोट में 350 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन बाकी है। वहीं, बठिंडा में सात, मलेरकोटला में दो और जालंधर में केवल एक मतदाता का रिकॉर्ड डिजिटाइज होना शेष है।
लुधियाना में 99.89 प्रतिशत रिकॉर्ड डिजिटल हो चुके हैं। राज्य स्तर पर देखें तो केवल 0.02 प्रतिशत रिकॉर्ड लंबित रह गए हैं।
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पंजाब के 23 जिलों में से 18 जिलों ने 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इनमें अमृतसर, बरनाला, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, कपूरथला, मानसा, मोगा, पटियाला, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली), संगरूर, शहीद भगत सिंह नगर, श्री मुक्तसर साहिब और तरनतारन शामिल हैं।
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इन जिलों में एक भी मतदाता का रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन के लिए लंबित नहीं है। हालांकि पांच जिलों में कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड अभी भी डिजिटल किए जाने बाकी हैं। सबसे अधिक लंबित मामले लुधियाना जिले में हैं, जहां 26,83,999 मतदाताओं में से 26,81,116 का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है और 2,883 रिकॉर्ड शेष हैं।
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पठानकोट में 350 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन बाकी है। वहीं, बठिंडा में सात, मलेरकोटला में दो और जालंधर में केवल एक मतदाता का रिकॉर्ड डिजिटाइज होना शेष है।
लुधियाना में 99.89 प्रतिशत रिकॉर्ड डिजिटल हो चुके हैं। राज्य स्तर पर देखें तो केवल 0.02 प्रतिशत रिकॉर्ड लंबित रह गए हैं।
पंजाब की मुख्य चुनाव
अधिकारी अनिंदिता मित्रा बताती हैं कि डिजिटलाइजेशन का जो काम लंबित है। उसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सत्यापन और मतदाता सूची पुनरीक्षण की अगली कार्रवाई की जाएगी ताकि आगामी चुनावों के लिए शुद्ध एवं त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जा सके।
अब होगा सत्यापन
डिजिटाइज किए गए फॉर्म का बूथ लेवल अधिकारी, ईआरओ और एईआरओ द्वारा मिलान किया जाएगा। इसमें मतदाता की पहचान, पता और अन्य विवरणों का सत्यापन
होगा। जिन मतदाताओं ने आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं, उनकी जांच की जाएगी। जहां दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध हों, वहां नोटिस देकर अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी। ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नागरिक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए दावा एवं आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। यह एसआईआर का महत्वपूर्ण चरण होता है।जरूरत पड़ने पर यदि किसी केस में रिकॉर्ड संबंधी विसंगति होगी। वहां बीएलओ घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे। सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
अधिकारी अनिंदिता मित्रा बताती हैं कि डिजिटलाइजेशन का जो काम लंबित है। उसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सत्यापन और मतदाता सूची पुनरीक्षण की अगली कार्रवाई की जाएगी ताकि आगामी चुनावों के लिए शुद्ध एवं त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जा सके।
अब होगा सत्यापन
डिजिटाइज किए गए फॉर्म का बूथ लेवल अधिकारी, ईआरओ और एईआरओ द्वारा मिलान किया जाएगा। इसमें मतदाता की पहचान, पता और अन्य विवरणों का सत्यापन
होगा। जिन मतदाताओं ने आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं, उनकी जांच की जाएगी। जहां दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध हों, वहां नोटिस देकर अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी। ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नागरिक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए दावा एवं आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। यह एसआईआर का महत्वपूर्ण चरण होता है।जरूरत पड़ने पर यदि किसी केस में रिकॉर्ड संबंधी विसंगति होगी। वहां बीएलओ घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे। सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।