सुखबीर के नजदीकी सतिंदर कोहली गिरफ्तार: 328 स्वरूप चोरी मामले में दर्ज है केस, पंजाब की सियासत गरमाई
सतिंदर कोहली पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूप चोरी होने के मामले में केस दर्ज किया गया था। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पंचकूला से गिरफ्तार किया गया है।
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शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल से जुड़े पीए सतिंदर कोहली की गिरफ्तारी की खबर से पंजाब की राजनीति गरमा गई है। उनका नाम श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूप चोरी होने के मामले में सामने आया था और मामला दर्ज किया गया था।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियों ने सतिंदर कोहली को पंचकूला से गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और पंथक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, सतिंदर कोहली लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर थे। उन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन में संलिप्तता के आरोप बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर एजेंसियों ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। हालांकि, गिरफ्तारी के मामले में अभी तक किसी एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
एसजीपीसी से जुड़े रहे, करोड़ों के लेन-देन की जांच
सूत्र बताते हैं कि सतिंदर कोहली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से भी जुड़े रहे हैं और वे कथित तौर पर सालाना एक करोड़ रुपये तक का पारिश्रमिक लेते थे। इसके अलावा, वे सुखबीर सिंह बादल से संबंधित कंपनियों के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। जांच एजेंसियां अब इन सभी वित्तीय संबंधों, आय के स्रोतों और लेन-देन की गहन जांच कर रही हैं।
सुखबीर बादल का नाम जुड़ने से मामला और संवेदनशील
इस पूरे घटनाक्रम में सुखबीर सिंह बादल का नाम सामने आने से मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पंथक और सियासी राजनीति में सुखबीर बादल एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। ऐसे में उनके करीबी माने जाने वाले व्यक्ति की गिरफ्तारी ने सियासी समीकरणों को हिला दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान भी सतिंदर कोहली को लेकर सार्वजनिक मंच से टिप्पणी कर चुके हैं, जिसे अब इस कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
अकाली दल और एसजीपीसी में बेचैनी
गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद शिरोमणि अकाली दल और एसजीपीसी से जुड़े नेताओं में साफ बेचैनी देखी जा रही है। अकाली दल के कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि विरोधी दलों का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी जांच से ऊपर नहीं रखा जा सकता।