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Punjab: 13 लाख की रिश्वत मामले में दो ठेकेदार समेत तीन पकड़े, सीबीआई ने पिता-पुत्र को लिया रिमांड पर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 13 May 2026 08:36 AM IST
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सार

सीबीआई ने सोमवार रात मोहाली और मलोट में छापा मारा था। मोहाली में विजिलेंस का दफ्तर सील कर दिया था। मंगलवार सुबह सीबीआई फिर विजिलेंस दफ्तर पहुंची और जांच शुरू कर कुछ रिकॉर्ड जब्त कर लिए थे। बता दें, यह मामला पंजाब के एक राज्य कर अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। 

Three Arrested Including Two Contractors in 13 Lakh Bribery Case CBI Takes Father-Son Duo into Remand
आरोपियों को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाती सीबीआई। - फोटो : संवाद
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विस्तार

विजिलेंस में लंबित शिकायत बंद कराने के बदले 13 लाख रुपये की रिश्वत मामले में सीबीआई ने ठेकेदार पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। 

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तीनों को सोमवार को चंडीगढ़ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सीबीआई ने पिता-पुत्र को तीन दिन के रिमांड पर लिया है जबकि तीसरे आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले में पंजाब डीजीपी विजिलेंस के रीडर ओपी राणा की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। ओपी राणा फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
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सीबीआई ने सोमवार रात मोहाली और मलोट में छापा मारा था। मोहाली में विजिलेंस का दफ्तर सील कर दिया था। मंगलवार सुबह सीबीआई फिर विजिलेंस दफ्तर पहुंची और जांच शुरू कर कुछ रिकॉर्ड जब्त कर लिए थे। बता दें, यह मामला पंजाब के एक राज्य कर अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। 

शिकायतकर्ता के अनुसार ठेकेदार विकास उर्फ विक्की गोयल और उसका बेटा राघव गोयल विजिलेंस में लंबित शिकायत बंद करवाने के बदले 20 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। आरोपियों ने खुद को पंजाब विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारियों, खासकर डीजीपी विजिलेंस के रीडर ओपी राणा का करीबी बताते हुए मामला निपटाने का भरोसा दिया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को पंजाब पुलिस की ओर से सुरक्षाकर्मी उपलब्ध करवाए गए थे। एके-47 से लैस सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीबीआई अब पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।

एसटीओ के खिलाफ थी भ्रष्टाचार की शिकायत

जिस रिश्वत कांड में सीबीआई ने आरोपियों को दबोचा है, वह मामला दरअसल पंजाब के एक स्टेट टैक्स अफसर (एसटीओ) से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार इस अफसर पर एक फर्म की टैक्स सेटलमेंट के मामले में भ्रष्टाचार का आरोप है। इस अफसर की शिकायत विजिलेंस ब्यूरो को दी गई थी। बिचौलिये विकास और राघव गोयल ने इस अफसर से उनकी लंबित शिकायत को बंद करवाने के एवज में 20 लाख रुपये मांगे थे। इसी तरह अन्य आरोपियों की डील भी बिचौलियों ने मुख्य आरोपी रीडर से करवानी थी।

13 लाख में तय हुई थी डील

जांच के दौरान सामने आया है कि पहले 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, मगर बाद में सौदा 13 लाख रुपये में तय हुआ। साथ ही फरार चल रहे रीडर ओपी राणा के लिए एक महंगा मोबाइल फोन भी मांगा गया था। शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया गया था कि रकम और मोबाइल मिलने के बाद लंबित शिकायत बंद करवा दी जाएगी। चंडीगढ़ के पांच सितारा होटल में रिश्वत की राशि का लेनदेन होना था। सूचना मिलने पर सीबीआई भी होटल पहुंची, मगर उससे पहले ही आरोपी वहां से फरार हो गए। आरोप है कि वहां मौजूद हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें कार्रवाई की सूचना दे दी थी। इसके बाद सीबीआई टीम ने पीछा कर पंजाब-हरियाणा सीमा पर अंबाला के पास राघव गोयल, विकास गोयल और दो सुरक्षाकर्मियों को पकड़ लिया। हालांकि ओपी राणा अब भी फरार है।

इस बीच सीबीआई ने 11 मई को चंडीगढ़ में जाल बिछाकर कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी अंकित वाधवा को शिकायतकर्ता से चार लाख रुपये नकद और मोबाइल फोन लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि नौ लाख रुपये आरोपियों के मलोट स्थित निवास से बरामद किए गए।

कैश-कागजात बरामद

जांच एजेंसी ने मलोट स्थित राघव और विकास गोयल के ठिकानों तथा चंडीगढ़ में ओपी राणा के आवास पर छापा मारा। इस दौरान करीब नौ लाख रुपये नकद और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि विजिलेंस मामलों से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान ओपी राणा और निजी आरोपियों के बीच हो रहा था।

विजिलेंस से जुड़े लंबित मामलों में चल रहा डील का खेल

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के मुख्यालय में सोमवार देररात लाखों रुपये की रिश्वत मामले में सीबीआई की दबिश ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिश्वत लेने का मुख्य आरोपी विजिलेंस ब्यूरो के डीजीपी-एवं-मुख्य निदेशक डॉ. शरत सत्य चौहान के रीडर ओपी राणा को बनाया गया है जबकि दो बिचौलियों समेत एक अन्य भी इस मामले में आरोपी हैं।

इस मामले में सीबीआई ने बठिंडा के मलोट (बिचौलियों के घर) और मोहाली (विजिलेंस ब्यूरो मुख्यालय) में जो दबिश दी, उसमें कुछ ऐसी संवदेनशील जानकारियां व दस्तावेज सीबीआई को मिले हैं जो इस बात को पुख्ता करते हैं कि विजिलेंस से जुड़े जांच संबंधी कई लंबित मामलों में डील कर उन्हें निपटाने का खेल चल रहा है। इस खेल में विजिलेंस के कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं।
विजिलेंस ब्यूरो के कार्यालय और बिचौलियों के घर को सील कर जब जांच की गई तो सीबीआई को यह मालूम चला कि डीजीपी के रीडर ओपी राणा ने बिचौलियों के साथ विजिलेंस जांच से जुड़े लंबित मामलों के संबंध में संवेदनशील जानकारियां साझा की है। जिसमें संभावित अवैध लेनदेन का गठजोड़ और अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी शामिल है।

सूत्र बताते हैं कि विजिलेंस ब्यूरो में कई नेताओं, कारोबारियों, अफसरों व अन्य निजी लोगों के खिलाफ विभिन्न आरोपों में जांच लंबित है। रीडर ने बिचौलियों से उन आरोपियों की जानकारियां साझा कीं जिनके खिलाफ लंबे समय से जांच चल रही है। बिचौलियों को इन्हीं आरोपियों से संपर्क करना था और उनकी विजिलेंस जांच खत्म करवाने के लिए उनसे लाखों रुपये रिश्वत की डील करनी थी। बिचौलियों के पास विजिलेंस ब्यूरो की ऐसी संवेदनशील जानकारियां व दस्तावेज मिलने से सीबीआई के अफसर भी दंग हैं।

एसटीओ के खिलाफ थी भ्रष्टाचार की शिकायत

जिस रिश्वत कांड में सीबीआई ने आरोपियों का दबोचा है, वह मामला दरअसल पंजाब के एक स्टेट टैक्स अफसर (एसटीओ) से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार इस अफसर के खिलाफ एक फर्म की टैक्स सेटलमेंट के मामले में भ्रष्टाचार का आरोप है। इस अफसर की शिकायत विजिलेंस ब्यूरो को दी गई थी। बिचौलिये विकास और राघव गोयल ने इस अफसर से उनकी लंबित शिकायत बंद करवाने की एवज में 20 लाख रुपये मांगे थे। इसी तरह अन्य आरोपियों की डील भी बिचौलियों ने मुख्य आरोपी रीडर से करवानी थी।

जांच की जद में आ सकते हैं कई अफसर

अभी तक की जांच में सीबीआई ने यह खुलासा किया है कि डीजीपी का रीडर बहुत भरोसे के साथ इस बात का दावा करता था कि लाखों रुपये रिश्वत मिलने के बाद लंबित विजिलेंस जांच बंद कर दी जाएगी। सूत्र दावा करते हैं कि लाखों रुपये की राशि केवल रीडर तक ही नहीं जानी थी बल्कि इसका हिस्सा अफसरों तक भी पहुंचना था। लिहाजा इस जांच की जद में कुछ अन्य लोग और विजिलेंस के अफसर भी आ सकते हैं।

बिचौलियों की सिक्योरिटी पर भी सवाल

लाखों की रिश्वतखोरी के जिस मामले में सीबीआई ने जिन बिचौलियों को पड़ा है, उनके पास सरकारी स्टेट सिक्योरिटी मौजूद थी। इतना ही नही सिक्योरिटी में तैनात पंजाब पुलिस के गनमैन एके-47 राइफल से लैस थे। सुरक्षा के घेरे वाला माहौल दिखाकर बिचौलिये विजिलेंस अफसरों से अपनी अच्छी जान-पहचान होने का दावा करते थे। इन बिचौलियों को यह सिक्योरिटी कैसे मिली, इसकी जांच भी सीबीआई करेगी।

सीबीआई को करेंगे सहयोग : डीजीपी

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डीजीपी डॉ. शरत सत्य चौहान के अनुसार सीबीआई द्वारा एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और इस संबंध में जांच जारी है। यदि इस जांच के दौरान विजिलेंस ब्यूरो के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का नाम सामने आता है, तो ब्यूरो की ओर से सीबीआई को पूरा सहयोग दिया जाएगा व कानूनी कार्रवाई में हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

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