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क्या फ्लोर टेस्ट में शामिल होंगे TVK MLA?: एक वोट से जीत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज; HC के आदेश को चुनौती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 13 May 2026 08:44 AM IST
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सार
तमिलनाडु की तिरुपत्तूर सीट से सिर्फ एक वोट से जीतने वाले टीवीके विधायक आर श्रीनिवासा सेतुपति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। मद्रास हाई कोर्ट ने उन्हें विधानसभा में किसी भी फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने से रोक दिया है, जिसे उन्होंने चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को तमिलनाडु के तिरुपत्तूर निर्वाचन क्षेत्र से टीवीके विधायक आर. श्रीनिवासा सेतुपति की याचिका पर सुनवाई करेगा। सेतुपति ने मद्रास हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें तमिलनाडु विधानसभा की किसी भी कार्यवाही या फ्लोर टेस्ट में शामिल होने से रोका गया है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच इस मामले को सुनेगी। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को चीफ जस्टिस के सामने इस मामले को जल्द सुनने की अपील की थी। इसके बाद शीर्ष अदालत इस पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
मद्रास हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने सेतुपति के खिलाफ यह आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, सेतुपति विश्वास मत, अविश्वास मत या ऐसी किसी भी वोटिंग में हिस्सा नहीं ले सकते जहां सदन की संख्या बल का परीक्षण होता हो। यह आदेश पूर्व मंत्री और डीएमके नेता केआर पेरियाकरुप्पन की याचिका पर आया है। पेरियाकरुप्पन इस चुनाव में सेतुपति से सिर्फ एक वोट के अंतर से हार गए थे।
एक वोट से मिली थी जीत
चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, सेतुपति को 83,365 वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले। पेरियाकरुप्पन ने गिनती की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर सीट का एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर के पास वाली तिरुपत्तूर सीट पर भेज दिया गया था। वहां इसे वापस भेजने के बजाय खारिज कर दिया गया।
ये भी पढे़ं: बंगाल वाली रणनीति से पंजाब फतह?: नशा और राज्य की सुरक्षा को मुद्दा बनाएगी भाजपा, जून में ही मिल जाएंगे प्रभारी
हाई कोर्ट ने इसे एक अजीब संवैधानिक स्थिति माना है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ वोटों की गिनती का सामान्य विवाद नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का मामला है। कोर्ट के अनुसार, जिस चुनाव का फैसला सिर्फ एक वोट से हुआ हो, वहां हर एक वोट बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, दो सरकारी स्रोतों के बीच ईवीएम के 18 वोटों का अंतर भी सामने आया है। हाई कोर्ट ने माना कि इतनी कम जीत के अंतर को देखते हुए इन मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग ने किया याचिका का विरोध
हाई कोर्ट ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे गिनती से जुड़े सभी रिकॉर्ड, पोस्टल बैलेट और वीडियो फुटेज सुरक्षित रखें। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने सेतुपति के चुनाव को रद्द नहीं किया है। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने इस याचिका का विरोध किया। आयोग का कहना है कि नतीजे घोषित होने के बाद किसी भी विवाद का निपटारा केवल 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के तहत चुनाव याचिका के जरिए ही हो सकता है।
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हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
मद्रास हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने सेतुपति के खिलाफ यह आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, सेतुपति विश्वास मत, अविश्वास मत या ऐसी किसी भी वोटिंग में हिस्सा नहीं ले सकते जहां सदन की संख्या बल का परीक्षण होता हो। यह आदेश पूर्व मंत्री और डीएमके नेता केआर पेरियाकरुप्पन की याचिका पर आया है। पेरियाकरुप्पन इस चुनाव में सेतुपति से सिर्फ एक वोट के अंतर से हार गए थे।
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एक वोट से मिली थी जीत
चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, सेतुपति को 83,365 वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले। पेरियाकरुप्पन ने गिनती की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिवगंगा जिले की तिरुपत्तूर सीट का एक पोस्टल बैलेट गलती से वेल्लोर के पास वाली तिरुपत्तूर सीट पर भेज दिया गया था। वहां इसे वापस भेजने के बजाय खारिज कर दिया गया।
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हाई कोर्ट ने इसे एक अजीब संवैधानिक स्थिति माना है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ वोटों की गिनती का सामान्य विवाद नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का मामला है। कोर्ट के अनुसार, जिस चुनाव का फैसला सिर्फ एक वोट से हुआ हो, वहां हर एक वोट बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, दो सरकारी स्रोतों के बीच ईवीएम के 18 वोटों का अंतर भी सामने आया है। हाई कोर्ट ने माना कि इतनी कम जीत के अंतर को देखते हुए इन मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग ने किया याचिका का विरोध
हाई कोर्ट ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे गिनती से जुड़े सभी रिकॉर्ड, पोस्टल बैलेट और वीडियो फुटेज सुरक्षित रखें। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने सेतुपति के चुनाव को रद्द नहीं किया है। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने इस याचिका का विरोध किया। आयोग का कहना है कि नतीजे घोषित होने के बाद किसी भी विवाद का निपटारा केवल 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के तहत चुनाव याचिका के जरिए ही हो सकता है।
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