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ग्रेट निकोबार परियोजना: जयराम रमेश ने मंत्री जुएल ओराम को लिखा पत्र, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 13 May 2026 10:33 AM IST
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सार

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने  जनजातीय  मंत्री जुएल ओरम को पत्र लिखा है। इस पत्र में  उन्होंने ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी खबर  

Great Nicobar Project: Jairam Ramesh writes to Minister Jual Oram, alleging violation of tribal rights
जयराम रमेश - फोटो : एएनआई
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विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में आदिवासी समुदायों के अधिकारों के घोर उल्लंघन का मुद्दा उठाया और तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की।

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उन्होंने लिखा, 'केंद्र सरकार की ओर से 1 मई, 2026 को जारी ग्रेट निकोबार परियोजना संबंधी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQ) में कहा गया है कि 'ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी वैधानिक प्रक्रियाओं और नीतिगत सुरक्षा उपायों का विधिवत पालन किया गया है। जरावा नीति, 2004 और शोम्पेन नीति, 2015 के अनुरूप, भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और अन्य हितधारकों सहित सक्षम अधिकारियों और संबंधित विशेषज्ञों के साथ आवश्यक परामर्श किए गए थे।' यह पूरी तरह से गलत है।'
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कांग्रेस नेता ने क्या मांग की है?
कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में मांग की है कि जनजातीय मामलों का मंत्रालय, वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में, ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के मामले में आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उस ऐतिहासिक कानून के तहत उचित प्रक्रियाओं के स्पष्ट उल्लंघन का गंभीरता से संज्ञान ले और तत्काल विश्वसनीय  कार्रवाई करे।


उन्होंने बताया कि

  • ग्राम सभा को अनिवार्य रूप से  उन वन भूमियों के डायवर्जन के किसी भी प्रस्ताव पर विचार करना होगा जिनमें आदिवासी समुदाय रहते हैं।
  • यह प्रमाणित करना होगा कि एफआरए, 2006 के तहत उनके दावों का निपटारा हो गया है।
  •  उसके बाद ही ऐसी वन भूमियों के डायवर्जन के लिए सहमति देनी होगी। यदि वास्तव में यही उसका निर्णय है।

 सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अप्रैल, 2023 के नियमगिरि फैसले में कहा था कि एफआरए, 2006 के तहत ऐसी सहमति अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि  ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए 13,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के डायवर्जन के संबंध में, जिसमें निकोबारी और शोम्पेन बस्तियों की पारंपरिक, पैतृक भूमि शामिल है। द्वीप प्रशासन ने 12 अगस्त, 2022 को कैंपबेल बे, लक्ष्मी नगर और गोविंद नगर में बस्ती समुदायों की ग्राम सभाओं के आयोजन की बात स्वीकार की है।

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 यह दावा मानवाधिकार अधिनियम का उल्लंघन
उन्होंने लिखा, ' यह दावा मानवाधिकार अधिनियम, 2006 का उल्लंघन है। कोई भी एक व्यक्ति मानवाधिकार अधिनियम, 2006 में दिए गए अधिकारों के हकदार पूरे समुदाय की ओर से सहमति नहीं दे सकता। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अध्यक्ष ने स्वयं 22 नवंबर, 2022 को आपके कार्यालय सहित विभिन्न अधिकारियों को पत्र लिखकर एनओसी वापस ले ली थी। हालांकि, इस गैर-कानूनी एनओसी को अभी भी निकोबारी लोगों की सहमति के रूप में उद्धृत किया जा रहा है।

राहुल गांधी के दौरे से सरकार घबराहट में
विपक्षी दल ने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की हाल ही में ग्रेट निकोबार यात्रा के बाद मोदी सरकार घबरा गई है।  इसके साथ ही नुकसान को नियंत्रित करने के प्रयास में लगी हुई है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ग्रेट निकोबार की अपनी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कैम्पबेल बे में ग्रेट निकोबार परियोजना देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक है।'


केंद्र ने 1 मई को अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQ) के उत्तरों सहित एक विस्तृत बयान जारी किया। सरकार के बयान में कहा गया है, 'ग्रेट निकोबार परियोजना अंडमान सागर में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने की एक रणनीतिक पहल है। इसका उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास और पर्यावरण संबंधी सुनियोजित उपायों के बीच संतुलन स्थापित करना है। स्वदेशी समुदायों का संरक्षण इसकी योजना का मुख्य केंद्र है।'



 

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