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पंजाब में निखरेगी शहरों की फिजा: विकसित होंगे 650 शहरी सूक्ष्म वन, पहली बार न्यायिक परिसरों में भी बनेंगे
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 12 Jun 2026 01:17 PM IST
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सार
पंजाब वन विभाग की ओर से इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इस योजना का मकसद शहरों में एक ऑक्सी वन की तरह इन्हें तैयार करना ताकि शहरी वातारण में सुधार हो सके।
शहरी वन
- फोटो : अमर उजाला/फाइल
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विस्तार
पंजाब में पहली बार जापानी तकनीक से शहरी सूक्ष्म वन विकसित किए जाएंगे। शहरों में वन क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में यह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। सूबे में इस विशेष तकनीक की मदद से 650 वन तैयार होंगे।
एक वन का दायरा 300 वर्ग मीटर होगा। यह वन शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, औद्योगिक इकाइयों और न्यायिक परिसरों में बनाए जाएंगे। सरकार ने हर जिले के लिए लक्ष्य तय कर दिया है।
पंजाब वन विभाग की ओर से इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इस योजना का मकसद शहरों में एक ऑक्सी वन की तरह इन्हें तैयार करना ताकि शहरी वातारण में सुधार हो सके। इससे जैव विविधता के पुनर्सृजन में भी मदद मिलेगी। इस विशेष तकनीक के तहत 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 से 40 प्रजातियों के 400 से 500 पौधे लगाए जाएंगे।
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इस योजना के तहत गुरदासपुर डिवीजन में 25, अमृतसर में 48, जालंधर में 82, बठिंडा में 56, मुक्तसर में 42, फिरोजपुर में 41, पठानकोट में 10, दसूआ में 38, होशियारपुर में 53, रूपनगर में 34, मोहाली में 23, गढ़शंकर में 40, संगरूर में 28, पटियाला में 35, मानसा में 24 और लुधियाना डिवीजन में 71 शहरी सूक्ष्म वन बनेंगे। सभी क्षेत्रों में इन सूक्ष्म वनों के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। पहली बार न्यायिक परिसरों को वन विभाग की किसी योजना में शामिल किया गया है।
एक वन का दायरा 300 वर्ग मीटर होगा। यह वन शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, औद्योगिक इकाइयों और न्यायिक परिसरों में बनाए जाएंगे। सरकार ने हर जिले के लिए लक्ष्य तय कर दिया है।
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पंजाब वन विभाग की ओर से इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इस योजना का मकसद शहरों में एक ऑक्सी वन की तरह इन्हें तैयार करना ताकि शहरी वातारण में सुधार हो सके। इससे जैव विविधता के पुनर्सृजन में भी मदद मिलेगी। इस विशेष तकनीक के तहत 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 से 40 प्रजातियों के 400 से 500 पौधे लगाए जाएंगे।
कम दूरी पर लगाए जाएंगे पाैधे
ये ऐसे पौधे होंगे जो बेहद कम दूरी पर लगाए जाएंगे ताकि वन का घनत्व क्षेत्र अधिक हो सके। विभिन्न वनस्पतियों की प्रजातियों के साथ-साथ इनमें फलों के पौधे भी होंगे। विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक घनत्व वाले वनों में पक्षियों, कीट-पतंगों व छोटे जानवरों का बसेरा होना लगता है जिससे जैव विविधता में सुधार होता है।इस योजना के तहत गुरदासपुर डिवीजन में 25, अमृतसर में 48, जालंधर में 82, बठिंडा में 56, मुक्तसर में 42, फिरोजपुर में 41, पठानकोट में 10, दसूआ में 38, होशियारपुर में 53, रूपनगर में 34, मोहाली में 23, गढ़शंकर में 40, संगरूर में 28, पटियाला में 35, मानसा में 24 और लुधियाना डिवीजन में 71 शहरी सूक्ष्म वन बनेंगे। सभी क्षेत्रों में इन सूक्ष्म वनों के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। पहली बार न्यायिक परिसरों को वन विभाग की किसी योजना में शामिल किया गया है।