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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: शराब से तौबा करें, वजन पर काबू रखें; गंभीर सिरोसिस में भी संभल सकता है लिवर

Tue, 28 Jul 2026 09:20 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 28 Jul 2026 09:20 AM IST
सार

पीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अजय दुसेजा ने बताया कि जिन मरीजों ने शराब पूरी तरह छोड़ दी, शरीर का कम से कम 10 प्रतिशत वजन घटाया और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा, उनमें लिवर के दोबारा बेहतर होने की संभावना सबसे अधिक रही।

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World Hepatitis Day Give up alcohol keep weight in check liver can recover even from severe cirrhosis
लिवर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

लिवर की बीमारी को अक्सर तब गंभीरता से लिया जाता है, जब सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति सामने आ जाती है। पीजीआई के विशेषज्ञों की नई रिसर्च से उम्मीद जगी है कि सही इलाज के साथ यदि मरीज शराब छोड़ दे, वजन घटाए और शुगर नियंत्रित रखे तो गंभीर लिवर सिरोसिस में भी लिवर की कार्यक्षमता दोबारा बेहतर हो सकती है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल हेपेटोलॉजी में जुलाई 2026

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में प्रकाशित हुआ है।

अक्तूबर 2019 से मार्च 2025 के बीच किए गए इस अध्ययन में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी के कारण गंभीर लिवर सिरोसिस से पीड़ित 344 मरीजों का फॉलोअप किया गया। इनमें 64 मरीज (18.6 प्रतिशत) ऐसे मिले, जिनमें इलाज के साथ जीवनशैली में बदलाव करने पर लिवर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। चिकित्सकीय भाषा में इसे रीकंपेंसेशन कहा जाता है। इसका अर्थ है कि जिन मरीजों में पहले पेट में पानी भरना, बार-बार खून की उल्टी या भ्रम जैसी गंभीर जटिलताएं थीं, उनमें ये समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो गईं और लिवर पहले की तुलना में बेहतर तरीके से काम करने लगा।

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जीवनशैली में बदलाव बना सबसे बड़ा इलाज
पीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अजय दुसेजा ने बताया कि जिन मरीजों ने शराब पूरी तरह छोड़ दी, शरीर का कम से कम 10 प्रतिशत वजन घटाया और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा, उनमें लिवर के दोबारा बेहतर होने की संभावना सबसे अधिक रही। जिन मरीजों में भोजन नली (इसोफेगस) की बड़ी वैरिक्स (सूजी हुई नसें) नहीं थीं, उनमें भी सुधार की संभावना अधिक देखी गई।

ब्लड टेस्ट से साबित हुआ शराब छोड़ना
शोध की खास बात यह रही कि मरीजों के केवल दावे पर भरोसा नहीं किया गया। शोधकर्ताओं ने फॉस्फेटिडाइलएथेनॉल नामक विशेष ब्लड टेस्ट के जरिये वैज्ञानिक रूप से पुष्टि की कि मरीज वास्तव में शराब से दूर है या नहीं। इससे अध्ययन के निष्कर्ष अधिक विश्वसनीय बने। शोध में यह भी सामने आया कि जो मरीज शराब पीते रहे, उनमें मृत्यु का खतरा काफी अधिक था। फॉलोअप के दौरान 61 मरीजों की मृत्यु हुई, 11 मरीजों का लिवर प्रत्यारोपण करना पड़ा और पांच मरीजों में लिवर कैंसर विकसित हुआ। वहीं जिन मरीजों में रीकंपेंसेशन हुआ, उनकी जीवित रहने की संभावना बेहतर रही।

लिवर रोगों से बचाव के लिए ये जरूरी
शोधकर्ताओं ने कहा कि लिवर रोगों से बचाव के लिए हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण, समय पर हेपेटाइटिस-बी और सी की जांच, शराब से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इस अध्ययन में डॉ. मधुमिता प्रेमकुमार, डॉ. अंचल संधू, डॉ. प्रेरणा शर्मा, डॉ. अजय दुसेजा, डॉ. संजय भडाडा और डॉ. आनंद कुलकर्णी सहित कई विशेषज्ञों ने योगदान दिया।

हेपेटाइटिस : जरूरी बातें
हेपेटाइटिस लिवर की सूजन है, जिसके पांच प्रकार—ए, बी, सी, डी और ई हैं। बी और सी सबसे खतरनाक हैं क्योंकि ये लिवर सिरोसिस और कैंसर का कारण बन सकते हैं। हेपेटाइटिस-बी से बचाव का टीका उपलब्ध है जबकि हेपेटाइटिस-सी का समय पर जांच और दवाओं से इलाज संभव है। संक्रमण संक्रमित खून, असुरक्षित सुई, असुरक्षित यौन संबंध और मां से बच्चे में फैल सकता है।
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