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Jalandhar News: टावर से उतरे बुजुर्गों को 13 दिन बीत गए, प्रशासन ने नहीं पूरा किया वादा
Sun, 25 Oct 2026 12:00 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पठानकोट। शाहपुरकंडी बैराज संघर्ष विस्थापित कमेटी के दो बुजुर्ग सदस्यों का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। 87 वर्षीय शरम सिंह और 82 वर्षीय कुलविंदर सिंह ने टावर पर चढ़कर विरोध जताया था। प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित नीचे उतार लिया, पर उनके साथ किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं।
संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष दयाल सिंह के नेतृत्व में प्रभावित परिवार 15 वर्षों से अधिक समय से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। शाहपुरकंडी बैराज परियोजना के तहत पावर हाउस के निर्माण के दौरान 79 परिवारों की 3500 किले जमीन अधिग्रहित की गई थी। प्रभावित परिवारों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही परिवार के सदस्यों को नौकरी दी गई। कमेटी आरोप लगाती है कि जमीन रजिस्ट्री में कथित अनियमितताओं के बावजूद अन्य लोगों को सरकारी नौकरी मिल गई। वास्तविक प्रभावित परिवार आज भी अपने हक के लिए भटक रहे हैं। यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।
आश्वासन के बाद भी इंतजार : टावर से नीचे उतरे करीब 13 दिन बीत चुके हैं। पंजाब के मुख्य सचिव या सरकार के किसी अन्य प्रतिनिधि के साथ संघर्ष कमेटी की बैठक नहीं हो सकी।
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पठानकोट। शाहपुरकंडी बैराज संघर्ष विस्थापित कमेटी के दो बुजुर्ग सदस्यों का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। 87 वर्षीय शरम सिंह और 82 वर्षीय कुलविंदर सिंह ने टावर पर चढ़कर विरोध जताया था। प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित नीचे उतार लिया, पर उनके साथ किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं।
संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष दयाल सिंह के नेतृत्व में प्रभावित परिवार 15 वर्षों से अधिक समय से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। शाहपुरकंडी बैराज परियोजना के तहत पावर हाउस के निर्माण के दौरान 79 परिवारों की 3500 किले जमीन अधिग्रहित की गई थी। प्रभावित परिवारों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही परिवार के सदस्यों को नौकरी दी गई। कमेटी आरोप लगाती है कि जमीन रजिस्ट्री में कथित अनियमितताओं के बावजूद अन्य लोगों को सरकारी नौकरी मिल गई। वास्तविक प्रभावित परिवार आज भी अपने हक के लिए भटक रहे हैं। यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।
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आश्वासन के बाद भी इंतजार : टावर से नीचे उतरे करीब 13 दिन बीत चुके हैं। पंजाब के मुख्य सचिव या सरकार के किसी अन्य प्रतिनिधि के साथ संघर्ष कमेटी की बैठक नहीं हो सकी।
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