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दहशत: पंजाब से यूरोप-अमेरिका तक लॉरेंस-गोल्डी सिंडिकेट का खौफ, अमीर परिवार का बेटा, जिसने चुना अपराध का रास्ता

Mon, 13 Jul 2026 01:38 PM IST
Sharukh Khan सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 13 Jul 2026 01:38 PM IST
सार

पंजाब से यूरोप-अमेरिका तक लॉरेंस-गोल्डी सिंडिकेट का खौफ फैला है। लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ की जोड़ी अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का सबसे चर्चित चेहरा बन गई है। हत्या, रंगदारी, ड्रग्स, हथियार तस्करी और वैश्विक नेटवर्क ने कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

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Lawrence Bishnoi and Goldy Brar Syndicate Built a Global Crime Network
Lawrence Bishnoi - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब की छात्र राजनीति से शुरू हुई दो युवाओं की दोस्ती आज अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध की सबसे चर्चित साझेदारियों में गिनी जाती है। साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और विदेशों में सक्रिय उसका सबसे भरोसेमंद सहयोगी गोल्डी बराड़ वर्षों से भारतीय जांच एजेंसियों के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा और यूरोप की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। 
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हत्या, टारगेट किलिंग, रंगदारी, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, हवाला, सुपारी किलिंग, एन्क्रिप्टेड संचार तकनीक और विदेशों में फैले सहयोगियों के दम पर इस सिंडिकेट ने भारत की सीमाओं से बाहर भी अपना प्रभाव स्थापित किया। 
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हाल के वर्षों में विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों द्वारा दायर आरोपपत्रों, जांच रिपोर्टों और संयुक्त अभियानों के बाद इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप, आर्थिक ढांचे और संचालन प्रणाली से जुड़े कई बड़े दावे सामने आए हैं। हालांकि इन मामलों में कई आरोप न्यायालयों में विचाराधीन हैं और अंतिम निर्णय अदालतों द्वारा ही किया जाएगा।
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अमीर परिवार का बेटा, जिसने चुना अपराध का रास्ता
लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 12 फरवरी 1993 को पंजाब के फाजिल्का जिले के दुतारावाली गांव में एक संपन्न जमींदार परिवार में हुआ। उसका बचपन किसी सामान्य अपराधी जैसा नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत वातावरण में बीता। पिता हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल रहे और बाद में खेती करने लगे। 

 

परिवार के पास सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि और करोड़ों रुपये की संपत्ति बताई जाती है। शुरुआती शिक्षा अबोहर में हुई और बाद में वह चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज तथा पंजाब विश्वविद्यालय पहुंचा, जहां उसने कानून की पढ़ाई की। यहीं से छात्र राजनीति में उसकी सक्रियता बढ़ी और धीरे-धीरे उसका झुकाव अपराध की दुनिया की ओर होने लगा।

छात्र राजनीति में हुई गोल्डी बराड़ से मुलाकात
पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान लॉरेंस ने स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी (सोपू) से जुड़कर छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाई। इसी दौरान उसकी मुलाकात सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ से हुई। गोल्डी के परिवार की पृष्ठभूमि भी पुलिस सेवा से जुड़ी रही। उसके पिता पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे। छात्र राजनीति के दौरान दोनों की दोस्ती गहरी होती गई और बाद में यही जोड़ी देश-विदेश के सबसे चर्चित अपराध सिंडिकेट की रीढ़ बन गई।

छात्र चुनाव से शुरू हुआ अपराध का सफर
कॉलेज चुनावों की प्रतिद्वंद्विता के दौरान लॉरेंस पर मारपीट, हत्या के प्रयास और आगजनी जैसे मामले दर्ज होने लगे। इसके बाद वह धीरे-धीरे संगठित अपराध की ओर बढ़ता गया। वर्ष 2014 में राजस्थान पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। तब से वह विभिन्न हाई सिक्योरिटी जेलों में बंद है। फिलहाल वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, लेकिन जांच एजेंसियों का दावा है कि जेल में रहते हुए भी उसने अपना नेटवर्क सक्रिय बनाए रखा।

गोल्डी बना विदेश में बैठा मास्टरमाइंड
वर्ष 2021 में गोल्डी बराड़ भारत छोड़कर कनाडा पहुंच गया। इसके बाद विदेशों में बैठकर उसने पूरे सिंडिकेट का संचालन संभाल लिया। भारतीय और विदेशी जांच एजेंसियों के अनुसार जेल के भीतर से लॉरेंस रणनीति तय करता था, जबकि विदेशों में मौजूद गोल्डी बराड़ उसे अमली जामा पहनाता था। शूटरों की भर्ती, हथियारों की व्यवस्था, रंगदारी वसूली, सुपारी किलिंग और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पूरा संचालन कथित रूप से गोल्डी के जिम्मे था।

देश के सबसे बड़े अपराध सिंडिकेट का निर्माण
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई ने पारंपरिक गैंग की बजाय एक विकेंद्रीकृत अपराध सिंडिकेट विकसित किया। उसने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई प्रभावशाली गैंगों से गठजोड़ बनाया। दिल्ली में जितेंद्र गोगी गैंग, हरियाणा में काला जठेड़ी, पंजाब में लंबे समय तक जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क, राजस्थान में रोहित गोदारा तथा अन्य राज्यों के कई अपराधियों के साथ तालमेल बनाकर उसने ऐसा ढांचा तैयार किया, जिसमें हर क्षेत्र का अपराधी स्थानीय स्तर पर काम करता था, लेकिन बड़े फैसले साझा नेटवर्क के माध्यम से लिए जाते थे।

जेल से चलता था कथित कमांड सेंटर
जांच एजेंसियों के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई हाई सिक्योरिटी जेलों में बंद रहने के बावजूद तस्करी से पहुंचे मोबाइल फोन, इंटरनेट कॉलिंग, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लीकेशन और अन्य माध्यमों के जरिए अपने नेटवर्क से संपर्क बनाए रखता था। विदेशों में बैठे सहयोगियों तक निर्देश पहुंचते और वहां से स्थानीय ऑपरेटिव तथा शूटरों तक आदेश पहुंचाए जाते। यही कारण रहा कि जेल में रहते हुए भी गैंग लगातार सक्रिय बना रहा।

भारत से निकलकर कई देशों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार लॉरेंस-गोल्डी नेटवर्क ने कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, संयुक्त अरब अमीरात, अजरबैजान और ऑस्ट्रेलिया तक अपने संपर्क विकसित किए। कनाडा में रंगदारी, अमेरिका में ड्रग्स नेटवर्क, यूरोप में सुरक्षित ठिकाने और फर्जी दस्तावेज, दुबई के जरिए हवाला नेटवर्क तथा पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स की सप्लाई से जुड़े कई आरोप विभिन्न जांचों में सामने आए हैं। कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

कनाडा बना सबसे बड़ा विदेशी बेस
विदेशों में कनाडा को इस नेटवर्क का सबसे मजबूत केंद्र माना गया। जांच एजेंसियों के अनुसार गोल्डी बराड़ ने वहीं से पंजाबी समुदाय के कारोबारियों, बिल्डरों, ज्वैलर्स, कलाकारों और उद्योगपतियों को कथित रूप से रंगदारी की धमकियां दीं। कई मामलों में गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। सरे, ब्रैम्पटन, वैंकूवर, कैलगरी और एडमोंटन जैसे शहरों में भारतीय मूल के व्यापारियों को निशाना बनाने के आरोप भी जांच के दायरे में आए।

अमेरिका तक पहुंचा नेटवर्क
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क केवल रंगदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि ड्रग्स, हथियार तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग तक फैला हुआ था। दक्षिणी कैलिफोर्निया से कनाडा और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों तक मादक पदार्थ पहुंचाने के आरोप भी सामने आए। अमेरिकी अदालतों में दायर आरोपपत्रों के अनुसार नेटवर्क के कई सदस्यों के खिलाफ संगठित अपराध से जुड़े गंभीर मामले दर्ज किए गए।

यूरोप बना सुरक्षित ठिकाना
जांच एजेंसियों का दावा है कि यूरोप के कुछ देशों में इस नेटवर्क के सहयोगी फर्जी दस्तावेज, सुरक्षित ठिकाने और भागे हुए अपराधियों को संरक्षण उपलब्ध कराते थे। रोहित गोदारा जैसे आरोपितों की गतिविधियां भी विदेशों से संचालित होने के दावे विभिन्न जांचों में किए गए।

हाई-टेक तकनीक से चलता था नेटवर्क
इस सिंडिकेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तकनीकी क्षमता बताई जाती है। जांच एजेंसियों के अनुसार एन्क्रिप्टेड चैट एप्लीकेशन, इंटरनेट कॉलिंग, डार्क वेब, वीओआईपी और कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर संचार और आर्थिक लेनदेन किए जाते थे। इससे जांच एजेंसियों के लिए नेटवर्क तक पहुंचना कठिन हो जाता था।
 

रंगदारी बना सबसे बड़ा आर्थिक स्रोत
पंजाबी संगीत उद्योग, फिल्म कलाकार, बिल्डर, शराब कारोबारी, उद्योगपति और प्रवासी भारतीय कथित रूप से इस नेटवर्क के निशाने पर रहे। धमकी भरे कॉल, सोशल मीडिया संदेश, एन्क्रिप्टेड चैट और विदेशों से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप लगातार सामने आते रहे। रंगदारी न देने वालों पर फायरिंग और हमले किए जाने के भी कई मामले जांच का हिस्सा बने।

ड्रग्स, हथियार और हवाला का कथित गठजोड़
जांच एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क का एक बड़ा आर्थिक आधार ड्रग्स और हथियारों की तस्करी से जुड़ा था। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियार, समुद्री रास्तों से मादक पदार्थों की खेप, हवाला चैनलों के माध्यम से धन का लेनदेन तथा विदेशों में निवेश के आरोप कई जांचों में सामने आए हैं। एजेंसियों का कहना है कि ड्रग्स से अर्जित धन को हवाला और शेल कंपनियों के जरिए विभिन्न देशों में स्थानांतरित किया जाता था।

चर्चित हत्याओं से बढ़ा नेटवर्क का खौफ
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड, सलमान खान को दी गई धमकियां तथा उनके घर के बाहर हुई फायरिंग जैसी घटनाओं में इस नेटवर्क का नाम प्रमुखता से सामने आया। कई मामलों में विभिन्न आरोपियों के खिलाफ जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है।

प्रवासी पंजाबी समुदाय में फैला डर
कनाडा और अमेरिका में रहने वाले कई भारतीय मूल के कारोबारियों, बिल्डरों और कलाकारों ने धमकियां मिलने की शिकायतें दर्ज कराईं। ए.पी. ढिल्लों, गिप्पी ग्रेवाल और कॉमेडियन कपिल शर्मा से जुड़े प्रतिष्ठानों पर हमलों की घटनाओं ने भी प्रवासी भारतीय समुदाय में चिंता बढ़ाई। कई मामलों में स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तारियां भी कीं।

एफबीआई और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का शिकंजा
हाल के वर्षों में अमेरिकी न्याय विभाग, एफबीआई, कनाडा की आरसीएमपी तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई तेज की। कई देशों में संदिग्धों की गिरफ्तारियां हुईं और कई आरोपपत्र दाखिल किए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सिंडिकेट के आर्थिक स्रोतों, ड्रग्स नेटवर्क, हवाला चैनलों और विदेशी संपर्कों की व्यापक जांच जारी है।

भारत, कनाडा और अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई–गोल्डी बराड़ नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा
भारत सरकार ने गोल्डी बराड़ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया है। वहीं हाल के समय में कनाडा और अमेरिका ने भी लॉरेंस बिश्नोई–गोल्डी बराड़ नेटवर्क के खिलाफ कई बड़े कानूनी और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार उसका संबंध प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन बीकेआई से है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गोल्डी बराड़ पर पंजाबी गायक मूसेवाला की हत्या का मास्टरमाइंड होने, पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटकों की तस्करी कराने, रंगदारी वसूलने तथा देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप हैं। कनाडा में 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी नेता की हत्या की जांच के दौरान कनाडाई और अमेरिकी जांच एजेंसियों ने अपनी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ नेटवर्क का उल्लेख किया है।

कनाडा ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी इकाई के रूप में सूचीबद्ध किया है। इस कार्रवाई के बाद कनाडा में गैंग से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियां फ्रीज करने, वित्तीय लेन-देन रोकने और नेटवर्क पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

अमेरिका का ऑपरेशन हार्ड बॉल
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए 50,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम घोषित किया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में बिश्नोई–बराड़ सिंडिकेट से जुड़े 50 से अधिक ठिकानों पर कार्रवाई की।

इस दौरान कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क पर शिकंजा कसने का दावा किया गया। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े नेटवर्क पर मादक पदार्थों (कोकीन और मेथामफेटामाइन) की तस्करी, रंगदारी, हत्या की साजिश और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।

इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ नेटवर्क अब केवल भारत की कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि भारत, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़ा नेटवर्क बन चुका है।
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