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जगरांव मार्कफेड कार्यालय में हंगामा: डल्ला के किसानों ने लगाया धरना, यूरिया न मिलने पर की नारेबाजी

संवाद न्यूज एजेंसी, जगरांव (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 02 Jan 2026 01:20 PM IST
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सार

धरनाकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक गांव डल्ला को यूरिया नहीं दिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों ने ऐलान किया कि चाय, लंच और डिनर भी धरनास्थल पर ही होगा और वे खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे।

Chaos at Jagroan Markfed office Farmers from Dalla staged protest
जगरांव मार्कफेड दफ्तर में किसानों का धरना - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शुक्रवार को कड़ाके की ठंड के बीच जगराओं स्थित मार्कफेड कार्यालय में गांव डल्ला के किसानों ने मैनेजर के दफ्तर के बाहर गद्दे बिछाकर धरना लगा दिया। किसानों ने पंजाब सरकार, स्थानीय विधायक और मार्कफेड मैनेजर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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धरने की अगुवाई कर रहे अकाली नेता चंद सिंह डल्ला ने आरोप लगाया कि गुरुवार को गांव डल्ला के लिए यूरिया (खाद) का ट्रक पहुंचा था, लेकिन जानबूझकर उसे सोसाइटी में उतारने के बजाय दूसरे गांव मल्ला भेज दिया गया। जब किसानों ने इसका विरोध किया तो मैनेजर ने बहाना बनाया कि ट्रक में यूरिया ड्राई नहीं थी।
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उन्होंने बताया कि संदेह होने पर गांव के कुछ युवकों ने ट्रक का पीछा किया, जहां ट्रक को गांव मल्ला की सोसाइटी में यूरिया उतारते हुए पकड़ा गया। चंद सिंह डल्ला ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है, क्योंकि गांव डल्ला के लोग आम आदमी पार्टी छोड़कर अकाली दल से जुड़े हुए हैं। 



उन्होंने कहा कि अकाली दल से जुड़ने की सजा हमारे गांव को दी जा रही है। धरनाकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक गांव डल्ला को यूरिया नहीं दिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों ने ऐलान किया कि चाय, लंच और डिनर भी धरनास्थल पर ही होगा और वे खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे।

दूसरी ओर, मार्कफेड जगराओं के मैनेजर जसवंत सिंह ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि ट्रक गांव डल्ला के रास्ते से ही गांव मल्ला की सोसाइटी गया था, क्योंकि उसकी डिलीवरी वहीं निर्धारित थी। उन्होंने दावा किया कि गांव डल्ला की सोसाइटी डिफॉल्टर घोषित है और पहले ही तीन ट्रकों का भुगतान बकाया है।

मैनेजर ने कहा कि यदि किसान बकाया राशि जमा कर देते हैं तो उन्हें यूरिया लेने में कोई परेशानी नहीं है। इस पर किसानों ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि बकाया की बात सही थी तो मैनेजर उन्हें पहले ही सूचित करता। मौके पर ही भुगतान कर ट्रक उतरवाया जा सकता था।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पुरानी सोसाइटी से करीब 13 लाख 90 हजार रुपये एक साल तक नहीं मांगे गए, लेकिन अब अकाली दल से लिंक रखने वाला प्रधान होने पर उनसे यूरिया के बदले नगद भुगतान की शर्त रखी जा रही है, जो सरासर भेदभाव है।
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