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Ludhiana: नशा बेचने से रोकने पर बवाल, मंदिर में घुसे हमलावर; हथियारों के बल पर जमकर मचाया उत्पात
Thu, 09 Jul 2026 11:40 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Published by: Nivedita
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:40 AM IST
सार
स्थानीय निवासी चंदरपाल ने आरोप लगाया कि इलाके में कुछ लोग लंबे समय से कथित रूप से नशा बेच रहे थे। वाल्मीकि समाज, मोहल्ला सुधार समिति के पदाधिकारियों और बुजुर्गों ने उन्हें कई बार ऐसा करने से रोका और युवाओं को नशे से दूर रखने की अपील की थी।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ताजपुर रोड स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में कथित नशा तस्करों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि करीब 20 से 25 हमलावरों ने मंदिर पर पथराव किया, मंदिर परिसर में घुसकर शीशे तोड़ दिए और हथियारों के बल पर जमकर उत्पात मचाया। हमले में 20 वर्षीय गौरव गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में चोट आई है और एक हाथ टूटने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद वाल्मीकि समाज और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। देर रात बड़ी संख्या में लोग थाना डिवीजन नंबर-7 के बाहर एकत्र हुए और धरना देकर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मामले में एससी/एसटी एक्ट और धार्मिक स्थल की बेअदबी से संबंधित धाराएं जोड़ने के साथ सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग उठाई।
स्थानीय निवासी चंदरपाल ने आरोप लगाया कि इलाके में कुछ लोग लंबे समय से कथित रूप से नशा बेच रहे थे। वाल्मीकि समाज, मोहल्ला सुधार समिति के पदाधिकारियों और बुजुर्गों ने उन्हें कई बार ऐसा करने से रोका और युवाओं को नशे से दूर रखने की अपील की थी। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 6 जुलाई को आरोपी बड़ी संख्या में कॉलोनी में पहुंचे और हमला कर दिया। इस दौरान मंदिर को भी निशाना बनाया गया तथा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ भी मारपीट की गई।
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वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है और वे भी उसी मुहिम के तहत अपने क्षेत्र को नशामुक्त रखने का प्रयास कर रहे थे। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद शुरुआती स्तर पर आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते लोगों को थाने के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा।
पुलिस ने घायल गौरव की शिकायत पर 25 से 30 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले के जांच अधिकारी थाना डिवीजन नंबर-7 के थानेदार चरनजीत सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच जारी है।
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घटना के बाद वाल्मीकि समाज और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। देर रात बड़ी संख्या में लोग थाना डिवीजन नंबर-7 के बाहर एकत्र हुए और धरना देकर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मामले में एससी/एसटी एक्ट और धार्मिक स्थल की बेअदबी से संबंधित धाराएं जोड़ने के साथ सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग उठाई।
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स्थानीय निवासी चंदरपाल ने आरोप लगाया कि इलाके में कुछ लोग लंबे समय से कथित रूप से नशा बेच रहे थे। वाल्मीकि समाज, मोहल्ला सुधार समिति के पदाधिकारियों और बुजुर्गों ने उन्हें कई बार ऐसा करने से रोका और युवाओं को नशे से दूर रखने की अपील की थी। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 6 जुलाई को आरोपी बड़ी संख्या में कॉलोनी में पहुंचे और हमला कर दिया। इस दौरान मंदिर को भी निशाना बनाया गया तथा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ भी मारपीट की गई।
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वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है और वे भी उसी मुहिम के तहत अपने क्षेत्र को नशामुक्त रखने का प्रयास कर रहे थे। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद शुरुआती स्तर पर आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते लोगों को थाने के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा।
पुलिस ने घायल गौरव की शिकायत पर 25 से 30 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले के जांच अधिकारी थाना डिवीजन नंबर-7 के थानेदार चरनजीत सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच जारी है।
नशा तस्करों की मुखबिरी के विवाद में दो पक्षों के 27 लोगों पर केस
लुधियाना के गांव चौंता में नशा तस्करों की कथित मुखबिरी को लेकर दो पक्षों के बीच हुए विवाद और पथराव के मामले में थाना कूमकलां पुलिस ने दोनों गुटों के 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उपद्रव, पथराव और शांति भंग करने सहित विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई थाना कूमकलां में तैनात एएसआई विजय कुमार की शिकायत पर की गई है।जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले पुलिस ने गांव में नशा तस्करी की शिकायतों के आधार पर कई स्थानों पर दबिश दी थी। इसके बाद जिन लोगों के यहां पुलिस कार्रवाई हुई, उन्होंने दूसरे पक्ष पर मुखबिरी करने का आरोप लगाया। इसी विवाद ने बाद में हिंसक रूप ले लिया और दोनों पक्षों के बीच ईंट-पत्थर चलने लगे। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि उनके खिलाफ पुलिस को झूठी जानकारी देकर कार्रवाई करवाई गई थी।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने थाना कूमकलां में शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए पप्पू सिंह ने निहंग जत्थेबंदियों से संपर्क किया। इसके बाद निहंग गांव पहुंचे, जहां ग्रामीणों के बीच पूरे घटनाक्रम पर चर्चा हुई। निहंग जत्थों ने पुलिस अधिकारियों से नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वे भी गांव में अपने स्तर पर नशा विरोधी अभियान चलाएंगे।
पप्पू सिंह का आरोप है कि सीआईए स्टाफ की टीम गांव पहुंची थी और सरपंच की मौजूदगी में उससे भी बातचीत की गई थी। इसके बाद पुलिस ने कथित नशा तस्करों के ठिकानों पर छापेमारी की। उनका कहना है कि इसी कार्रवाई के बाद मुखबिरी के शक में उनके घर पर हमला कर पथराव किया गया।
जांच अधिकारी एएसआई विजय कुमार ने बताया कि वह पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे, तभी थाना के मुख्य मुंशी से सूचना मिली कि गांव चौंता की फिरनी पर दो गुटों के बीच झड़प हो रही है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक दोनों पक्ष वहां से जा चुके थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर जमकर ईंट-पत्थर फेंके, जिससे आसपास रहने वाले लोगों, बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई।
पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दोनों पक्षों के 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान नशा तस्करी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाएगी। यदि किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।