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Mohali News: डेराबस्सी में एसटीपी प्लांट के दशकों पुराने पेड़ की कटाई, क्षेत्रवासियों में रोष
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डेराबस्सी। डेराबस्सी नगर परिषद के अधीन शिवपुरी कॉलोनी स्थित एसटीपी प्लांट में पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाईकोर्ट द्वारा पेड़ न काटने के स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद कॉलोनी में हरे-भरे और कई दशकों पुराने पेड़ों की कटाई कर दी गई। इस कार्रवाई से क्षेत्रवासियों में भारी रोष है और नगर परिषद की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि एसटीपी प्लांट परिसर में लगे पेड़ इलाके की हरियाली और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम थे। ये पेड़ न केवल छाया और शुद्ध हवा प्रदान करते थे, बल्कि गर्मी के मौसम में तापमान को नियंत्रित रखने में भी सहायक थे। लोगों का कहना है कि हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक लगा रखी है, इसके बावजूद नगर परिषद के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह कटाई करवाई गई।
कॉलोनीवासियों ने आरोप लगाया कि बिना किसी लिखित अनुमति और बिना पर्यावरण विभाग की स्वीकृति के पेड़ों की कटाई की जाना कानून का सीधा उल्लंघन है। लोगों का यह भी कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे किसी निजी लाभ की मंशा हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और वन विभाग का पक्ष
इस मामले में डेराबस्सी के एसडीएम अमित गुप्ता से बात करने पर उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच करवाई जाएगी। वहीं, डेराबस्सी के फॉरेस्ट ऑफिसर जय सिंह ने मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि नगर परिषद की ओर से पहले लिखित पत्र देकर पेड़ों की रिजर्व प्राइस निर्धारित करवाने की मांग की गई थी। इसी पत्र के आधार पर वन विभाग ने पेड़ों की रिजर्व प्राइस तय की, जिसके बाद नगर परिषद द्वारा बोली प्रक्रिया करवाई गई और बोली पूरी होने के बाद पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू किया गया।
हालांकि फॉरेस्ट ऑफिसर ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के मौजूदा आदेशों के अनुसार अब किसी भी स्थिति में पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती। सूचना मिलने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ों की कटाई का कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया।
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स्थानीय निवासियों ने बताया कि एसटीपी प्लांट परिसर में लगे पेड़ इलाके की हरियाली और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम थे। ये पेड़ न केवल छाया और शुद्ध हवा प्रदान करते थे, बल्कि गर्मी के मौसम में तापमान को नियंत्रित रखने में भी सहायक थे। लोगों का कहना है कि हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक लगा रखी है, इसके बावजूद नगर परिषद के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह कटाई करवाई गई।
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कॉलोनीवासियों ने आरोप लगाया कि बिना किसी लिखित अनुमति और बिना पर्यावरण विभाग की स्वीकृति के पेड़ों की कटाई की जाना कानून का सीधा उल्लंघन है। लोगों का यह भी कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे किसी निजी लाभ की मंशा हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और वन विभाग का पक्ष
इस मामले में डेराबस्सी के एसडीएम अमित गुप्ता से बात करने पर उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच करवाई जाएगी। वहीं, डेराबस्सी के फॉरेस्ट ऑफिसर जय सिंह ने मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि नगर परिषद की ओर से पहले लिखित पत्र देकर पेड़ों की रिजर्व प्राइस निर्धारित करवाने की मांग की गई थी। इसी पत्र के आधार पर वन विभाग ने पेड़ों की रिजर्व प्राइस तय की, जिसके बाद नगर परिषद द्वारा बोली प्रक्रिया करवाई गई और बोली पूरी होने के बाद पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू किया गया।
हालांकि फॉरेस्ट ऑफिसर ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के मौजूदा आदेशों के अनुसार अब किसी भी स्थिति में पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती। सूचना मिलने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ों की कटाई का कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया।