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ISB की सिल्वर जुबली: मोहाली में 808 पीजीपी ग्रेजुएट्स के लिए ग्रेजुएशन समारोह, 1117 जॉब ऑफर मिले
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Published by: Ankesh Kumar
Updated Thu, 09 Apr 2026 04:20 PM IST
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सार
आईएसबी पीजीपी प्रोग्राम की शुरुआत साल 2001 में की गई थी। यह अनुभव-प्राप्त प्रोफेशनल्स के लिए भारत का पहला एकवर्षीय, फुल-टाइम रेजिडेंशियल मैनेजमेंट प्रोग्राम है।
आईएसबी मोहाली में 25वीं बैच के स्नातक समारोह।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अपने प्रमुख पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीपी) की 25वीं बैच के स्नातक समारोह का आयोजन किया। हैदराबाद और मोहाली के परिसरों में आयोजित इस ग्रेजुएशन समारोह में 2026 पीजीपी बैच के 808 ग्रेजुएट्स को डिग्री वितरित की गईं। ग्रेजुएशन समारोह का उद्घाटन प्रोफेसर मदन पिलुटला, डीन, आईएसबी; राकेश भारती मित्तल, चेयरपर्सन, मोहाली कैंपस एडवाइजरी बोर्ड के नेतृत्व में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि फ्रैंसेस्का कॉर्नेली, डीन, कैलोग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी और वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।
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आईएसबी पीजीपी प्रोग्राम की शुरुआत साल 2001 में की गई थी। यह अनुभव-प्राप्त प्रोफेशनल्स के लिए भारत का पहला एकवर्षीय, फुल-टाइम रेजिडेंशियल मैनेजमेंट प्रोग्राम है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य बदलती व्यवसायिक जरूरतों के अनुरूप सशक्त और कारगर लर्निंग के माध्यम से भारत एवं विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए लीडर्स का विकास करना है। पीजीपी के 25 बैचों में इस प्रोग्राम द्वारा विभिन्न पृष्ठभूमियों और उद्योगों को 14,000 से अधिक प्रोफेशनल ग्रेजुएट हो चुके हैं।
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नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी के कैलोग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की डीन, फ्रैंसेस्का कॉर्नेली ने कहा कि इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस ग्रेजुएट्स का नया बैच एक परिवर्तनकारी समय में प्रोफेशनल दुनिया में प्रवेश कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योगों में परिवर्तन ला रही है तथा विश्व की आर्थिक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि बिजनेस लीडरशिप की जरूरतों में भी बदलाव हुआ है। लीडर्स का दायित्व अब केवल लाभ प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अस्थिरता से निपटना, आत्मविश्वास बढ़ाते रहना और ध्रुवीकरण की ओर बढ़ती दुनिया में हितधारकों के बीच संपर्क स्थापित करना जरूरी हो गया है। केलोग और आईएसबी के बीच 25 वर्षों की मजबूत पार्टनरशिप के बारे में बात करते हुए, डीन कोरेली ने कहा कि भारत ग्लोबल इनोवेशन में केंद्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है। इस समय आईएसबी ग्रेजुएट्स के पास विश्व के भविष्य को आकार देने का अद्वितीय अवसर है। उन्होंने ग्रेजुएट्स से अपनी शिक्षा का उपयोग विभिन्न विचारों और लोगों को आपस में जोड़ने के लिए करने का आग्रह किया। असली प्रगति और स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब जिज्ञासु बने रहकर अन्य देशों के साथ सहयोग करते हुए ईमानदारी से नेतृत्व किया जाए।
राकेश भारती मित्तल, चेयरपर्सन, आईएसबी मोहाली कैंपस एडवाइजरी बोर्ड ने कहा कि इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस ने 25 साल के सफर में ईमानदारी के सिद्धांतों को अपनाकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठा हासिल की है। सिल्वर जुबली के बैच को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भूराजनैतिक और टेक्नोलॉजिकल परिवर्तन के मौजूदा दौर में गतिहीन ज्ञान बहुत जल्दी पुराना हो जाता है। उन्होंने ग्रेजुएट्स को सुझाव दिया कि वो लगातार इनोवेट करते रहें और समाज की जरूरतों से जुड़े रहें। पारंपरिक फिलॉसफी के अनुरूप मित्तल ने पूर्व छात्रों से अनुरोध किया कि वो भविष्य की विपरीत परिस्थितियों का धैर्य से सामना करें तथा जीवन के प्रति आभार की भावना रखें।
आईएसबी के डीन, मदन पिलुटला ने ग्रेजुएट होने वाले 25वें बैच से कहा कि उन्हें शोरगुल में से काम का संकेत तलाशना है। उन्हें सत्ता के सामने सदैव सत्य बोलना है, खासकर तब जब ऐसा करना मुश्किल हो। उन्होंने ग्रेजुएट्स को मुश्किलों से भागने की बजाय अपनी शिक्षा द्वारा चुनौतियों को हल करने की प्रेरणा दी।
सिल्वर जुबली के अवसर पर डीन पिलुटला ने कहा कि 25 साल सफलतापूर्वक पूरे करना बेहद संतोषजनक अनुभव है। उन्होंने कहा कि आईएसबी आगे भी कठोर एनालिटिकल स्किल्स वाले लीडर्स का विकास करता रहेगा, जो केवल दुनिया का अनुसरण नहीं करेंगे, बल्कि इसे आकार भी देंगे।
कृतिका गर्ग को आईएसबी-परमेश्वर गोदरेज अवार्ड से सम्मानित किया गया, जो ग्रेजुएट होने वाली क्लास की विद्यार्थी को सामाजिक कार्यों की अपनी प्रतिबद्धता के लिए दिया जाता है।