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Mohali News: ऑनलाइन डाटा एंट्री कंपनी ने ठगे 5.50 लाख
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मोहाली। जीरकपुर के माया गार्डन सिटी की रहने वाली रेनू गुप्ता ने एक निजी डाटा एंट्री कंपनी पर गंभीर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मोहाली को शिकायत देकर पुलिस की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है और मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
इस मामले में एसएसपी के निर्देशों पर जिला होशियारपुर के सेक्टर-3 मुकेरिया के रहने वाले जयपाल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पीड़िता के अनुसार 4 जुलाई 2025 को उन्होंने जीवीटी टाटा एंट्री नामक कंपनी के प्रतिनिधि जय पाल शर्मा के साथ 60 सीटों के टाइपिंग वर्क का अनुबंध किया था। समझौते के तहत कंपनी को समय पर कार्य उपलब्ध कराना और मासिक भुगतान करना था। आरोप है कि कंपनी ने निवेश के रूप में 5.50 लाख रुपये लेने के बाद न तो काम उपलब्ध कराया और न ही तय शर्तों का पालन किया।
रेनू गुप्ता का कहना है कि सितंबर और अक्टूबर माह के भुगतान सहित कुल 12 लाख 99 हजार 232.20 रुपये की राशि कंपनी को दी गई, लेकिन बाद में पता चला कि दिया गया अनुबंध फर्जी था। कंपनी की गूगल वेबसाइट हट चुकी है और डोमेन बिक्री के लिए उपलब्ध है, जिससे धोखाधड़ी की मंशा स्पष्ट हुई।
रेनू ने 28 नवंबर 2025 को थाना जीरकपुर में शिकायत दर्ज करवाई थी जिसे जांच अधिकारी और थाना प्रभारी द्वारा हस्ताक्षरित भी किया गया, लेकिन एक माह बीतने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बताया जा रहा है कि नई प्रक्रिया के तहत फाइल को दोबारा अलग-अलग स्तरों से अनुमोदन के लिए लौटाया गया, जिससे मामला लटका रहा। एसएसपी को शिकायत दी गई जिनके निर्देशों पर आरोपी जयपाल के खिलाफ थाना जीरकपुर में मामला दर्ज कर लिया है।
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इस मामले में एसएसपी के निर्देशों पर जिला होशियारपुर के सेक्टर-3 मुकेरिया के रहने वाले जयपाल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पीड़िता के अनुसार 4 जुलाई 2025 को उन्होंने जीवीटी टाटा एंट्री नामक कंपनी के प्रतिनिधि जय पाल शर्मा के साथ 60 सीटों के टाइपिंग वर्क का अनुबंध किया था। समझौते के तहत कंपनी को समय पर कार्य उपलब्ध कराना और मासिक भुगतान करना था। आरोप है कि कंपनी ने निवेश के रूप में 5.50 लाख रुपये लेने के बाद न तो काम उपलब्ध कराया और न ही तय शर्तों का पालन किया।
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रेनू गुप्ता का कहना है कि सितंबर और अक्टूबर माह के भुगतान सहित कुल 12 लाख 99 हजार 232.20 रुपये की राशि कंपनी को दी गई, लेकिन बाद में पता चला कि दिया गया अनुबंध फर्जी था। कंपनी की गूगल वेबसाइट हट चुकी है और डोमेन बिक्री के लिए उपलब्ध है, जिससे धोखाधड़ी की मंशा स्पष्ट हुई।
रेनू ने 28 नवंबर 2025 को थाना जीरकपुर में शिकायत दर्ज करवाई थी जिसे जांच अधिकारी और थाना प्रभारी द्वारा हस्ताक्षरित भी किया गया, लेकिन एक माह बीतने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बताया जा रहा है कि नई प्रक्रिया के तहत फाइल को दोबारा अलग-अलग स्तरों से अनुमोदन के लिए लौटाया गया, जिससे मामला लटका रहा। एसएसपी को शिकायत दी गई जिनके निर्देशों पर आरोपी जयपाल के खिलाफ थाना जीरकपुर में मामला दर्ज कर लिया है।
