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Mohali News: प्लास्टिक बैन कागजों में सिमटा, जीरकपुर की सड़कों पर लगे पॉलीथिन के अंबार

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2026 02:31 AM IST
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Plastic ban remains on paper, heaps of polythene litter the streets of Zirakpur
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जीरकपुर। सरकार और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद जीरकपुर में पॉलीथिन का अवैध इस्तेमाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर की हर गलियों से लेकर मुख्य सड़कों पर भारी मात्रा में पॉलीथिन देखने की मिल रही है। आलम यह है कि घरेलू सामान से लेकर रसोई के कचरे तक को पॉलीथिन में कैद कर सड़कों पर फेंका जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस प्लास्टिक को पर्यावरण और पशुओं के लिए धीमा जहर घोषित कर प्रतिबंधित किया गया था, वही आज शहर की पहचान बनता जा रहा है। जीरकपुर के सिंहपुरा स्थित डंपिंग ग्राउंड की बात करें तो कचरे से अधिक पॉलीथिन के चिथडे देने को मिलते हैं।
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धड़ल्ले से हो रहा क्रय-विक्रय
जीरकपुर निवासी अजमेर सिंह ने कहा कि शहर के मुख्य बाजारों, रेहड़ी-फड़ियों और किराना दुकानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है। दुकानदार बिना किसी खौफ के ग्राहकों को पॉलीथिन में सामान दे रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर परिषद की टीमें कभी-कभार खानापूर्ति के लिए चालान काटती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा। कचरे के ढेर में 80 फीसदी हिस्सा केवल प्लास्टिक और पॉलीथिन का ही होता है।
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बेजुबानों की मौत का कारण बन रही प्लास्टिक
शहर के डंपिंग ग्राउंड्स और सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर बेजुबान पशुओं के लिए मौत का जाल बन चुके हैं। चारे की तलाश में गाय और सांड इन पॉलीथिन की थैलियों को भी निगल जाते हैं। लोग बचा हुआ खाना प्लास्टिक में बांधकर फेंक देते हैं, जिसे खाने के चक्कर में पशु उस घातक प्लास्टिक को भी खा लेते हैं। यह न केवल उनकी पाचन क्रिया को ठप करता है, बल्कि उन्हें तड़प-तड़प कर मरने पर मजबूर कर देता है। एक पशु प्रेमी होने के नाते हमारी अपील है कि कम से कम कचरे को प्लास्टिक में बांधकर न फेंकें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही किसी बेजुबान की जान ले सकती है। - नर सिंह, एनीमल लवर्स, मोहाली

पशु के पेट में पत्थर बन जाता है पॉलीथिन


पशु चिकित्सकों के अनुसार, पॉलीथिन पशुओं के लिए जानलेवा है। डॉ. विकास सैनी बताते हैं कि गाय के पेट (रुमेन) में जाकर प्लास्टिक जमा हो जाता है और एक सख्त गेंद जैसा रूप ले लेता है। यह पचता नहीं है, जिससे पशु को भूख लगना बंद हो जाती है। इससे पशुओं में एसिडोसिस, टॉक्सिमेमिया (खून में जहर फैलना) और आंतरिक अंगों में संक्रमण हो जाता है। धीरे-धीरे पशु कमजोर होने लगता है और अंत में तड़पकर उसकी मृत्यु हो जाती है। कई मामलों में ऑपरेशन के दौरान गायों के पेट से 50 से 70 किलो तक प्लास्टिक निकलता है।


कब से बैन और क्या है जुर्माना?
भारत सरकार ने 1 जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी तय किया गया था। इस प्रावधान में आम जनता के प्लास्टिक इस्तेमाल करने पर पहली बार पकड़े जाने पर पांच सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक का जुर्माना है। वहीं दुकानदार-विक्रेता पर दो हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और दुकान का लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान। इसके अलावा संस्थान-निर्माता पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत 5 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।- बलजिंदर सिंह, एडवोकेट ,पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट।



हम समय-समय पर चेकिंग अभियान चलते हैं। जो भी दुकानदार पॉलीथिन में सामान बेचता पाया जाता है तो तत्काल प्रभाव से जुर्माना लगाया जाता है। हालही में चेकिंग के दौरान टीम ने करीब 4500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। -मनोज कुमार, सेनेटरी इंस्पेक्टर नगर परिषद जीरकपुर
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