{"_id":"696fee2eceb73e0139032ce8","slug":"pots-made-from-plastic-bottles-have-become-dustbins-and-plants-have-dried-up-due-to-lack-of-care-mohali-news-c-71-1-mli1016-138249-2026-01-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: प्लास्टिक बोतलों से बने गमले बने डस्टबिन, देखरेख के अभाव में सूखे पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: प्लास्टिक बोतलों से बने गमले बने डस्टबिन, देखरेख के अभाव में सूखे पौधे
विज्ञापन
विज्ञापन
जीरकपुर। फरवरी 2023 में समाजसेवी संस्था पुकार की पहल पर नगर परिषद कार्यालय की दीवारों पर प्लास्टिक की बोतलों से तैयार किए गए आकर्षक गमले लगाए गए थे। इन बोतलों को काटकर सुंदर रंगों से रंगा गया और करीब 30 से 35 गमलों में पौधे रोपित कर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया था। उस समय नगर परिषद अधिकारियों ने इन पौधों की नियमित देखरेख और सिंचाई की जिम्मेदारी परिषद के माली को सौंपने का भरोसा भी दिलाया था।
शुरुआती करीब दो माह तक व्यवस्था सुचारु रही, लेकिन इसके बाद लापरवाही के चलते पौधों की देखभाल बंद हो गई। नतीजतन पौधे सूख गए और गमलों की मिट्टी कठोर होकर पत्थर जैसी हो गई। मौजूदा हालात यह हैं कि इन बोतलनुमा गमलों का इस्तेमाल लोग डस्टबिन के रूप में करने लगे हैं, जिससे कभी सुंदर दिखने वाली यह व्यवस्था बदसूरती में बदल चुकी है।
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व लोकल बॉडीज विधानसभा कमेटी की बैठक नगर परिषद कार्यालय में आयोजित हुई थी, जिसमें पंजाब के कई मंत्री और विधायक शामिल हुए थे। उस दौरान नगर परिषद अधिकारियों ने आनन-फानन में इन गमलों में नए पौधे लगवाकर उन्हें हरा-भरा कर दिया था। हालांकि बैठक समाप्त होते ही फिर से लापरवाही बरती गई और आज अधिकांश पौधे एक बार फिर सूख चुके हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस ध्यान नहीं दिया गया।
मुकेश कुमार, प्रदीप कुमार, साहिल, गुरदीप सिंह आदि का कहना है कि नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी का वाहन प्रतिदिन इसी स्थान पर खड़ा होता है, इसके बावजूद इन गमलों की दुर्दशा पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति नगर परिषद की कार्यप्रणाली और स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण को लेकर उसकी गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।
कोट
ये पौधे सीजनल होते हैं और मौसम के अनुसार ही इनमें फूल आते हैं। अब इनका सीजन आ चुका है। बसंत पंचमी के बाद मौसम में बदलाव आएगा, जिसके बाद इन पौधों की पूरी तरह से देखरेख की जाएगी। - परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जीरकपुर
Trending Videos
शुरुआती करीब दो माह तक व्यवस्था सुचारु रही, लेकिन इसके बाद लापरवाही के चलते पौधों की देखभाल बंद हो गई। नतीजतन पौधे सूख गए और गमलों की मिट्टी कठोर होकर पत्थर जैसी हो गई। मौजूदा हालात यह हैं कि इन बोतलनुमा गमलों का इस्तेमाल लोग डस्टबिन के रूप में करने लगे हैं, जिससे कभी सुंदर दिखने वाली यह व्यवस्था बदसूरती में बदल चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व लोकल बॉडीज विधानसभा कमेटी की बैठक नगर परिषद कार्यालय में आयोजित हुई थी, जिसमें पंजाब के कई मंत्री और विधायक शामिल हुए थे। उस दौरान नगर परिषद अधिकारियों ने आनन-फानन में इन गमलों में नए पौधे लगवाकर उन्हें हरा-भरा कर दिया था। हालांकि बैठक समाप्त होते ही फिर से लापरवाही बरती गई और आज अधिकांश पौधे एक बार फिर सूख चुके हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस ध्यान नहीं दिया गया।
मुकेश कुमार, प्रदीप कुमार, साहिल, गुरदीप सिंह आदि का कहना है कि नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी का वाहन प्रतिदिन इसी स्थान पर खड़ा होता है, इसके बावजूद इन गमलों की दुर्दशा पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति नगर परिषद की कार्यप्रणाली और स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण को लेकर उसकी गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।
कोट
ये पौधे सीजनल होते हैं और मौसम के अनुसार ही इनमें फूल आते हैं। अब इनका सीजन आ चुका है। बसंत पंचमी के बाद मौसम में बदलाव आएगा, जिसके बाद इन पौधों की पूरी तरह से देखरेख की जाएगी। - परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जीरकपुर